सर्दियों में मावठ या कड़ाके की ठंड क्यों पड़ती है? जानिए पश्चिमी विक्षोभ, ठंडी हवाओं, नमी और पार्थिव विकिरण का मौसम पर असर।
मानसून की विदाई के साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने लगता है। खासकर उत्तर और मध्य भारत में ठंड धीरे-धीरे दस्तक देने लगती है। सर्दियों में कभी अचानक बारिश यानी मावठ देखने को मिलती है तो कभी तापमान तेजी से गिरने पर शीतलहर और गलन बढ़ जाती है। सवाल है कि आखिर मौसम वैज्ञानिक पहले से कैसे पता लगाते हैं कि बारिश होगी या कड़ाके की ठंड पड़ेगी?
इसका जवाब वायुमंडलीय दबाव, हवाओं की दिशा, नमी, बादलों और पश्चिमी विक्षोभ जैसी मौसमी प्रणालियों में छिपा है। इन सभी परिस्थितियों का अध्ययन करके मौसम के संभावित बदलाव का अनुमान लगाया जाता है।
सर्दियों में मावठ क्यों होती है?
उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान होने वाली बारिश के पीछे पश्चिमी विक्षोभ यानी Western Disturbance की अहम भूमिका होती है। यह मौसम प्रणाली पश्चिमी एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के आसपास बनने वाले वायुमंडलीय बदलावों से जुड़ी होती है।
नमी से भरी यह प्रणाली पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक पहुंचती है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के दूसरे इलाकों में बारिश हो सकती है। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में इसी सिस्टम के कारण बर्फबारी की स्थिति बन सकती है।
बारिश का संकेत कैसे मिलता है?
मौसम वैज्ञानिक सर्दियों में कई तरह के संकेतों पर नजर रखते हैं। हवा की दिशा में बदलाव और वातावरण में बढ़ती नमी इनमें प्रमुख हैं।
अगर ठंड के मौसम में हवा का रुख उत्तर-पश्चिम की जगह पूर्व या दक्षिण-पूर्व की ओर होने लगे और वातावरण में नमी बढ़ने लगे, तो बारिश की संभावना बढ़ सकती है। इसी तरह बादलों की स्थिति और रात के तापमान में होने वाला बदलाव भी मौसम की संभावित गतिविधि का संकेत देता है।
घने बादल रहने पर रात के समय धरती से निकलने वाली गर्मी पूरी तरह अंतरिक्ष में नहीं जा पाती। ऐसे में रात का तापमान साफ आसमान वाली रातों की तुलना में अपेक्षाकृत ज्यादा रह सकता है।
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कड़ाके की ठंड कब पड़ती है?
मावठ के उलट कड़ाके की ठंड के लिए कई अलग परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं। जब हिमालय और आसपास के बर्फीले क्षेत्रों से ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों की तरफ पहुंचती हैं, तो तापमान में तेज गिरावट आ सकती है।
इसके साथ अगर आसमान साफ रहे और बादलों की गैरमौजूदगी हो, तो धरती दिन में जमा की गई गर्मी रात के दौरान तेजी से खो देती है। इसे पार्थिव विकिरण कहा जाता है। इससे रात और सुबह के तापमान में काफी गिरावट आ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में पाला, कोहरा और शीतलहर जैसी स्थिति बनने की संभावना बढ़ जाती है।
मावठ के बाद ठंड ज्यादा क्यों महसूस होती है?
सर्दियों की बारिश के बाद वातावरण में नमी बढ़ जाती है। बारिश खत्म होने के बाद अगर ठंडी हवाएं चलने लगें और तापमान भी नीचे जाए, तो ठंड का असर और ज्यादा महसूस हो सकता है।
मावठ के बाद जमीन और वातावरण की नमी, कम तापमान और ठंडी हवाओं का मेल लोगों को ज्यादा गलन महसूस करा सकता है। यही वजह है कि सर्दियों की बारिश के बाद कई बार धूप निकलने के बावजूद ठंड कम होने में समय लगता है।
मौसम का अनुमान किन चीजों से लगाया जाता है?
मौसम की संभावित स्थिति समझने के लिए वैज्ञानिक कई संकेतों और आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं। इनमें वायुमंडलीय दबाव, हवा की दिशा और गति, तापमान, नमी, बादलों की स्थिति और पश्चिमी विक्षोभ प्रमुख हैं।
इन परिस्थितियों में होने वाले बदलावों को मौसम मॉडल और अन्य वैज्ञानिक आंकड़ों के साथ मिलाकर बारिश, शीतलहर या तापमान में गिरावट की संभावना का पूर्वानुमान तैयार किया जाता है।
इसलिए सर्दियों में मावठ और कड़ाके की ठंड अचानक होने वाली घटनाएं जरूर लग सकती हैं, लेकिन इनके पीछे वातावरण में होने वाले कई वैज्ञानिक बदलाव पहले से मौजूद होते हैं।

