राजस्थान में 4G और ब्रॉडबैंड नेटवर्क विस्तार को लेकर सरकार ने दिए निर्देश, RoW प्रक्रिया तेज करने और 150 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का लक्ष्य।
राजस्थान में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और प्रदेश के दूरदराज इलाकों तक तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक हुई। बैठक में ब्रॉडबैंड नेटवर्क, 4G कवरेज, राइट ऑफ वे (RoW) नियमों और केंद्र की विशेष सहायता योजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के ग्रामीण, जनजातीय, सीमावर्ती और वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। सरकार का जोर ऐसे क्षेत्रों में निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर है, ताकि लोगों को ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी न हो।
RoW नियमों को समय पर लागू करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने राज्य के सभी नगरीय निकायों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को नए राइट ऑफ वे (RoW) नियमों को निर्धारित समय सीमा में अपनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि सात प्रमुख विभाग पहले ही राज्य के RoW पोर्टल से जुड़ चुके हैं, जबकि बाकी संस्थाओं को भी जल्द पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया को समाप्त कर RoW से संबंधित सभी आवेदन और अनुमतियां राज्य पोर्टल के जरिए ही संचालित की जाएं। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और आवेदनों के निस्तारण को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
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150 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पर नजर
केंद्र सरकार की पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना 2026-27 के तहत राज्य को मिलने वाली संभावित प्रोत्साहन राशि पर भी बैठक में चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी RoW आवेदनों का निस्तारण किया जा चुका है।
RoW अनुमतियों के निस्तारण में औसत समय करीब 32 दिन बताया गया। मुख्य सचिव ने इसे 45 दिनों से कम बनाए रखने पर संतोष जताया। उन्होंने संशोधित भारतनेट परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और ऊर्जा विभाग की कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म तथा एकीकृत बिलिंग व्यवस्था से संबंधित कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। इन प्रक्रियाओं के जरिए राज्य के लिए 150 करोड़ रुपये की पूरी प्रोत्साहन राशि हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
4G सेचुरेशन परियोजना को मिलेगी रफ्तार
बैठक में दूरसंचार विभाग की 4G सेचुरेशन परियोजना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने उन जिलों में मोबाइल टावरों के लिए भूमि आवंटन में तेजी लाने को कहा, जहां प्रक्रिया अभी लंबित है।
उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों में लंबित भूमि आवंटन के मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों के ऐसे गांव, जहां अभी तक पर्याप्त मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कनेक्टिविटी से जोड़ने पर जोर दिया गया।
टेलीकॉम कंपनियों की समस्याओं पर भी चर्चा
बैठक में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर भी विचार किया गया। अधिकारियों को स्थानीय निकायों द्वारा अस्वीकृत आवेदनों की प्रोसेसिंग फीस वापस करने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए गए।
मोबाइल टावर लगाने से जुड़े मामलों में भी RoW नियमों के अनुसार कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि बिना उचित प्रक्रिया और कानूनी आधार के मोबाइल टावर स्थापना पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। ऐसे मामलों का निपटारा संबंधित नियमों के अनुरूप जिला स्तर पर किया जाए।
इसके अलावा स्मार्ट मीटरिंग, समूह बिलिंग और स्मार्ट सिटी डक्ट में केबल बिछाने से जुड़े शुल्क को अधिक व्यावहारिक और मानकीकृत बनाने पर भी चर्चा हुई।
कई विभागों के अधिकारी बैठक में रहे मौजूद
बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के शासन सचिव रवि कुमार सुरपुर, आयुक्त हिमांशु गुप्ता समेत दूरसंचार विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ऊर्जा, पंचायती राज, राजस्व, परिवहन, पर्यटन, पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर और आवासन से जुड़े विभागों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
वहीं, सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।
राज्य सरकार का फोकस अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, तेज RoW मंजूरी और ऐसे इलाकों में 4G नेटवर्क पहुंचाने पर है, जहां अभी कनेक्टिविटी सीमित है। इन पहलों के जरिए ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

