ग्राम पांदा में बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन हुआ। मंत्री गौतम टेटवाल ने कृषि संस्कृति, किसान सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण पर जोर दिया।
राजगढ़ जिले के सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पांदा में श्री घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं श्री बलराम कृषि महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कृषि परंपराओं, किसानों के सम्मान, जल एवं भूमि संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक किया।
मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि भारतीय परंपरा में कृषि और किसान को विशेष सम्मान दिया गया है। खेती की मजबूती के लिए मिट्टी, पानी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जरूरी है। भगवान श्री बलराम को कृषि, हल और धरती से जुड़े श्रम का प्रतीक माना जाता है। ऐसे आयोजन ग्रामीण संस्कृति और कृषि परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कृषि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री टेटवाल ने कहा कि खेती और पर्यावरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। पेड़-पौधे न केवल वातावरण को बेहतर बनाते हैं, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जल और भूमि संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि पौधा लगाना जितना जरूरी है, उसकी नियमित देखभाल और सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
भगवान बलराम की पूजा कर निकाला गया चल समारोह
श्री बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर ग्राम पांदा में भव्य चल समारोह आयोजित किया गया। मंत्री गौतम टेटवाल ने समारोह में भाग लिया और भगवान श्री बलराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने क्षेत्र में सुख-समृद्धि, खुशहाली और किसानों की उन्नति के लिए प्रार्थना की।
इसके बाद मंत्री ने ग्राम पांदा स्थित श्री घरणीघर राधाकृष्ण मंदिर में पहुंचकर दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
कृषि और किसान जीवन से जुड़ा है बलराम महोत्सव
श्री बलराम कृषि महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ भारतीय कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन से भी जुड़ा हुआ है। भगवान श्री बलराम को हल और कृषि कार्य का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि किसानों और ग्रामीण समाज में उनके जन्मोत्सव का विशेष महत्व है।
महोत्सव के माध्यम से किसानों के परिश्रम, कृषि के महत्व और धरती के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम ने ग्रामीण समुदाय को अपनी पारंपरिक कृषि संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का भी काम किया।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मंत्री गौतम टेटवाल ने शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय परिसर में पौधा लगाया।
उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक कार्यक्रम या औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में सामूहिक संकल्प है। उन्होंने लोगों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने और अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।
मंत्री ने जल संरक्षण, भूमि की उर्वरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी को जरूरी बताया।
धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
ग्राम पांदा में आयोजित महोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों को भी प्रमुखता दी गई। भगवान श्री बलराम के जन्मोत्सव के जरिए कृषि और किसान के महत्व को रेखांकित किया गया, जबकि पौधारोपण कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। चल समारोह के दौरान गांव का माहौल भक्ति और उत्साह से भर गया। श्रद्धालुओं ने श्री बलराम जी और श्री घरणीघर भगवान के दर्शन कर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में पूर्व विधायक गुलाब सिंह सुस्तानी, प्रदेश किसान मोर्चा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, जनपद अध्यक्ष देवनारायण नागर, जनपद उपाध्यक्ष कैलाश नागर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
नई पीढ़ी को कृषि परंपराओं से जोड़ने की पहल
बलराम कृषि महोत्सव के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। भगवान श्री बलराम से जुड़े कृषि संदेशों के माध्यम से किसानों के सम्मान, मेहनत और धरती के प्रति जिम्मेदारी को सामने रखा गया।
इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि कृषि संस्कृति का संरक्षण, किसान का सम्मान और पर्यावरण की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं, जिनके लिए समाज की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

