स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत तडिकोंडा रामबाबू को स्वरोजगार का अवसर मिला। जानें कैसे उनकी मासिक आय ₹19,000 से बढ़कर ₹29,000 हुई।
स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) सफाई कर्मचारियों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत स्वच्छता संबंधी उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता देकर लाभार्थियों को अपनी आय बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा नगर निगम में कार्यरत तडिकोंडा रामबाबू की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है।
स्वच्छता उद्यमी योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर
40 वर्षीय तडिकोंडा रामबाबू अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और वर्ष 2016 से विजयवाड़ा नगर निगम में आउटसोर्सिंग के माध्यम से सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। आर्थिक कठिनाइयों के कारण दसवीं कक्षा के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लंबे समय तक उनके परिवार की आजीविका मुख्य रूप से उनकी लगभग 19,000 रुपये की मासिक आय पर निर्भर रही।
रामबाबू के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं। उनकी पत्नी गृहिणी हैं, जबकि बड़ा बेटा दसवीं कक्षा और छोटा बेटा इंटरमीडिएट के दूसरे वर्ष में पढ़ रहा है। सीमित आय में घरेलू खर्चों के साथ बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद रामबाबू अपने परिवार को बेहतर जीवन देने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रयासरत रहे।
NAMASTE योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता
21 अगस्त 2025 को तडिकोंडा रामबाबू और उनके चार साथियों को भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) के अंतर्गत NAMASTE फ्रेमवर्क के तहत सहायता प्राप्त हुई।
इस सहायता के माध्यम से पांच सदस्यों के समूह ने स्वच्छता सेवाओं के लिए 8,000 लीटर क्षमता वाला गल्फर डीस्लजिंग वाहन खरीदने की परियोजना शुरू की। इस वाहन की मदद से समूह को सीवेज और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसी सेवाएं प्रदान करने तथा अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिला।
परियोजना का वित्तीय विवरण इस प्रकार है:
- कुल परियोजना लागत: ₹50 लाख
- बैंक ऋण: ₹31.25 लाख
- पूंजीगत सब्सिडी: ₹18.75 लाख
इस वित्तीय सहायता से समूह को स्वच्छता क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हुए और नियमित रोजगार के साथ अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुला।
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₹10,000 की अतिरिक्त कमाई से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत शुरू की गई इस परियोजना से रामबाबू अब हर महीने लगभग 10,000 रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उनकी कुल मासिक आय लगभग 19,000 रुपये से बढ़कर 29,000 रुपये हो गई है।
आय में इस वृद्धि से उन्हें घर के नियमित खर्च पूरे करने और बच्चों की शिक्षा पर होने वाले व्यय का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल रही है। साथ ही, परिवार की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है और सीमित आमदनी के कारण होने वाला वित्तीय दबाव भी कम हुआ है।
इस पहल ने रामबाबू और उनके साथियों को स्वच्छता सेवाओं के क्षेत्र में उद्यमिता विकसित करने का अवसर दिया है। इसके माध्यम से वे अपनी मौजूदा नौकरी के साथ अतिरिक्त आजीविका का साधन तैयार कर सके हैं।
सफाई कर्मचारियों के आर्थिक सशक्तिकरण में अहम पहल
स्वच्छता उद्यमी योजना का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों को स्वच्छता संबंधी उपकरणों और वित्तीय सहायता तक पहुंच उपलब्ध कराकर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। NAMASTE फ्रेमवर्क के तहत ऐसी पहलें सफाई कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति सुधारने, उनकी आजीविका को अधिक सुरक्षित बनाने और सम्मानजनक जीवन को प्रोत्साहित करने में योगदान दे सकती हैं।
तडिकोंडा रामबाबू की सफलता की कहानी दर्शाती है कि उचित वित्तीय सहायता, समूह आधारित उद्यम और रोजगार के अतिरिक्त अवसर किसी परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनकी बढ़ी हुई आय से बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है।

