छत्तीसगढ़ के सरगुजा में युवा किसान राजेंद्र यादव तीन एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं। एक लाख रुपये की लागत से चार से पांच लाख रुपये मुनाफे की उम्मीद, जानें खेती का तरीका।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक युवा किसान ने खेती को अपनी कमाई का जरिया बनाकर मिसाल पेश की है। आमगांव के रहने वाले राजेंद्र यादव ने बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के बजाय खेती को करियर के रूप में चुना। आज वह करीब तीन एकड़ जमीन पर टमाटर की खेती कर रहे हैं। इस सीजन में उन्होंने लगभग एक लाख रुपये निवेश किए हैं और फसल से चार से पांच लाख रुपये तक मुनाफा मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।
राजेंद्र यादव पिछले पांच से छह वर्षों से टमाटर की खेती कर रहे हैं। वह पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ जैविक खाद और पौधों को सहारा देने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। उनकी फसल की मांग छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में भी रहती है।
तीन एकड़ में टमाटर की खेती से कमाई की तैयारी
सरगुजा जिले के किसान राजेंद्र यादव ने करीब तीन एकड़ जमीन पर टमाटर की फसल लगाई है। उन्हें खेती का पांच से छह साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने टमाटर की खेती के तौर-तरीकों को समझा और फसल की देखभाल पर विशेष ध्यान देना सीखा।
राजेंद्र के अनुसार, टमाटर की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई की जाती है। इसके बाद खेत में मेड़ें बनाई जाती हैं और उनमें गोबर की खाद, जैविक खाद तथा डीएपी जैसी उर्वरक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। मेड़ तैयार करने के लगभग 15 दिन बाद टमाटर के पौधों की रोपाई की जाती है।
फसल की बेहतर बढ़वार के लिए खेत की तैयारी से लेकर पौधों की देखभाल तक हर चरण में सावधानी बरती जाती है। इससे पौधों को बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
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टमाटर के पौधों को लकड़ी का सहारा, फसल की सुरक्षा पर जोर
राजेंद्र यादव अपनी टमाटर की फसल में पौधों को सहारा देने के लिए लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल करते हैं। जब टमाटर के पौधे बड़े होने लगते हैं, तो उनके झुकने या जमीन पर गिरने की आशंका रहती है। ऐसे में लकड़ी का सहारा देने से पौधों को सीधा रखने में मदद मिलती है।
पौधों के जमीन पर गिरने से फलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए राजेंद्र इस तरीके से फसल को संभालते हैं, ताकि टमाटर सुरक्षित रहें और उनकी देखभाल करना भी आसान हो। खेती में अपनाया गया यह तरीका फसल की निगरानी और रखरखाव में उपयोगी साबित हो सकता है।
20 जुलाई को की थी रोपाई, अब तैयार हो रही फसल
राजेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने करीब 20 जुलाई को टमाटर के पौधों की रोपाई की थी। अब फसल पकने की अवस्था में पहुंच रही है और कुछ टमाटर पकने भी लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि फसल तैयार होने पर बाजार में अच्छी मांग मिलेगी।
किसान के मुताबिक, उनके टमाटर की मांग उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में भी रहती है। दूसरे राज्यों तक बाजार उपलब्ध होने से उपज बेचने के अधिक अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, किसानों को बेहतर कमाई के लिए फसल की गुणवत्ता, परिवहन लागत और बाजार में मिलने वाले भाव पर भी ध्यान देना जरूरी है।
एक लाख रुपये का निवेश, चार से पांच लाख रुपये मुनाफे की उम्मीद
टमाटर की खेती में होने वाली कमाई के बारे में राजेंद्र यादव ने बताया कि अब तक करीब एक लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इस सीजन में मौसम और बारिश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें चार से पांच लाख रुपये तक मुनाफा होने की उम्मीद है।
हालांकि, यह उनकी अनुमानित कमाई है। वास्तविक मुनाफा फसल की पैदावार, बाजार में टमाटर के भाव, मौसम और बिक्री से जुड़े खर्चों पर निर्भर करेगा। यदि उपज अच्छी होती है और बाजार में उचित कीमत मिलती है, तो टमाटर की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा विकल्प बन सकती है।
नौकरी नहीं मिली तो खेती को बनाया अपना करियर
राजेंद्र यादव ने बीए फाइनल तक पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने खेती को अपना पेशा बनाने का फैसला किया। उनके परिवार में पहले से खेती-बाड़ी की जाती रही है, इसलिए उन्होंने भी इस काम को आगे बढ़ाया।
राजेंद्र खेती के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और अपनी आमदनी बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि कृषि में रुचि, अनुभव और सही देखभाल के साथ युवा खेती को करियर के रूप में अपना सकते हैं।

