बोन डेंसिटी कम होने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। जानें उम्र, कैल्शियम-विटामिन D की कमी और जीवनशैली से जुड़े कारणों के साथ बचाव के आसान तरीके।
हमारी हड्डियां शरीर को मजबूत सहारा देने के साथ चलने-फिरने और रोजमर्रा की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हड्डियों की मजबूती का अंदाजा उनकी बोन डेंसिटी यानी हड्डियों में मौजूद मिनरल की मात्रा से लगाया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ बोन डेंसिटी में कमी आ सकती है। इसके अलावा खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, कुछ स्वास्थ्य समस्याएं और जीवनशैली से जुड़े कारक भी हड्डियों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।
हड्डियों की कमजोरी शुरुआती दौर में हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ सामने नहीं आती। इसलिए उम्र और जोखिम कारकों के अनुसार बोन हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या होती है बोन डेंसिटी?
बोन डेंसिटी का संबंध हड्डियों में मौजूद खनिज पदार्थों की मात्रा से होता है। इनमें कैल्शियम और फॉस्फोरस प्रमुख हैं। पर्याप्त मिनरल होने पर हड्डियों को मजबूती बनाए रखने में मदद मिलती है, जबकि डेंसिटी कम होने पर हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम बढ़ सकता है।
बोन डेंसिटी कम होने की स्थिति को आमतौर पर ऑस्टियोपीनिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसे स्तरों में समझा जाता है। ऑस्टियोपीनिया में बोन डेंसिटी सामान्य से कम होती है, जबकि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां अधिक कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है।
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उम्र बढ़ने से क्यों कम होती है बोन डेंसिटी?
उम्र के साथ शरीर में हड्डियों के निर्माण और उनके टूटने की प्राकृतिक प्रक्रिया में बदलाव आता है। समय के साथ हड्डियों का मिनरल मास कम हो सकता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव भी बोन लॉस को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा शरीर में कैल्शियम या विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा न होना भी हड्डियों की सेहत के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
किन लोगों में कमजोर हड्डियों का जोखिम ज्यादा हो सकता है?
हर व्यक्ति में बोन डेंसिटी कम होने का कारण एक जैसा नहीं होता। बढ़ती उम्र के अलावा लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना भी हड्डियों के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
जिन लोगों की डाइट में कैल्शियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, उनमें भी बोन हेल्थ प्रभावित हो सकती है। कम वजन, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी कुछ लोगों में जोखिम बढ़ाने वाले कारक हो सकते हैं।
कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल भी हड्डियों पर असर डाल सकता है। इसलिए लंबे समय से दवा लेने वाले लोगों को उसे अपने स्तर पर बंद करने के बजाय डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण हैं। डाइट में कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दूध और डेयरी उत्पाद, कुछ हरी सब्जियां और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी जरूरत व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज भी जरूरी
नियमित शारीरिक गतिविधि हड्डियों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद हो सकती है। पैदल चलना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और अन्य वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज को अपनी क्षमता के अनुसार रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
अगर पहले से हड्डियों की कमजोरी, फ्रैक्चर या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
बोन डेंसिटी कम होने पर शुरुआती चरण में हमेशा कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन लगातार पीठ या कमर में दर्द, समय के साथ लंबाई कम होना या मामूली चोट के बाद बार-बार फ्रैक्चर जैसी स्थिति होने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार Bone Mineral Density (BMD) टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे हड्डियों की मिनरल डेंसिटी का आकलन करने में मदद मिलती है।

