बड़वानी कृषि विज्ञान केंद्र की बैठक में रबी सीजन, गेहूं की किस्मों, कम सिंचाई, सोलर पंप और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में कृषि विज्ञान केंद्र के सभाकक्ष में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में रबी सीजन की तैयारियों, कम सिंचाई में उगाई जाने वाली गेहूं की किस्मों, आधुनिक कृषि तकनीकों और किसानों की आमदनी बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए विभिन्न सुझाव भी दिए।
बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र की पिछले छह महीनों की उपलब्धियों की समीक्षा की गई और अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। इस दौरान कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, फसल प्रसंस्करण और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र की बैठक में ये अधिकारी हुए शामिल
वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता डॉ. डी. के. वाणी, प्रधान वैज्ञानिक एवं अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय खंडवा के प्रतिनिधि के रूप में की गई। मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक विस्तार सेवाएं के प्रतिनिधि वैज्ञानिक डॉ. आर. सी. आश्वानी शामिल हुए। वहीं, अटारी जोन-9 जबलपुर के प्रतिनिधि के रूप में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर भाग लिया।
इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र झाबुआ से डॉ. मौर्य, मनावर से डॉ. बसेड़िया और खरगोन से डॉ. आर. के. सिंह ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े।
जिले के कृषि विभाग से सह उपसंचालक जयपाल पटेल, उद्यानिकी विभाग से धर्मेंद्र अचाले और प्रगतिशील किसान सुरेश मुकाती सहित अन्य सदस्यों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
रबी सीजन में गेहूं की इन किस्मों पर दिया गया जोर
बैठक में आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन देने वाली गेहूं की किस्मों के चयन पर विशेष चर्चा हुई। किसानों को क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार गेहूं की उपयुक्त किस्में अपनाने की सलाह दी गई।
इस दौरान गेहूं की निम्नलिखित किस्मों का सुझाव दिया गया:
- JW-3288
- HI-1544
- MP-3269
- HI-1531
इन किस्मों का चयन करते समय किसानों को स्थानीय जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया। कम पानी में खेती की तकनीकों को बढ़ावा देने से जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।
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किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित कृषि प्रणाली पर जोर
बैठक में वैज्ञानिक डॉ. आर. सी. आश्वानी ने कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने से संबंधित कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने और समन्वित कृषि प्रणाली यानी इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) मॉडल का प्रचार-प्रसार बढ़ाने का सुझाव दिया।
समन्वित कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी और अन्य कृषि गतिविधियों को एक साथ अपनाया जा सकता है। इससे किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा किसानों को सोलर सिंचाई पंप के उपयोग के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।
फसल प्रसंस्करण और आधुनिक तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. डी. के. वाणी ने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ाने का सुझाव दिया। फसल प्रसंस्करण से किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने और कृषि आधारित व्यवसायों के अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।
वहीं, कृषि विभाग के सह उपसंचालक जयपाल पटेल ने हाइड्रोजेल तकनीक के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। इस तकनीक का उपयोग मिट्टी में नमी बनाए रखने में सहायता के लिए किया जाता है। इसका लाभ फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
बैठक में जैविक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़े परीक्षणों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी कार्ययोजना में शामिल करने का सुझाव दिया गया।
अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक की कार्ययोजना पर चर्चा
बैठक की शुरुआत में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. के. बड़ोदिया ने उपस्थित अतिथियों और सदस्यों का स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक केंद्र की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया।
साथ ही, अगले छह महीनों यानी अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के लिए प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी दी गई। इस कार्ययोजना में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, खेती की लागत कम करने और उत्पादन प्रणालियों को बेहतर बनाने से संबंधित सुझावों पर विचार किया गया।
बैठक में ईफी कोर एनजीओ के जेम्स और अन्य सदस्य किसानों ने भी अपने सुझाव साझा किए, जिन्हें आगामी कार्ययोजना तैयार करने के दौरान ध्यान में रखा गया।
कृषि विज्ञान केंद्र की बैठक में इन लोगों ने किया सहयोग
बैठक का संचालन तकनीकी अधिकारी यू. एस. अवास्या ने किया। अंत में उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. डी. के. जैन ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में केंद्र के भानु बड़ौले और वाहन चालक एन. के. पर्ते ने सहयोग दिया।

