धान, सोयाबीन और रामतिल की फसल में कीट व रोग का खतरा बढ़ा। कृषि विभाग ने फुदका, पीला मोजेक और अमरबेल से बचाव के उपाय बताए।
जिले में धान, सोयाबीन और रामतिल की फसलों में अलग-अलग कीट एवं खरपतवार संबंधी समस्याएं सामने आने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।
कृषि विभाग के मुताबिक धान की फसल में भूरा फुदका और सफेद फुदका, जबकि सोयाबीन में पीला मोजेक और सफेद फुदका परेशानी का कारण बन सकते हैं। वहीं, रामतिल की फसल में अमरबेल का प्रकोप फसल की बढ़वार और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इन समस्याओं के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और फसल का विकास प्रभावित हो सकता है।
धान में फुदका कीट से बचाव
धान में भूरा और सफेद फुदका दिखाई देने पर कृषि विभाग ने अनुशंसित कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी है। प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 60 मिलीलीटर, थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 80 ग्राम या पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी 120 ग्राम की अनुशंसित मात्रा का प्रयोग किया जा सकता है।
छिड़काव करते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि दवा का घोल पौधे के निचले हिस्से और पत्तियों के आधार तक अच्छी तरह पहुंचे। फुदका कीट अक्सर इन्हीं हिस्सों में पाया जाता है, इसलिए केवल ऊपर से छिड़काव करने के बजाय पौधे के प्रभावित हिस्सों को अच्छी तरह कवर करना जरूरी है।
सोयाबीन में पीला मोजेक और सफेद फुदका का नियंत्रण
सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक रोग और सफेद फुदका के प्रकोप को देखते हुए किसानों को समय रहते निगरानी करने की सलाह दी गई है। विभाग के अनुसार प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में नीम ऑयल 1500 पीपीएम 166.66 मिलीलीटर, थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 80 ग्राम, प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 33 मिलीलीटर अथवा इमेजापायर 10 प्रतिशत एसएल 145 मिलीलीटर की अनुशंसित मात्रा का इस्तेमाल किया जा सकता है।
फसल में पीलेपन या कीटों की संख्या बढ़ने जैसी स्थिति दिखाई देने पर किसानों को तुरंत खेत का निरीक्षण करना चाहिए और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए।
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रामतिल में अमरबेल से ऐसे करें बचाव
रामतिल की फसल में अमरबेल का प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसके नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने प्रति एकड़ नीम ऑयल 1500 पीपीएम 166.66 मिलीलीटर अथवा पेंडीमेथलीन 30 ईसी 80 मिलीलीटर की अनुशंसित मात्रा के उपयोग की जानकारी दी है।
अमरबेल के शुरुआती प्रकोप को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर नियंत्रण नहीं होने पर यह फसल के पौधों से पोषक तत्वों का उपयोग कर उनकी वृद्धि को प्रभावित कर सकती है।
यूरिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें
कृषि विभाग ने किसानों को फुदका की समस्या वाले खेतों में नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। जरूरत से अधिक यूरिया देने पर पौधों की पत्तियां अधिक कोमल हो सकती हैं, जिससे फुदका जैसे रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है।
इसके अलावा कीटनाशक का छिड़काव करते समय खेत में पानी का स्तर नियंत्रित रखने और दवा को पौधों के निचले हिस्से तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
एक ही कीटनाशक बार-बार इस्तेमाल करने से बचें
कृषि विभाग ने किसानों को कीटनाशकों के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की भी सलाह दी है। किसी एक रासायनिक समूह की दवा का लगातार बार-बार प्रयोग करने से कीटों में उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इसलिए जरूरत के अनुसार अनुशंसित दवाओं का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।
किसानों को सलाह दी गई है कि फसल में किसी भी प्रकार का कीट, रोग या खरपतवार दिखाई देने पर तुरंत पहचान करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से उचित सलाह लेकर ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।

