कपास किसान ऐप पर MSP पंजीयन 31 अक्टूबर तक जारी है। जानें कपास का समर्थन मूल्य, आवेदन प्रक्रिया और किसानों को मिलने वाली सहायता।
गुजरात के कपास किसानों के लिए जरूरी खबर है। राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर कपास बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। किसान कपास किसान मोबाइल ऐप के जरिए 31 अक्टूबर तक अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
पंजीयन पूरा होने के बाद ही पात्र किसान कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी CCI के खरीद केंद्रों पर समर्थन मूल्य के तहत अपनी कपास बेच सकेंगे। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते पंजीयन प्रक्रिया पूरी कर लें।
कपास किसान ऐप से मिलेगी खरीद की जानकारी
कपास किसान ऐप को किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ऐप पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद किसानों को उनके आसपास मौजूद खरीद केंद्र की जानकारी मिल सकती है।
इसके अलावा किसान ऐप के माध्यम से कपास खरीद की तारीख, केंद्र से संबंधित जानकारी और MSP से जुड़ी जरूरी जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल पंजीयन व्यवस्था से खरीद केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ को कम करने और किसानों के प्रतीक्षा समय को घटाने में मदद मिल सकती है।
ऐप में परेशानी हो तो हेल्पलाइन से लें सहायता
जिन किसानों को कपास किसान ऐप पर पंजीयन करने में तकनीकी परेशानी आ रही है, उनके लिए सहायता की व्यवस्था भी की गई है। किसान निर्धारित WhatsApp हेल्पलाइन के जरिए अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों को सलाह दी गई है कि पंजीयन करते समय आधार और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज करें। गलत जानकारी होने पर आगे भुगतान के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कपास का MSP कितना तय किया गया है?
केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। मध्यम रेशे वाली कपास के लिए MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि लंबे रेशे वाली कपास का समर्थन मूल्य 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
CCI निर्धारित नियमों के अनुसार किसानों से कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर करती है। इसलिए MSP का लाभ लेने के इच्छुक किसानों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीयन कराना जरूरी है।
कपास उत्पादकता मिशन के तहत किसानों को अतिरिक्त सहायता
गुजरात के कपास किसानों को MSP के अलावा कपास उत्पादकता मिशन के माध्यम से भी सहायता दी जा रही है। चालू वर्ष में गुजरात के लिए इस मिशन के तहत करीब 134.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य राज्य के 21 कपास उत्पादक जिलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करना है। इसके तहत किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
क्लोजर स्पेसिंग और ICM पर मिलेगी सहायता
कपास की खेती में सघन रोपण यानी क्लोजर स्पेसिंग तकनीक अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 14,000 रुपये तक की सहायता दी जा रही है।
वहीं, समेकित फसल प्रबंधन (ICM) को अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 7,500 रुपये की मदद मिल सकती है। हालांकि, एक किसान को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक ही इस सहायता का लाभ दिया जाएगा।
also read: मध्य प्रदेश में सोयाबीन भावांतर योजना का पंजीयन शुरू, 17 अक्टूबर तक…
गुजरात में बड़े पैमाने पर होती है कपास की खेती
गुजरात देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य के बड़ी संख्या में किसान परिवारों की आय कपास की खेती पर निर्भर करती है। फसल की खरीद के दौरान CCI के केंद्रों पर किसानों की संख्या बढ़ जाती है।
ऐसे में मोबाइल ऐप के जरिए पहले से पंजीयन और खरीद से जुड़ी जानकारी मिलने से किसानों को बार-बार खरीद केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है। इससे समय और परिवहन लागत दोनों बचाने में मदद मिल सकती है।
कपास उत्पादकता बढ़ाने पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार कपास की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता और बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। कपास उत्पादकता मिशन के तहत देश में औसत कपास उत्पादन को 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही वर्ष 2030-31 तक देश का कुल कपास उत्पादन 498 लाख गांठ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कपास से जुड़ी करीब दो हजार जिनिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है।
कस्तूरी कॉटन भारत से ब्रांडिंग को बढ़ावा
भारतीय कपास को वैश्विक बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के लिए कस्तूरी कॉटन भारत नाम से ब्रांडिंग और ट्रेसेबिलिटी पहल भी चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य भारतीय कपास की गुणवत्ता और उसकी पहचान को मजबूत करना है।
इसके अलावा कृषि बाजारों में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी उपज की बिक्री और कीमत से जुड़ी अधिक पारदर्शी जानकारी मिल सके।
31 अक्टूबर से पहले करा लें पंजीयन
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे 31 अक्टूबर की अंतिम तारीख से पहले कपास किसान ऐप पर अपना पंजीयन पूरा कर लें। अंतिम समय तक आवेदन टालने से तकनीकी समस्या या अन्य कारणों से परेशानी हो सकती है।
पंजीयन के दौरान आधार, बैंक खाता और अन्य जरूरी विवरण सही तरीके से दर्ज करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। सही जानकारी और समय पर पंजीयन रहने से MSP पर कपास बेचने और भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया में अनावश्यक दिक्कतों से बचा जा सकता है।

