मंदसौर में उपज से उद्यम अभियान के तहत 12 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में औषधीय फसल क्लस्टर विकसित किया गया है। किसानों को प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने पर जोर।
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बाजार से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से औषधीय फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए ‘उपज से उद्यम’ अभियान के तहत औषधीय फसल उत्पादक किसानों का क्लस्टर विकसित किया गया है। इस क्लस्टर में 12 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि शामिल है, जहां विभिन्न औषधीय फसलों का उत्पादन किया जा रहा है।
जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अभियान की प्रगति और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने संबंधित अधिकारियों को किसानों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने और कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
तीन क्षेत्रों में विकसित किए गए औषधीय फसल क्लस्टर
मंदसौर जिले में औषधीय फसलों की खेती को संगठित रूप देने के लिए धमनार, सेमलिया हीरा और नंदावता में क्लस्टर तैयार किए गए हैं। इनमें अश्वगंधा, कालमेघ, चिया सीड, अकरकरा और चंद्रसूर जैसी फसलें उगाने वाले किसानों को शामिल किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ना है, ताकि फसलों की गुणवत्ता बेहतर हो और उत्पादन के साथ उनकी आमदनी में भी वृद्धि हो सके।
खेती के साथ प्रोसेसिंग और पैकेजिंग पर रहेगा जोर
औषधीय फसलों के क्लस्टर में केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर फसल कटाई के बाद की गतिविधियों को भी विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग और हर्बल उत्पादों के निर्माण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।
इन व्यवस्थाओं से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित उद्यम स्थापित करने के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, कृषि उत्पादों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी।
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औषधीय फसलों से बनाए जाएंगे विभिन्न उत्पाद
‘उपज से उद्यम’ अभियान के अंतर्गत औषधीय फसलों से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रस्तावित उत्पादों में शामिल हैं:
- अश्वगंधा: चूर्ण, कैप्सूल, टैबलेट और स्वास्थ्य पूरक उत्पाद।
- तुलसी: हर्बल चाय, तुलसी ड्रॉप्स और सूखे पत्तों के पैकेट।
- कालमेघ: पाउडर, टैबलेट और स्वरस।
- ईसबगोल: भूसी और पशु आहार से जुड़े उत्पाद।
- चिया सीड: आटा और तेल।
- अकरकरा: पाउडर और तेल।
- सफेद मूसली: चूर्ण, कैप्सूल, टैबलेट और तेल।
इन उत्पादों के निर्माण से कच्ची उपज के बजाय प्रसंस्कृत उत्पादों के विपणन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे किसानों को मूल्य श्रृंखला से जुड़ने और कृषि आधारित व्यवसाय विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की पहल
औषधीय फसल क्लस्टर विकसित करने का प्रमुख उद्देश्य किसानों और बाजार के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने और बाजार तक पहुंच मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना, उत्पादन लागत और जोखिम कम करना, गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाना तथा निर्यात की संभावनाएं विकसित करना भी इस पहल के प्रमुख लक्ष्य हैं।
कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश
बैठक में कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने अधिकारियों से कहा कि क्लस्टर में शामिल किसानों के साथ नियमित संवाद बनाए रखा जाए। उन्होंने किसानों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
इस पहल के माध्यम से मंदसौर जिले में औषधीय खेती, कृषि प्रसंस्करण और हर्बल उत्पाद निर्माण को एक साथ प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं।

