दीव में NISD के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 56 महिलाओं को बुजुर्गों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और देखभाल का प्रशिक्षण दिया गया।
केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के दीव जिले में वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) और दीव जिला प्रशासन के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 56 महिलाओं को वृद्धजनों की देखभाल से संबंधित जरूरी जानकारी और व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण दिया गया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य परिवारों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सामुदायिक स्तर पर कार्यरत देखभालकर्ताओं को बुजुर्गों की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक जरूरतों के प्रति जागरूक बनाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया।
दीव के सरकारी शिक्षा केंद्र में आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के वरिष्ठ नागरिक प्रभाग की ओर से यह कार्यक्रम दीव के केवड़ी स्थित सरकारी शिक्षा केंद्र में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में परिवार के सदस्यों, प्राथमिक देखभालकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन 9 अक्टूबर को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने किया। उन्होंने बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को देखते हुए संवेदनशील देखभाल और सामुदायिक सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
इस दौरान प्रतिभागियों को वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की शपथ भी दिलाई गई।
उद्घाटन समारोह में मंत्रालय के संयुक्त सचिव सजीश कुमार एन., डॉ. संदीप आर. राठौड़, एनआईएसडी के निदेशक गौरव सिंह राजावत, दीव के जिला मजिस्ट्रेट राहुल देव बूरा और दीव जिला पंचायत की अध्यक्ष रंजीता कोटियाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
बुजुर्गों की देखभाल के लिए सिखाए गए जरूरी कौशल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों के साथ वरिष्ठ नागरिकों की दैनिक जरूरतों को समझने की जानकारी दी गई। इसके अलावा, बुजुर्गों की नियमित देखभाल और सुरक्षित जीवनशैली से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रमुख विषयों में शामिल रहे:
- स्वास्थ्य और प्राथमिक उपचार: सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतों की निगरानी और आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक सहायता।
- सुरक्षा और संक्रमण से बचाव: व्यक्तिगत स्वच्छता, संक्रमण की रोकथाम, घर में सुरक्षित वातावरण और गिरने से बचने के उपाय।
- पोषण एवं जलयोजन: संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और उम्र के अनुसार पोषण संबंधी जरूरतों की जानकारी।
- दैनिक गतिविधियों में सहयोग: चलने-फिरने, बैठने-उठने, सुरक्षित स्थानांतरण और सहायक उपकरणों के इस्तेमाल में मदद।
- मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य: प्रभावी संवाद, अकेलेपन और सामाजिक अलगाव को समझना तथा डिमेंशिया से प्रभावित वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल।
- दवाओं के उपयोग में सहायता: निर्धारित दवाओं के सुरक्षित उपयोग में सहयोग और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां।
इन विषयों के जरिए देखभालकर्ताओं को बुजुर्गों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर सहायता प्रदान करने के लिए तैयार किया गया।
also read: विशेष अभियान 6: सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने स्वच्छता, रिकॉ…
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार और सम्मान पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान केवल शारीरिक देखभाल ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को वरिष्ठ नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने, उनकी निजता बनाए रखने और उनकी भावनात्मक जरूरतों को समझने के महत्व से अवगत कराया गया।
इसके साथ ही, वृद्धजनों के साथ होने वाली उपेक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण की पहचान करने तथा ऐसे मामलों की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
प्रशिक्षण में सरकारी योजनाओं, संस्थागत सहायता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध कल्याणकारी सेवाओं की जानकारी भी दी गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद बुजुर्गों को संबंधित योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समय पर मिल सके।
व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए दिया गया प्रशिक्षण
पांच दिवसीय कार्यक्रम में विशेषज्ञों के व्याख्यानों के साथ संवादात्मक सत्र, व्यावहारिक प्रदर्शन, केस स्टडी और क्षेत्रीय उदाहरण शामिल किए गए। समूह गतिविधियों और प्रश्नोत्तर सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी समस्याएं साझा करने तथा वास्तविक परिस्थितियों में देखभाल के बेहतर तरीके समझने का अवसर मिला।
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि देखभालकर्ता केवल बुनियादी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि बुजुर्गों के साथ संवेदनशीलता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करना भी सीखें।
56 प्रशिक्षुओं को वितरित किए गए प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम का समापन 56 प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान करने के साथ हुआ। समापन समारोह में दीव नगर परिषद के मुख्य अधिकारी डी. आर. दमानिया, जिला मजिस्ट्रेट राहुल देव बूरा और दीव की अधिवक्ता हेमलता जी. बारिया मौजूद रहीं।
राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान और दीव जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस पहल ने सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर देखभाल व्यवस्था बनाने की पहल
बुजुर्गों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की उपलब्धता परिवारों और समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर दैनिक देखभाल और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
एनआईएसडी और स्थानीय प्रशासन की यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है। इससे जमीनी स्तर पर देखभाल व्यवस्था को मजबूत करने और बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

