Drought Farming: सूखे जैसे हालात में किसान बाजरा, ज्वार, अरहर, मूंग और तिल की खेती पर विचार कर सकते हैं। जानें कम पानी में फसल चुनने के तरीके और जरूरी उपाय।
Drought Farming: देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी के कारण किसानों के सामने खेती को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में कम पानी में तैयार होने वाली और सूखे को सहन करने वाली फसलों का चुनाव महत्वपूर्ण हो जाता है। बाजरा, ज्वार, अरहर, मूंग, उड़द और तिल जैसी फसलें कुछ क्षेत्रों में अच्छे विकल्प साबित हो सकती हैं। हालांकि, किसानों को फसल चुनने से पहले अपने खेत की मिट्टी, स्थानीय मौसम और सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का आकलन करना चाहिए।
कम बारिश में इन फसलों की खेती पर दें ध्यान
बारिश कम होने पर ऐसी फसलों को प्राथमिकता देना जरूरी है, जिनकी पानी की जरूरत स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हो। अधिक पानी मांगने वाली फसलों की खेती सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए किसानों को ऐसी किस्मों का चुनाव करना चाहिए, जो कम अवधि में तैयार हो सकें और नमी की कमी को अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से सहन कर सकें।
1. बाजरा की खेती से कम हो सकता है सूखे का जोखिम
बाजरा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों में शामिल है। यह गर्म मौसम में भी अच्छी तरह विकसित हो सकता है और इसकी कुछ किस्में पानी की कमी को अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से सहन करती हैं।
राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में बाजरे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। जिन किसानों के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं, वे अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार बाजरे की खेती पर विचार कर सकते हैं। बेहतर उत्पादन के लिए सही बीज, उपयुक्त बुवाई समय और खेत में उपलब्ध नमी का ध्यान रखना जरूरी है।
2. ज्वार की खेती भी हो सकती है फायदेमंद
ज्वार कम बारिश वाले क्षेत्रों में उगाई जाने वाली एक उपयोगी फसल है। इसका इस्तेमाल अनाज के साथ पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता है। इसलिए खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों के लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
ज्वार की खेती में सफलता के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल किस्म का चुनाव करना जरूरी है। किसानों को बुवाई से पहले यह भी देखना चाहिए कि उनके क्षेत्र में बारिश की संभावना कैसी है और सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है।
3. अरहर, मूंग और उड़द की खेती पर करें विचार
पानी की कमी होने पर किसान दलहन फसलों को भी अपनी खेती की योजना में शामिल कर सकते हैं। अरहर, मूंग और उड़द कई क्षेत्रों में कम पानी वाली खेती के विकल्प हैं। इनकी उपयुक्तता मिट्टी, मौसम और किस्म के अनुसार बदलती है।
- अरहर: कुछ क्षेत्रों में अरहर कम पानी की उपलब्धता के बावजूद उगाई जा सकती है। इसकी सही किस्म और बुवाई का समय चुनना जरूरी है।
- मूंग: कम अवधि में तैयार होने वाली मूंग की किस्में कुछ परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती हैं। फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए पर्याप्त नमी जरूरी है।
- उड़द: उड़द भी दलहन उत्पादन का एक विकल्प है। इसकी खेती से पहले स्थानीय मौसम और खेत की स्थिति के अनुसार बीज का चुनाव करना चाहिए।
दलहन फसलें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी योगदान दे सकती हैं। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए संतुलित फसल प्रबंधन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूरी है।
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4. तिल की खेती से बढ़ सकते हैं किसानों के विकल्प
तिल एक प्रमुख तिलहनी फसल है, जिसकी खेती कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है। इसकी उपयुक्त किस्में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चुनने पर किसान इसे अपनी फसल योजना में शामिल कर सकते हैं।
हालांकि, तिल की फसल को भी विकास की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में नमी की जरूरत होती है। लंबे समय तक पानी की कमी रहने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए बुवाई से पहले मिट्टी की स्थिति और बारिश की संभावना को ध्यान में रखना जरूरी है।
5. मूंगफली की खेती से पहले जांचें खेत की स्थिति
मूंगफली भी कुछ क्षेत्रों में कम वर्षा वाली परिस्थितियों में उगाई जाती है। लेकिन इसकी अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का प्रकार, पर्याप्त नमी और उचित जल निकास महत्वपूर्ण हैं।
विशेष रूप से फूल आने और फलियां बनने के दौरान खेत में जरूरी नमी बनी रहनी चाहिए। ऐसे में जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा सीमित है, उन्हें मूंगफली की बुवाई से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
सूखे की स्थिति में खेत की नमी बचाने के उपाय
कम बारिश में केवल फसल बदलना पर्याप्त नहीं है। खेत में मौजूद नमी को बचाना और पानी का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। किसान इन उपायों को अपना सकते हैं:
फसल अवशेषों का इस्तेमाल करें: खेत की परिस्थितियों के अनुसार अवशेषों को मिट्टी की सतह पर बिछाने से नमी के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
- सही समय पर बुवाई करें: स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बुवाई की योजना बनाएं।
- कम अवधि वाली किस्में चुनें: अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की जानकारी लें।
- सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करें: पानी सीमित होने पर फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में उपलब्ध पानी का उचित इस्तेमाल करें।
- मिट्टी की स्थिति पर ध्यान दें: खेत की नमी, जल निकास और मिट्टी के प्रकार के अनुसार फसल का चुनाव करें।
फसल चुनने से पहले कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें
सूखे जैसी परिस्थितियों में किसी भी फसल से अच्छी पैदावार की गारंटी नहीं दी जा सकती। बाजरा, ज्वार, अरहर, मूंग, उड़द और तिल जैसी फसलें कई क्षेत्रों में उपयोगी विकल्प हो सकती हैं, लेकिन हर फसल सभी तरह की मिट्टी और मौसम के लिए उपयुक्त नहीं होती।
इसलिए किसान अपने जिले की कृषि सलाह, बारिश की संभावना, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध सिंचाई के साधनों के आधार पर निर्णय लें। नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से उपयुक्त बीज और बुवाई के समय की जानकारी लेकर खेती करने से नुकसान का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

