भदोही में 48 किसानों को ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और टिशू कल्चर केले की खेती का प्रशिक्षण मिला। जानें अनुदान और कमाई के नए अवसर।
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में किसान अब पारंपरिक धान और गेहूं की खेती के साथ-साथ बागवानी की नई संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और टिशू कल्चर केले जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की ओर से किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी आमदनी बढ़ाने के नए विकल्प उपलब्ध कराना है।
जिले की पुरानी कलेक्ट्रेट स्थित उद्यान विभाग के कार्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मंगलवार को हुआ। इसमें 48 किसानों ने भाग लिया और नई फसलों की खेती, पौधों की देखभाल तथा सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी की खेती के बताए गए तरीके
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला उद्यान अधिकारी ममता सिंह यादव ने किसानों को ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और टिशू कल्चर केले की खेती से संबंधित जानकारी दी। किसानों को इन फसलों के लिए जरूरी कृषि तकनीकों के साथ-साथ उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं और संभावित अनुदान के बारे में भी बताया गया।
अधिकारियों का कहना है कि पारंपरिक फसलों के अलावा दूसरी फसलों को अपनाने से किसानों को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, नई फसल लगाने से पहले स्थानीय मिट्टी, मौसम, बाजार की मांग और शुरुआती निवेश का आकलन करना जरूरी है।
एक बीघा जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगा रहे किसान
प्रशिक्षण में शामिल किसान सिमांत मिश्रा पहले से लगभग एक बीघा जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस फसल में शुरुआत में पौधों और खेती की व्यवस्था पर खर्च करना पड़ता है, लेकिन उचित देखभाल के साथ लंबे समय तक उत्पादन प्राप्त करने की संभावना रहती है।
कार्यक्रम में स्थानीय बाजार में ड्रैगन फ्रूट की अच्छी कीमत मिलने की जानकारी भी साझा की गई। बताया गया कि एक फल की कीमत 120 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बिक्री मूल्य फल के आकार, गुणवत्ता, मौसम, बाजार और मांग के अनुसार बदल सकता है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती में निवेश करने वाले किसानों के लिए पौधों की गुणवत्ता, सहारा देने वाली संरचना, सिंचाई और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
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धान-गेहूं के मुकाबले नई फसलों से मिल सकते हैं अतिरिक्त विकल्प
भदोही में बड़ी संख्या में किसान धान और गेहूं की पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों को अपनाना किसानों के लिए आय के नए विकल्प विकसित करने का माध्यम बन सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कुछ बागवानी फसलों में पारंपरिक धान की तुलना में पानी की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, सिंचाई की वास्तविक मात्रा फसल की किस्म, मिट्टी, मौसम और खेती के तरीके पर निर्भर करती है।
किसानों को सलाह दी गई कि वे नई फसलों की शुरुआत सीमित क्षेत्र से करें। इससे उन्हें उत्पादन तकनीक समझने, बाजार की मांग जानने और जोखिम को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
स्ट्रॉबेरी की खेती में सही मौसम और देखभाल जरूरी
स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए एक अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकती है। इस फसल में उचित तापमान, समय पर सिंचाई, पौधों का पोषण और रोगों से बचाव महत्वपूर्ण होता है।
प्रशिक्षण में किसानों को स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़ी जानकारी दी गई, ताकि वे अपने क्षेत्र की जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इसकी संभावनाओं का आकलन कर सकें।
स्ट्रॉबेरी लगाने से पहले किसानों को स्थानीय बाजार में मांग, फसल की अवधि, परिवहन की सुविधा और जल्दी खराब होने वाले फलों के भंडारण की व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए।
टिशू कल्चर केले की खेती से उत्पादन में सुधार की संभावना
कृषक प्रशिक्षण में टिशू कल्चर केले के पौधों की खेती पर भी चर्चा की गई। टिशू कल्चर तकनीक से तैयार पौधे सामान्यतः एकसमान आकार और विकास वाले हो सकते हैं। रोगमुक्त पौध सामग्री मिलने पर शुरुआती रोग जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए पौधों की गुणवत्ता के साथ उचित पोषण, सिंचाई, खेत की तैयारी और समय पर फसल प्रबंधन भी जरूरी है। किसानों को प्रमाणित स्रोत से पौधे खरीदने और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने की सलाह दी गई।
सरकारी अनुदान से किसानों को मिल सकती है मदद
उद्यान विभाग ने प्रशिक्षण के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। इन योजनाओं के तहत पात्रता और लागू नियमों के अनुसार कुछ बागवानी गतिविधियों में अनुदान का लाभ मिल सकता है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन करने से पहले जिला उद्यान विभाग से संबंधित योजना की वर्तमान स्थिति, पात्रता की शर्तें, जरूरी दस्तावेज और सहायता राशि की पुष्टि कर लें।
प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी रखी, ताकि छोटे और सीमांत किसानों के लिए नई फसलों की खेती शुरू करना आसान हो सके।
किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए किया जा रहा प्रोत्साहित
केवल एक या दो पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने से किसानों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और बाजार में कीमतों में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। फसल विविधीकरण के जरिए किसान अपनी जमीन, पानी और संसाधनों के अनुसार अलग-अलग फसलों को शामिल कर सकते हैं।
उद्यान विभाग भविष्य में भी किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी अधिक किसानों तक पहुंचाना और उन्हें खेती के नए विकल्पों से परिचित कराना है।

