रायसेन की जानकी बाई ने 3 एकड़ जमीन पर आधुनिक खेती, मछली पालन और पशुपालन अपनाकर अपनी सालाना आय 1 लाख से बढ़ाकर 4-5 लाख रुपये तक पहुंचाई।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की एक महिला किसान ने आधुनिक कृषि तकनीकों और खेती के नए तरीकों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति बदल दी है। सिलवानी विकासखंड के ग्राम बेगवाकला की रहने वाली जानकी बाई कभी पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी हासिल कर पाती थीं, लेकिन आज सब्जी उत्पादन, मछली पालन, पशुपालन और बागवानी के जरिए सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक कमा रही हैं। उनकी यह सफलता दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बदली खेती की तस्वीर
जानकी बाई के परिवार के पास लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि है। पहले वह अपने पति के साथ पारंपरिक तरीके से खेती करती थीं, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। खेती से आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने नई तकनीकों को अपनाने का फैसला किया।
गांव में आयोजित एक जागरूकता शिविर के दौरान उन्हें सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग के विकासखंड कार्यालय से संपर्क किया। आत्मा परियोजना के बीटीएम रघुवीर सिंह कुशवाह ने उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों और विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
जानकी बाई और उनके पति ने कृषि विज्ञान केंद्र, नकतरा और बनखेड़ी में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। नई तकनीकों और फसल विविधीकरण से उनकी आय में सुधार होने लगा।
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बलराम तालाब योजना से शुरू किया मछली पालन
खेती पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय जानकी बाई ने आमदनी के अन्य विकल्प भी तलाशे। इसी क्रम में उन्होंने वर्ष 2023 में बलराम तालाब योजना के अंतर्गत एक एकड़ क्षेत्र में तालाब बनवाया और मछली पालन शुरू किया।
जानकारी के अनुसार, मछली पालन से उन्हें हर साल करीब 1.5 लाख रुपये की आय होती है। इस गतिविधि ने उनके परिवार के लिए कमाई का एक अतिरिक्त साधन तैयार किया है।
उनके बेटे ने भी कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में रुचि दिखाई। उसने सरकारी योजना के माध्यम से करनाल में उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा झांसी में मछली पालन और डेयरी व्यवसाय से संबंधित प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। परिवार के सदस्य अब प्रशिक्षण से मिली जानकारी का उपयोग कृषि कार्यों को बेहतर बनाने में कर रहे हैं।
नेट हाउस में सब्जी उत्पादन, पशुपालन से भी कमाई
जानकी बाई ने अपने खेत में नेट हाउस तैयार किया है, जहां वह सब्जियों की खेती करती हैं। इसके अलावा उनके पास नौ दुधारू पशु हैं, जिनसे डेयरी और पशुपालन के जरिए आमदनी होती है।
बागवानी को भी उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों का हिस्सा बनाया है। खेत में आम, कटहल और सीताफल के पेड़ लगाए गए हैं। इस तरह सीमित कृषि भूमि पर उन्होंने कई अलग-अलग गतिविधियों को जगह दी है।
सब्जी उत्पादन, मछली पालन, पशुपालन और फलदार पौधों की खेती से परिवार को आय के कई स्रोत मिले हैं। इससे किसी एक फसल या कृषि गतिविधि पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिली है।
सालाना आय एक लाख से बढ़कर 4-5 लाख रुपये तक पहुंची
जानकी बाई के मुताबिक, वर्ष 2020 से पहले खेती से उनके परिवार की सालाना आमदनी लगभग एक लाख रुपये तक सीमित थी। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, प्रशिक्षण लेने और खेती के साथ अन्य व्यवसाय शुरू करने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर करीब 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
आय में हुए इस बदलाव से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवन स्तर में भी सुधार आया है। जानकी बाई का मानना है कि किसान यदि खेती के नए तरीकों को अपनाएं और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करें, तो कम जमीन से भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं।
दूसरे किसानों के लिए बनीं प्रेरणा
जानकी बाई की सफलता इस बात का उदाहरण है कि कृषि में नवाचार, प्रशिक्षण और फसल विविधीकरण से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी उनके खेत का दौरा किया है। इस दौरान जिला कृषि अधिकारी और आत्मा परियोजना के संचालक ने उनकी कृषि गतिविधियों का जायजा लिया।
जानकी बाई ने अपनी सफलता का श्रेय सरकार की योजनाओं, कृषि विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण को दिया है। उनकी कहानी रायसेन जिले में महिला किसान सशक्तिकरण और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण पेश करती है।

