प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में बिहार के गया जिले ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया। जानें 36 योजनाओं, 121 संकेतकों और किसानों की सफलता की पूरी कहानी।
बिहार के गया जिले ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। कृषि विकास से जुड़ी इस उपलब्धि को जिले के किसानों और कृषि विभाग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने, आधुनिक खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों की आमदनी में सुधार लाने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई कृषि योजनाएं संचालित कर रही हैं। इन्हीं प्रयासों में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना भी शामिल है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों का विकास करना और किसानों को खेती के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
गया जिले के कृषि विकास में अहम भूमिका निभा रही योजना
गया जिला बिहार का एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक क्षेत्र होने के साथ-साथ कृषि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जिले के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में किसान धान, गेहूं, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती करते हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में सिंचाई की कमी, बारिश पर निर्भरता, खेती की बढ़ती लागत और उपज के विपणन से जुड़ी चुनौतियां किसानों के सामने बनी रहती हैं।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के माध्यम से इन समस्याओं को दूर करने और कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत सिंचाई सुविधाओं में सुधार, फसल विविधीकरण, कृषि ऋण की उपलब्धता और फसल कटाई के बाद उपज के भंडारण जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
देशभर के 100 जिलों में शामिल है गया
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत गया जिला देश के चयनित 100 जिलों में शामिल है। योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को आधुनिक तकनीकों और बेहतर कृषि सुविधाओं से जोड़ना है।
इस पहल के तहत किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, सिंचाई के बेहतर साधनों का इस्तेमाल करने और पारंपरिक फसलों के साथ दूसरी फसलों की खेती करने से किसानों को लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
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11 विभागों की 36 योजनाओं के प्रदर्शन में गया अव्वल
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन में गया जिले ने देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह रैंकिंग 11 विभागों से संबंधित 36 योजनाओं के 121 संकेतकों (इंडिकेटर) के आधार पर किए गए मूल्यांकन में जिले के प्रदर्शन के आधार पर बताई गई है।
यह उपलब्धि कृषि विकास से जुड़े विभिन्न विभागों के समन्वय और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयासों को दर्शाती है। हालांकि, रैंकिंग से संबंधित मूल्यांकन अवधि और आधिकारिक रिपोर्ट की पुष्टि संबंधित विभाग से की जानी चाहिए।
30 एकड़ में खेती कर रहे किसान आशीष कुमार
गया जिले के प्रगतिशील किसान आशीष कुमार सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेकर खेती में बदलाव कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह करीब 30 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और उनकी सालाना आमदनी लगभग 15 लाख रुपये है।
आशीष कुमार का कहना है कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर वह अपनी खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आधुनिक कृषि पद्धतियों और सरकारी सहायता से किसानों को उत्पादन बेहतर बनाने तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।
सरकारी योजनाओं से बढ़ रही किसानों की आमदनी
गया जिले के खिजरसराय प्रखंड के किसान विलास कुमार भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती कर रहे हैं। वह करीब चार एकड़ जमीन पर सब्जियों और दूसरी फसलों का उत्पादन करते हैं।
विलास कुमार के मुताबिक, प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी पहलों से उन्हें लाभ मिला है। उनका कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से खेती में सुधार हुआ है और आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है।
कृषि विभाग ने बताई जिले की उपलब्धि
गया के जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार के अनुसार, केंद्र प्रायोजित 11 विभागों की 36 योजनाओं के क्रियान्वयन में जिले ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि कृषि क्षेत्र में योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन और किसानों तक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत गया जिले का प्रदर्शन बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए उत्साहजनक है। सिंचाई, फसल विविधीकरण, भंडारण और आधुनिक तकनीकों पर लगातार काम होने से किसानों को खेती की चुनौतियों से निपटने और अपनी आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

