APEDA की 113वीं बैठक में सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने मध्यप्रदेश की बासमती को GI टैग, FPO को निर्यातकों से जोड़ने और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के प्रस्ताव रखे।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की 113वीं बैठक में होशंगाबाद–नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के लिए कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने राज्य की बासमती धान को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने की प्रक्रिया तेज करने, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को निर्यातकों से जोड़ने और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
बैठक में सांसद ने किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग करने और निर्यात के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने से जुड़े प्रस्ताव रखे। उनका कहना था कि मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए गुणवत्ता जांच, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है।
मध्यप्रदेश की बासमती धान को GI टैग दिलाने की मांग
सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने मध्यप्रदेश में उत्पादित बासमती धान को GI पहचान दिलाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया। इसके लिए उन्होंने संभावित बासमती उत्पादक क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने, उत्पादन क्षेत्रों का नक्शा तैयार करने और धान की गुणवत्ता का आकलन करने का सुझाव दिया।
उन्होंने आवश्यक तकनीकी दस्तावेज तैयार करने के साथ GI पंजीकरण से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। सांसद के अनुसार, बासमती को GI पहचान दिलाने के प्रयासों के साथ किसानों को गुणवत्ता परीक्षण, उपज की पहचान, निगरानी, पैकेजिंग और निर्यातकों से संपर्क जैसी सुविधाओं से जोड़ना चाहिए।
इससे किसानों को अपने उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और संभावित निर्यात बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
मूंग, चावल और दलहन के निर्यात के लिए बनेगी कार्ययोजना
बैठक में सांसद ने नर्मदापुरम में पहले आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मूंग, चावल, बासमती, मोटे अनाज, तुअर और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर काम करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग कृषि उत्पादों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और सहकारी समितियों को निर्यातकों से जोड़कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यापार की प्रक्रिया समझने का अवसर दिया जाए।
सांसद ने APEDA से तकनीकी सहयोग लेकर कम से कम एक या दो कृषि उत्पादों की प्रायोगिक निर्यात खेप भेजने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। इससे उत्पादकों को निर्यात की प्रक्रियाओं, गुणवत्ता मानकों और बाजार की आवश्यकताओं का व्यावहारिक अनुभव मिल सकता है।
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पैक हाउस और दलहन प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर जोर
कृषि उत्पादों को निर्यात के अनुकूल बनाने के लिए सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने क्षेत्र में एकीकृत पैक हाउस और दलहन की ग्रेडिंग, प्रसंस्करण तथा पैकेजिंग इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर ध्यान देने की मांग की।
उन्होंने APEDA के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों को पात्र योजनाओं के तहत परियोजना प्रस्ताव तैयार करने में तकनीकी मार्गदर्शन देने का आग्रह किया।
इन सुविधाओं के विकास से कृषि उपज की छंटाई, गुणवत्ता बनाए रखने, बेहतर पैकेजिंग और निर्यात संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
GI उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात पर विशेष ध्यान
सांसद ने नरसिंहपुर के GI पहचान प्राप्त गुड़ और बरमान घाट बैंगन को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने का सुझाव दिया। उन्होंने इन उत्पादों के गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग, निर्यात के अनुकूल पैकेजिंग और संभावित खरीदारों से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया।
इसके साथ ही गाडरवारा की तुअर दाल के GI आवेदन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने और लंबित तकनीकी एवं दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरा करने में APEDA से सहयोग मांगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि GI पहचान की प्रक्रिया के साथ-साथ तुअर दाल के संभावित निर्यात बाजारों की पहचान करने की तैयारी भी शुरू की जानी चाहिए। इससे क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को देश और विदेश में अलग पहचान दिलाने के प्रयासों को गति मिल सकती है।
किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता जांच की सुविधा की मांग
बैठक में नर्मदापुरम और नरसिंहपुर क्षेत्र के किसानों तथा FPO के लिए स्थानीय स्तर पर नमूना संग्रह और गुणवत्ता परीक्षण की सुविधा विकसित करने का मुद्दा भी उठाया गया।
सांसद ने जैविक और निर्यातोन्मुख कृषि उत्पादों के लिए अवशेष परीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन तथा खेत स्तर पर उपज की पहचान और निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया।
स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से किसानों को गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और निर्यात के लिए उत्पाद तैयार करने में सहूलियत मिल सकती है।
नर्मदापुरम या नरसिंहपुर में खरीदार-विक्रेता बैठक का प्रस्ताव
दर्शन सिंह चौधरी ने APEDA के सहयोग से नर्मदापुरम या नरसिंहपुर में जिला स्तरीय खरीदार-विक्रेता बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। ऐसी बैठकों के माध्यम से किसानों, FPO, सहकारी समितियों, व्यापारियों और संभावित निर्यातकों के बीच संपर्क बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने क्षेत्र के GI पहचान प्राप्त और अन्य संभावित निर्यात उत्पादों को APEDA के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में प्रमुखता से प्रदर्शित करने का सुझाव भी दिया।

