नमस्ते-सुय योजना के तहत कैलाश चंद्र को ₹5.93 लाख की सब्सिडी मिली। सक्शन मशीन से शुरू किया स्वच्छता कारोबार, अब खुद बने उद्यमी और 2 लोगों को रोजगार दिया।
आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों से आने वाले सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और स्थायी रोजगार हासिल करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। सीमित शिक्षा, अनिश्चित आमदनी और लंबे समय तक शारीरिक श्रम करने की मजबूरी उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। ऐसे में नमस्ते (NAMASTE) योजना के तहत स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) सफाई कर्मियों को मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं से जोड़कर स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध करा रही है।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के 63 वर्षीय कैलाश चंद्र की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। वर्षों तक सीवर सफाई का कठिन काम करने के बाद उन्होंने सरकारी सहायता के जरिए अपना मैकेनाइज्ड स्वच्छता सेवा व्यवसाय शुरू किया और अब खुद उद्यमी बनने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
छठी कक्षा तक पढ़ाई, वर्षों तक किया सफाई का काम
कैलाश चंद्र झुंझुनूं जिले के गुढ़ा गोड़जी की हरिजन बस्ती के रहने वाले हैं। उन्होंने छठी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की और परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए लंबे समय तक स्वच्छता से जुड़े कार्यों पर निर्भर रहे।
उम्र बढ़ने के साथ सीवर सफाई का शारीरिक रूप से कठिन काम उनके लिए और चुनौतीपूर्ण होता गया। सीमित आय, तकनीकी संसाधनों की कमी और रोजगार के सीमित विकल्पों के बावजूद उन्होंने परिवार का खर्च चलाने के लिए काम जारी रखा।
कैलाश चंद्र की शादी हो चुकी है और उनके तीन बेटे हैं। तीनों बेटे अपने-अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं। कैलाश चंद्र चाहते थे कि वे अपने और अपनी पत्नी के खर्च के लिए खुद आर्थिक रूप से सक्षम रहें और बच्चों पर निर्भर न हों।
NAMASTE-SUY Scheme ने दिया उद्यम शुरू करने का मौका
कैलाश चंद्र के जीवन में बदलाव नमस्ते योजना के तहत संचालित स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) से आया। इस योजना के माध्यम से उन्हें मशीनीकृत स्वच्छता सेवा शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता मिली।
24 सितंबर 2025 को उन्हें सक्शन मशीन से लैस ट्रैक्टर खरीदने के लिए पूंजीगत सब्सिडी के रूप में सहायता प्रदान की गई। इससे वे पारंपरिक और अधिक जोखिम वाले मैनुअल सीवर सफाई कार्य से आगे बढ़कर मशीन आधारित स्वच्छता सेवा का व्यवसाय शुरू कर सके।
₹11.86 लाख की परियोजना में मिली ₹5.93 लाख सब्सिडी
कैलाश चंद्र के स्वच्छता उद्यम की कुल परियोजना लागत ₹11.86 लाख थी। इसमें ₹5.93 लाख का ऋण और ₹5.93 लाख की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी।
इस वित्तीय सहायता से उन्होंने ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन खरीदी। मशीन के इस्तेमाल से स्वच्छता संबंधी काम को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से करने में मदद मिली।
इस बदलाव ने उन्हें केवल नौकरी या मजदूरी पर निर्भर रहने के बजाय अपना व्यवसाय चलाने का अवसर दिया।
also read: प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना क्या है? जानें पात्रता, लाभ और आवेदन का…
अब नगर पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में दे रहे सेवाएं
स्वच्छता उद्यम शुरू करने के बाद कैलाश चंद्र अब नगर पंचायत उदयपुरवाटी और झुंझुनूं जिले के आसपास के इलाकों में सीवर सफाई और अन्य स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
उनका व्यवसाय सिर्फ उनकी आय तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने उद्यम में एक ड्राइवर और एक हेल्पर को रोजगार भी दिया है। ड्राइवर को करीब ₹12,000 प्रति माह और हेल्पर को लगभग ₹8,000 मासिक वेतन दिया जाता है।
EMI और खर्च के बाद भी हो रही बचत
व्यवसाय के संचालन खर्च और करीब ₹8,267 की मासिक EMI का भुगतान करने के बाद भी कैलाश चंद्र लगभग ₹8,000 से ₹10,000 प्रति माह बचत कर पा रहे हैं।
नियमित बचत से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। अब वे अपनी पत्नी के साथ अधिक आत्मनिर्भर तरीके से जीवन गुजार पा रहे हैं।
मजदूरी से उद्यमिता तक का सफर
योजना का लाभ मिलने से पहले कैलाश चंद्र मुख्य रूप से कठिन और शारीरिक रूप से जोखिम वाले सीवर सफाई कार्य पर निर्भर थे। आमदनी सीमित थी और भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी।
अब स्थिति बदल गई है। वे मैकेनाइज्ड सैनिटेशन सर्विस के मालिक हैं और अपने अनुभव का इस्तेमाल व्यवसाय को आगे बढ़ाने में कर रहे हैं। साथ ही, उनके उद्यम से दो अन्य लोगों को रोजगार भी मिला है।
सुरक्षित और तकनीक आधारित स्वच्छता को बढ़ावा
कैलाश चंद्र की कहानी यह दिखाती है कि वित्तीय सहायता और आधुनिक मशीनरी की मदद से पारंपरिक सफाई कार्य से जुड़े लोगों को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
NAMASTE-SUY जैसी पहल का उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों को मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं से जोड़ने के साथ उनकी आजीविका को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में मदद करना है।
63 साल की उम्र में बने आत्मनिर्भर उद्यमी
63 वर्ष की उम्र में कैलाश चंद्र का अपना व्यवसाय खड़ा करना उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। आज वे न केवल अपने परिवार का खर्च स्वयं संभाल रहे हैं, बल्कि अपने व्यवसाय के जरिए दूसरे श्रमिकों को भी रोजगार दे रहे हैं।
उनका सफर दिखाता है कि लक्षित वित्तीय सहायता, तकनीक और उद्यमिता का अवसर मिलकर सफाई कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सीवर सफाई के कठिन काम से शुरू हुआ उनका सफर अब एक स्वच्छता उद्यमी के रूप में नई पहचान तक पहुंच चुका है।

