राजस्थान के डीडवाना-कुचामन में 3,302 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिले और 9,251 किसानों को कृषि योजनाओं की जानकारी दी गई।
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और खेती से जुड़ी जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। विकसित भारत जन सेवा अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शिविरों के माध्यम से कृषि विभाग ने किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान जिले के 3,302 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए, जबकि 9,251 किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं और गतिविधियों से अवगत कराया गया।
किसानों को दी गई कृषि योजनाओं की जानकारी
विकसित भारत जन सेवा अभियान का उद्देश्य सरकारी सेवाओं और योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है। इसी पहल के तहत राजस्थान के कृषि विभाग ने डीडवाना-कुचामन जिले में किसानों को जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित कीं।
इन शिविरों में किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं, उपलब्ध सुविधाओं और खेती को बेहतर बनाने के उपायों की जानकारी दी गई। अभियान के जरिए अधिक से अधिक किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें कृषि संबंधी सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।
3,302 किसानों को वितरित किए गए मृदा स्वास्थ्य कार्ड
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) भागचंद कुमावत के अनुसार, अभियान के दौरान जिले में 3,302 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए गए। यह कार्ड किसानों को अपने खेत की मिट्टी की गुणवत्ता समझने और फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्वों की पहचान करने में मदद करता है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी में मौजूद प्रमुख और सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति का विवरण दिया जाता है। इसके साथ ही संबंधित फसल के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और उर्वरकों की उचित मात्रा के बारे में भी सिफारिशें दी जाती हैं।
इस जानकारी से किसान यह समझ सकते हैं कि उनके खेत की मिट्टी में कौन-से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और किनकी कमी है। इसके आधार पर वे जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करने की योजना बना सकते हैं।
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड में 12 मानकों की होती है जांच
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मिट्टी की सेहत से जुड़े कुल 12 मानकों का आकलन किया जाता है। इनमें प्रमुख पोषक तत्वों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व और मिट्टी के अन्य महत्वपूर्ण गुण शामिल हैं।
इन 12 मानकों में शामिल हैं:
- नाइट्रोजन
- फास्फोरस
- पोटाश
- सल्फर
- जिंक
- आयरन
- कॉपर
- मैंगनीज
- बोरोन
- विद्युत चालकता
- ऑर्गेनिक कार्बन
- मिट्टी का पीएच स्तर
इन मानकों की जांच से मिट्टी की स्थिति का आकलन करने और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों के प्रबंधन में मदद मिलती है। इससे किसान उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की वास्तविक जरूरत के आधार पर कर सकते हैं।
9,251 किसानों को योजनाओं और कृषि गतिविधियों से किया गया जागरूक
डीडवाना-कुचामन जिले में अभियान के दौरान 9,251 किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देकर लाभान्वित किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शिविरों के जरिए किसानों तक विभागीय सेवाएं पहुंचाने और उन्हें खेती से जुड़ी योजनाओं के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण और कृषि योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करने से खेती की लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
विकसित भारत जन सेवा अभियान के अंतर्गत राजस्थान कृषि विभाग की इन गतिविधियों से डीडवाना-कुचामन जिले के किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता समझने और सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

