विदिशा में दो दिवसीय उद्यानिकी प्रशिक्षण संपन्न हुआ। किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई, फसल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी दी गई।
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में किसानों को आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग और उद्यानिकी विभाग, विदिशा के संयुक्त तत्वावधान में पीएनबी ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को सब्जियों, फलों और फूलों की वैज्ञानिक खेती, बेहतर फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के तरीके बताए गए।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल करने के लिए तकनीकी जानकारी देना और उनकी आय बढ़ाने की संभावनाओं को प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद हुआ, जिससे खेतों में आने वाली समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक खेती की जानकारी
प्रशिक्षण में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च (IIHR), बेंगलुरु और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेजिटेबल रिसर्च के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने भाग लिया। डॉ. वी. श्रीधर, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. एस. मौर्य और डॉ. जयदीप हलदर ने किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उन्नत उद्यानिकी तकनीकों को अपनाने के लिए मार्गदर्शन दिया।
विदिशा, गंजबासौदा, कुरवाई, नटेरन और ग्यारसपुर विकासखंडों से आए किसानों को सब्जी, फल और पुष्प उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। इसमें बीज चयन, पौध तैयार करने, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने के उपाय शामिल रहे।
गुणवत्तापूर्ण बीज और स्वस्थ पौध पर जोर
वैज्ञानिकों ने बताया कि बेहतर फसल उत्पादन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और स्वस्थ पौध का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्नत किस्मों का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से पौध तैयार करने से फसल की वृद्धि, उपज और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
किसानों को टमाटर, बैंगन और मिर्च जैसी प्रमुख सब्जियों की बुवाई से लेकर कटाई तक अपनाई जाने वाली तकनीकों की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा, कम पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए उचित सिंचाई व्यवस्था और फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व को समझाया गया।
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खेतों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने देखीं फसलों की समस्याएं
प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यावहारिक अनुभव को विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने ग्राम सुनपुरा, गोबरहेला और हंसुआ में किसानों के खेतों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने फसलों की स्थिति, पौधों की वृद्धि और स्थानीय कृषि परिस्थितियों का निरीक्षण किया।
खेत भ्रमण के दौरान किसानों ने कीटों, बीमारियों और फसल उत्पादन से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की। वैज्ञानिकों ने खेतों की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। इससे किसानों को अपनी फसलों में आने वाली समस्याओं की पहचान करने और उनके उचित समाधान समझने का अवसर मिला।
IPM तकनीक से घटेगा कीटनाशकों का अनावश्यक इस्तेमाल
प्रशिक्षण के दौरान एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) पर विशेष ध्यान दिया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों में कीटों की पहचान, रोगों के शुरुआती लक्षण और समय पर नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी।
किसानों को लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, येलो स्टिकी ट्रैप और ट्रैप क्रॉप जैसी तकनीकों के उपयोग के बारे में बताया गया। इन उपायों से खेतों में कीटों की निगरानी करने और प्रकोप की शुरुआती अवस्था में उचित नियंत्रण की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिकों ने समझाया कि एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाने से अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने, खेती की लागत नियंत्रित रखने और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
फल और फूलों की खेती के लिए भी मिला मार्गदर्शन
कार्यक्रम में फल एवं पुष्प उत्पादन को लाभकारी बनाने के लिए पौध प्रबंधन, सिंचाई, संतुलित पोषण और फसल संरक्षण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि वैज्ञानिक पद्धतियों के अनुसार खेती करने से उत्पादन और उपज की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने किसानों को आम के पौधे, रजनीगंधा और गेंदा सहित विभिन्न फल एवं पुष्प फसलों की रोपण सामग्री तथा बीज उपलब्ध कराए। साथ ही उनकी रोपाई, देखभाल और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी तकनीकी सुझाव भी दिए गए।
किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद से मिला लाभ
दो दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के साथ आयोजित खेत भ्रमण ने किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को व्यावहारिक रूप में समझने का अवसर दिया।
विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत तकनीकों को अपनाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और फसल प्रबंधन में सुधार करने की सलाह दी। इससे किसानों को उद्यानिकी उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपयोगी जानकारी मिली।
विदिशा में लाभकारी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की पहल
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग और उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम जिले में आधुनिक उद्यानिकी को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सब्जियों, फलों और फूलों की खेती में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किसानों को फसल विविधीकरण के अवसर प्रदान कर सकता है।
प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, बेहतर सिंचाई, संतुलित पोषण और प्रभावी कीट एवं रोग प्रबंधन की जानकारी मिली। इन तकनीकों को खेतों में अपनाकर किसान उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने, खेती की लागत को नियंत्रित करने और अपनी आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।

