पांढुर्णा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान का आकलन होगा। पात्र किसानों के लिए 25% अग्रिम भुगतान की अनुशंसा की जाएगी।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल बर्बाद होने पर बीमित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए पांढुर्णा जिले में नई व्यवस्था की गई है। इसके तहत प्रभावित किसानों की फसल क्षति का आकलन करने और नियमानुसार अग्रिम बीमा दावा भुगतान की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जिला स्तरीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है।
इस समिति की जिम्मेदारी खरीफ और रबी सीजन के दौरान प्रतिकूल मौसम से होने वाले नुकसान का आकलन करना है। अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, लंबे समय तक सूखा रहने और कीटों के प्रकोप जैसी परिस्थितियों में किसानों की फसल को हुए नुकसान का सत्यापन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सात दिन के भीतर होगी समिति की बैठक
जिले में प्रतिकूल मौसमी घटना होने के सात दिनों के भीतर जिला स्तरीय संयुक्त समिति (DLJC) की बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा। मध्य-मौसम में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण खड़ी फसल की संभावित औसत उपज में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने की आशंका पर समिति प्रभावित बीमा इकाइयों का निरीक्षण करेगी।
इसके लिए बोए गए क्षेत्र के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से का निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही, कम से कम 10 स्थानों पर यादृच्छिक तरीके से स्थलीय जांच की जाएगी। निरीक्षण और आकलन के आधार पर प्रभावित किसानों को 25 प्रतिशत अग्रिम बीमा राहत यानी ऑन-अकाउंट भुगतान देने की अनुशंसा राज्य स्तरीय समिति को भेजी जाएगी।
बुवाई या अंकुरण विफल होने पर भी मिलेगी राहत
प्रतिकूल मौसम के कारण यदि किसी अधिसूचित बीमा इकाई के 75 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाती या अंकुरण विफल हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में भी किसानों को राहत देने के लिए सत्यापन किया जाएगा।
समिति निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद पात्रता और योजना के नियमों के अनुसार 25 प्रतिशत एकमुश्त बीमा दावा भुगतान की प्रक्रिया के लिए राज्य शासन को अनुशंसा भेजी जाएगी।
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कटाई के बाद फसल खराब होने पर भी होगा सर्वे
फसल नुकसान का आकलन केवल खड़ी फसलों तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय स्तर पर होने वाली आपदाओं और कटाई के बाद फसल को हुए नुकसान के मामलों में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी।
ओलावृष्टि, जलभराव या खेत में सूखने के लिए रखे फसल के बंडलों को बारिश से नुकसान पहुंचने जैसी परिस्थितियों में समिति सर्वेक्षण करेगी। यदि संबंधित बीमा इकाई के 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में नुकसान होता है, तो निर्धारित नमूना सर्वे के आधार पर क्षति का प्रतिशत तय किया जाएगा।
इस आकलन के आधार पर अधिकृत बीमा कंपनी के माध्यम से पात्र किसानों को नियमानुसार बीमा दावों का भुगतान कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
मौसम और तकनीकी आंकड़ों से होगा नुकसान का सत्यापन
फसल क्षति के आकलन को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने के लिए समिति विभिन्न तकनीकी स्रोतों की मदद लेगी। इसमें भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़े, स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, उपग्रह और रिमोट सेंसिंग डेटा तथा खेतों के फोटोग्राफ का विश्लेषण शामिल होगा।
इन जानकारियों के आधार पर फसल नुकसान की रिपोर्ट का सत्यापन किया जाएगा, ताकि राहत और बीमा दावों से संबंधित निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिए जा सकें।
जिला स्तरीय समिति में कौन-कौन होंगे शामिल?
पांढुर्णा जिले में गठित समिति की अध्यक्षता कलेक्टर करेंगे। उप संचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग को सदस्य सचिव बनाया गया है।
समिति में इसके अलावा निम्नलिखित अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे:
- सभी अनुभागों के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)
- उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक
- कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख
- मौसम वैज्ञानिक या कृषि मौसम वेधशाला के प्रभारी अधिकारी
- लीड बैंक मैनेजर या जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी
- जिला नोडल अधिकारी या कृषि बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक
- जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से नामांकित तीन किसान प्रतिनिधि
किसान प्रतिनिधियों के रूप में पांढुर्णा के श्री सीताराम कोरडे तथा सौंसर के श्री जयदेव मोहोड़ और श्री वैभव बूटे को शामिल किया गया है।
किसानों को समय पर राहत पहुंचाना है उद्देश्य
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम से प्रभावित बीमित किसानों को समय पर राहत दिलाना है। फसल नुकसान का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आकलन, तकनीकी सत्यापन और संबंधित स्तर पर अनुशंसा के माध्यम से अग्रिम बीमा भुगतान तथा दावा निपटान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, अग्रिम भुगतान और अंतिम बीमा दावे की राशि योजना के लागू प्रावधानों, नुकसान के आकलन और पात्रता पर निर्भर करेगी।

