छिंदवाड़ा में कृषि विभाग ने किसानों से मक्का की कड़बी न जलाने और इसे पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करने की अपील की।
कृषि विभाग ने किसानों से मक्का की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले फसल अवशेष यानी कड़बी को जलाने के बजाय सुरक्षित रखने और पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि कम बारिश के कारण आगामी रबी सीजन में गेहूं की बुवाई का रकबा घटने की आशंका है। इससे पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
मक्का की कड़बी से पशुओं के चारे की कमी होगी दूर
अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने मक्का की कड़बी के संरक्षण पर जोर दिया है। फसल कटाई के बाद खेत में बचने वाले अवशेषों को इकट्ठा करके सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी और कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
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कृषि विभाग ने किसानों से की अपील
उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ और परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर ने किसानों से आग्रह किया है कि वे मक्का की फसल काटने के बाद खेतों में बची कड़बी को आग लगाने के बजाय एकत्रित कर सुरक्षित रखें। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से पशुपालकों को चारे की उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
फसल अवशेष जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
कृषि विभाग ने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके अलावा, आग के कारण मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे मृदा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
कड़बी का उचित प्रबंधन करने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पशुओं के लिए चारे का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध रहेगा।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कृषि विभाग ने छिंदवाड़ा जिले के किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने से बचें और उनका उपयोगी प्रबंधन अपनाएं। मक्का की कड़बी को संरक्षित रखना कम बारिश के दौरान पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने की दिशा में एक उपयोगी कदम साबित हो सकता है।

