गोरखपुर के अमित कुमार ने NAPDDR योजना के तहत नशामुक्ति उपचार से नई जिंदगी शुरू की। अब ऑटो चलाकर हर महीने ₹30,000 कमा रहे हैं।
नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी अमित कुमार (परिवर्तित नाम) की कहानी उम्मीद की नई किरण है। कभी नशे की आदत, आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव का सामना करने वाले अमित आज नशामुक्त जीवन जी रहे हैं। उपचार और पुनर्वास की मदद से उन्होंने अपनी जिंदगी को नई दिशा दी और अब ऑटो-रिक्शा चलाकर हर महीने लगभग 30,000 रुपये कमा रहे हैं।
अमित की इस बदलाव भरी यात्रा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत मिली सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह अनुभव बताता है कि सही समय पर उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और परिवार का सहयोग मिलने से नशे की लत से उबरकर दोबारा आत्मनिर्भर बना जा सकता है।
नशे की लत ने प्रभावित किया स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन
47 वर्षीय अमित कुमार गोरखपुर जिले के निवासी हैं और पहले स्वरोजगार से जुड़े हुए थे। तनाव और गलत संगति के कारण उन्हें धूम्रपान तथा नशीले पदार्थों के सेवन की आदत लग गई। धीरे-धीरे इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगा।
नशे की वजह से उनका आत्मविश्वास कमजोर हुआ और नियमित रूप से काम करना मुश्किल हो गया। अनियमित रोजगार के कारण आमदनी भी स्थिर नहीं थी। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में परेशानी होने लगी।
सामाजिक अलगाव और पारिवारिक तनाव ने उनकी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। हालांकि, अमित अपने जीवन में सुधार लाना चाहते थे। उनका लक्ष्य नशे से छुटकारा पाना, आत्मसम्मान हासिल करना और परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग देना था।
दोबारा उपचार लेकर शुरू की नशामुक्ति की राह
अमित कुमार ने वर्ष 2018 में भी नशामुक्ति उपचार कराया था। उस समय उनकी स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर से नशे की लत के शिकार हो गए।
इसके बाद उन्होंने एक बार फिर उपचार लेने और अपने जीवन को बेहतर बनाने का निर्णय किया। 13 अगस्त 2021 को उन्हें गोरखपुर स्थित बासुदेव तिवारी सेवा संस्थान के पुनर्जन्म एकीकृत नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (IRCA) के माध्यम से सहायता मिली।
यह सहायता NAPDDR के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई। केंद्र में उन्हें नशामुक्ति उपचार, चिकित्सा देखभाल, निर्धारित दवाएं, मनोवैज्ञानिक परामर्श और प्रेरक सहयोग प्रदान किया गया।
नियमित काउंसलिंग और फॉलो-अप से उन्हें नशे की लत से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिली। परिवार के सदस्यों की भागीदारी और भावनात्मक सहयोग ने भी उनके आत्मविश्वास को दोबारा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
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नशामुक्त होने के बाद ऑटो चलाकर शुरू किया काम
निरंतर उपचार और अपने दृढ़ संकल्प की मदद से अमित कुमार ने धूम्रपान और मादक पदार्थों का सेवन छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने दोबारा काम शुरू किया और ऑटो-रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका कमाने लगे।
आज वे हर महीने लगभग ₹30,000 की कमाई कर रहे हैं। इससे परिवार के घरेलू खर्चों में उनका नियमित योगदान बढ़ा है और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
अमित का अनुभव दिखाता है कि नशामुक्ति के साथ रोजगार और सामाजिक पुनर्वास भी बेहद जरूरी हैं। जब किसी व्यक्ति को उपचार के साथ भावनात्मक और व्यावहारिक सहायता मिलती है, तो उसके लिए सामान्य जीवन में लौटना और आर्थिक स्थिरता हासिल करना आसान हो सकता है।
क्या है NAPDDR योजना?
राष्ट्रीय कार्य योजना फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (NAPDDR) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की पहल है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग को कम करना तथा इससे प्रभावित लोगों को उपचार, परामर्श, पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल होने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत करना है।
इस योजना के अंतर्गत एकीकृत नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को सहायता प्रदान की जाती है। उपचार के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग और परिवार की भागीदारी पर भी जोर दिया जाता है।
अमित कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि नशे की लत से उबरने के लिए सही उपचार और निरंतर सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
नशामुक्ति से आत्मनिर्भरता तक का सफर
अमित कुमार ने कठिन परिस्थितियों से निकलकर अपने जीवन को नई दिशा दी है। नशे की लत के कारण स्वास्थ्य, परिवार और रोजगार पर पड़े नकारात्मक प्रभावों से उबरते हुए उन्होंने दोबारा काम शुरू किया और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़े।
उनकी कहानी समाज को यह संदेश देती है कि नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को तिरस्कार के बजाय उपचार, संवेदनशीलता और सहयोग की आवश्यकता होती है। उचित चिकित्सा, पुनर्वास और पारिवारिक समर्थन से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिल सकती है।

