देवास के सोनकच्छ स्थित छायनमैना में दुग्ध उत्पादकों को स्वच्छ दूध उत्पादन, पशु नस्ल सुधार, बेहतर प्रबंधन और सहकारिता की जानकारी दी गई।
मध्य प्रदेश के देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र के ग्राम छायनमैना में दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस शिविर में किसानों को दुग्ध व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने, स्वच्छ दूध उत्पादन, पशुओं की नस्ल सुधारने और दुधारू पशुओं की बेहतर देखभाल करने के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को वैज्ञानिक पशुपालन और सहकारिता के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन इंदौर दुग्ध सहकारी संघ और जिला सहकारी संघ, रतलाम के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों और पदाधिकारियों ने भाग लिया।
दुग्ध व्यवसाय को लाभकारी बनाने के बताए तरीके
प्रशिक्षण शिविर में विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं के स्वास्थ्य, संतुलित आहार, स्वच्छता और उचित रखरखाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। पशुओं की नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।
वक्ताओं ने स्वच्छ दूध उत्पादन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि दूध निकालने से पहले और बाद में साफ-सफाई बनाए रखना, पशुओं को उचित वातावरण देना और दुग्ध संग्रहण के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन करना आवश्यक है।
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सहकारिता के नियमों और जिम्मेदारियों की दी जानकारी
कार्यक्रम में सहकारी प्रशिक्षण केंद्र, इंदौर के पूर्व प्राचार्य निरंजन कुमार कसारा और के.एल. राठौर, इंदौर दुग्ध संघ के पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक एन.के. पगारे तथा जिला सहकारी संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिरुद्ध शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को सहकारी संस्थाओं के सिद्धांतों, सहकारी अधिनियम, प्रबंधकारिणी समिति के अधिकारों और कर्तव्यों तथा संस्थाओं की उपविधियों के बारे में विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों का प्रभावी संचालन और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी दुग्ध व्यवसाय को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सहकारिता के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से अपने व्यवसाय का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और आर्थिक लाभ बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
70 दुग्ध सहकारी समितियों के 200 से अधिक सदस्य हुए शामिल
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र की लगभग 70 दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े 200 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें समितियों के सदस्य, अध्यक्ष, सचिव और संचालक मंडल के प्रतिनिधि शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से संबंधित पाठ्य सामग्री और बैग भी वितरित किए गए, ताकि वे प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने कार्यक्षेत्र में कर सकें।
पशुपालन और सहकारिता से मजबूत होगी किसानों की आय
प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से किसानों को आधुनिक पशुपालन, स्वच्छ दूध उत्पादन और सहकारी व्यवस्था के बेहतर संचालन के बारे में व्यावहारिक जानकारी देने पर जोर दिया गया। वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने और सहकारी समितियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने से दुग्ध उत्पादकों को अपने व्यवसाय में सुधार करने के अवसर मिल सकते हैं।
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने, पशुपालन संबंधी जानकारी बढ़ाने और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

