दतिया की महिला किसान रामश्री डेढ़ बीघा जमीन पर गेंदे की खेती से हर महीने ₹10-15 हजार कमा रही हैं। जानें कैसे स्व-सहायता समूह ने मदद की।
मध्य प्रदेश के दतिया जिले की महिला किसान रामश्री ने गेंदे के फूलों की खेती को अपनी आमदनी का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। श्री राधारानी स्व-सहायता समूह से जुड़ी रामश्री करीब डेढ़ बीघा जमीन पर गेंदे की खेती कर रही हैं। फूलों की बिक्री से वह हर महीने लगभग 10 हजार से 15 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
रामश्री अपने खेत में उगाए गए फूलों को स्थानीय बाजारों के साथ उत्तर प्रदेश के झांसी में भी बेचती हैं। इस तरह उन्होंने खेती के साथ फूलों की बिक्री को जोड़कर अपने लिए स्वरोजगार का अवसर तैयार किया है।
स्व-सहायता समूह से मिला आर्थिक सहारा
रामश्री के इस काम को आगे बढ़ाने में स्व-सहायता समूह की अहम भूमिका रही है। श्री राधारानी स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण मिला था। इस आर्थिक सहायता से उन्हें गेंदे की खेती और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
समूह से जुड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिला। अब वह फूलों की खेती के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं।
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डेढ़ बीघा जमीन पर कर रहीं गेंदे की खेती
रामश्री करीब डेढ़ बीघा जमीन पर गेंदे के फूल उगा रही हैं। फूलों की मांग को देखते हुए वह अपनी उपज स्थानीय बाजारों के अलावा झांसी तक पहुंचाती हैं।
स्थानीय स्तर पर खेती के साथ दूसरे शहरों में बिक्री की व्यवस्था बनाने से उन्हें अपने उत्पाद के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है। उनकी यह पहल दिखाती है कि सीमित जमीन पर भी सही फसल का चयन और बिक्री की योजना स्वरोजगार का अच्छा माध्यम बन सकती है।
हालांकि, फूलों की खेती में वास्तविक लाभ मौसम, उत्पादन, बाजार भाव और परिवहन खर्च जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
अब खुद की फूलों की दुकान खोलना चाहती हैं रामश्री
गेंदे की खेती से आमदनी हासिल करने के बाद रामश्री अब अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने का सपना देख रही हैं। उनकी इच्छा भविष्य में खुद की फूलों की दुकान खोलने की है।
अगर उनकी यह योजना सफल होती है, तो उन्हें खेत में फूल उगाने के साथ सीधे ग्राहकों तक फूल बेचने का अवसर भी मिल सकता है। इससे उनके व्यवसाय को विस्तार देने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
रामश्री की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाओं को सामने लाती है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला आर्थिक सहयोग महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
दतिया की रामश्री ने गेंदे की खेती और फूलों की बिक्री को अपनी आय का साधन बनाया है। उनकी कोशिश अन्य महिलाओं को भी खेती, फूलों की बिक्री और स्थानीय व्यवसायों के जरिए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर सकती है।

