छत्तीसगढ़ सरकारी योजनाएं: छत्तीसगढ़ के सरगुजा में पीएम सूर्य घर योजना, छात्रवृत्ति, PMEGP, सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना से परिवारों को मिल रहा लाभ। जानें 5 हितग्राहियों की कहानी।
छत्तीसगढ़ सरकारी योजनाएं: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने में मदद कर रही हैं। जिले के पांच हितग्राहियों के अनुभव बताते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिजली खर्च में बचत, उच्च शिक्षा, स्वरोजगार, उद्योग स्थापना और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
विकास का अर्थ केवल सड़क, भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। जब किसी परिवार का बिजली बिल कम होता है, आर्थिक परेशानी के बावजूद विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी रखता है या कोई महिला अपना व्यवसाय शुरू करके परिवार की जिम्मेदारी उठाती है, तो विकास का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता नजर आता है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति योजनाओं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें लोगों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। इन योजनाओं से जुड़े पांच हितग्राहियों की कहानियां बताती हैं कि उचित आर्थिक सहयोग मिलने पर परिवार अपनी परिस्थितियों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
पीएम सूर्य घर योजना से पंकज साहू को बिजली बिल में राहत
घरेलू बिजली खर्च से परेशान रहने वाले परिवारों के लिए सौर ऊर्जा एक उपयोगी विकल्प बनकर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी दी जाती है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी पंकज साहू ने भी इस योजना का लाभ उठाया है।
पंकज साहू ने अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगवाया। उनके मुताबिक, पहले गर्मियों के दौरान बिजली का मासिक बिल लगभग चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया।
सोलर सिस्टम लगवाने के लिए उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह कुल एक लाख आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जिससे सोलर सिस्टम स्थापित करने में मदद मिली।
सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली खर्च में काफी कमी आई है। पंकज साहू के अनुसार, कई बार जरूरत से अधिक बिजली बनने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और उनका बिजली खाता क्रेडिट में दिखाई देता है।
उनका अनुभव बताता है कि सौर ऊर्जा अपनाकर परिवार बिजली पर होने वाले खर्च को कम कर सकते हैं। इससे आर्थिक बचत के साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलता है।
छात्रवृत्ति से कृष्णा यादव की पढ़ाई को मिल रहा सहारा
आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर कई विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कॉलेज की फीस के अलावा किताबें, कॉपियां, पढ़ाई की सामग्री और आने-जाने का खर्च भी परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालता है। ऐसी स्थिति में छात्रवृत्ति योजनाएं विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में मदद कर सकती हैं।
अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर में पढ़ने वाले कृष्णा यादव भी छात्रवृत्ति से लाभान्वित हो रहे हैं। उनके पिता खेती करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित कृषि आय में घर की जरूरतें पूरी करने के साथ बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाना परिवार के लिए आसान नहीं है।
छात्रवृत्ति से मिलने वाली राशि कृष्णा को अध्ययन सामग्री खरीदने और कॉलेज आने-जाने के खर्च में सहायता देती है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिलती है और वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
कृष्णा की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि आर्थिक सहायता से जरूरतमंद विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर मिल सकते हैं। इससे वे अपनी क्षमताओं को विकसित कर भविष्य में बेहतर रोजगार और करियर की संभावनाएं तलाश सकते हैं।
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PMEGP योजना से हर्षिता खत्री ने स्थापित किया फर्नीचर उद्योग
स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना नए उद्यमियों को व्यवसाय या उद्योग स्थापित करने में वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर देती है। सरगुजा जिले की हर्षिता खत्री ने इस योजना के माध्यम से अपना फर्नीचर निर्माण उद्योग शुरू किया है।
हर्षिता खत्री श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति दिलीप खत्री भी उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। परिवार लंबे समय से अपना कारोबार शुरू करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण योजना को अमल में लाना मुश्किल था।
जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से PMEGP योजना की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता ने ऋण के लिए आवेदन किया। उन्हें 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसके बाद फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित करने का रास्ता खुला।
उनके उद्योग में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। इस इकाई से परिवार को स्वरोजगार मिला है और कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है।
हर्षिता खत्री की सफलता यह दर्शाती है कि वित्तीय सहयोग और सही मार्गदर्शन मिलने पर छोटे कारोबारी विचारों को उद्योग का रूप दिया जा सकता है। ऐसे उद्यम स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी योगदान दे सकते हैं।
सक्षम योजना से इंदु लता गुप्ता ने शुरू किया डेयरी व्यवसाय
पति के निधन के बाद चार बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी इंदु लता गुप्ता के सामने बड़ी चुनौती बन गई थी। परिवार की नियमित आय का पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण घर चलाना और बेटियों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और स्वयं रोजगार शुरू करने का फैसला किया।
इंदु लता को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण मिलने के बाद उन्होंने अपनी ओर से भी कुछ राशि लगाई और दो भैंसें खरीदकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया।
अब दूध बेचकर होने वाली आय परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद कर रही है। इस व्यवसाय से इंदु लता को अपनी बेटियों की शिक्षा जारी रखने का भी सहारा मिला है।
उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूल में अध्ययनरत हैं। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बीच चारों बेटियों की पढ़ाई जारी रखना इंदु लता के संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने के प्रयास को दर्शाता है।
सक्षम योजना से मिले ऋण ने उन्हें आजीविका का साधन तैयार करने का अवसर दिया। उनकी कहानी बताती है कि वित्तीय सहायता और स्वयं कुछ करने की इच्छाशक्ति के जरिए महिलाएं मुश्किल परिस्थितियों में भी परिवार को संभाल सकती हैं।
महतारी वंदन योजना से सरिता तिग्गा के सिलाई काम को मदद
महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं घरेलू जरूरतों के साथ उनके छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में भी सहायक हो सकती हैं। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा इसका उदाहरण हैं।
सरिता के पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं और सीमित आमदनी में घर का खर्च चलाना तथा बच्चों की जरूरतें पूरी करना परिवार के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में सरिता घर पर सिलाई का काम करके परिवार की आय बढ़ाने में योगदान देती हैं।
सिलाई का काम जारी रखने के लिए धागे और अन्य जरूरी सामग्री खरीदनी पड़ती है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि इस काम में उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।
सरिता इस रकम का इस्तेमाल सिलाई से जुड़ी आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं। इससे उन्हें अपना काम नियमित रूप से जारी रखने में मदद मिलती है। पति की मजदूरी से होने वाली आय के साथ सिलाई से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में सहायक बनती है।
सरिता तिग्गा का अनुभव बताता है कि नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को अपने हुनर का उपयोग करने और छोटे स्तर पर स्वरोजगार बनाए रखने का अवसर दे सकती है। इससे परिवार की आय में उनकी भागीदारी भी बढ़ती है।
सरगुजा में सरकारी योजनाओं से आत्मनिर्भरता को मिल रहा बढ़ावा
सरगुजा जिले के इन पांच हितग्राहियों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन सभी की कहानियों में सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग का उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास दिखाई देते हैं।
पंकज साहू ने सोलर सिस्टम लगवाकर बिजली खर्च कम किया। कृष्णा यादव को छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिल रही है। हर्षिता खत्री ने ऋण की सहायता से फर्नीचर उद्योग स्थापित किया। इंदु लता गुप्ता डेयरी व्यवसाय के माध्यम से चार बेटियों की शिक्षा और परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। वहीं, सरिता तिग्गा महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग अपने सिलाई कार्य को जारी रखने के लिए कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को आर्थिक सहयोग और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल तत्काल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहता। सही तरीके से उपयोग किए जाने पर यह परिवारों को बचत करने, शिक्षा पूरी करने, रोजगार शुरू करने और आय के नए स्रोत विकसित करने में मदद कर सकता है।
सरगुजा के इन परिवारों की कहानियां दिखाती हैं कि आत्मनिर्भरता की दिशा में छोटे-छोटे कदम भी भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सौर ऊर्जा, छात्रवृत्ति, उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयास परिवारों को आर्थिक मजबूती देने के साथ जिले के विकास में भी योगदान कर रहे हैं।

