धान की फसल में तना छेदक से डेड हार्ट का खतरा बढ़ रहा है। जानें नीम तेल, स्पिनोसैड और अन्य उपायों से फसल को बचाने का तरीका।
धान की खेती करने वाले किसानों को अक्टूबर में तना छेदक कीट के प्रकोप को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। नागालैंड के लिए जारी मौसम आधारित कृषि सलाह में वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह कीट धान के तनों के अंदर प्रवेश करके पौधों को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण पौधे का बीच वाला हिस्सा सूख सकता है और बालियां बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस लक्षण को कृषि भाषा में ‘डेड हार्ट’ कहा जाता है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल का नियमित निरीक्षण करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। समय पर कीट की पहचान होने से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
धान में तना छेदक कीट कैसे पहुंचाता है नुकसान?
तना छेदक धान की प्रमुख कीट समस्याओं में से एक है। इसकी मादा पतंगा धान की पत्तियों पर अंडे देती है। अंडों से निकलने वाले लार्वा पौधे के तने में प्रवेश कर अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाते हैं।
जब तने का अंदरूनी भाग प्रभावित होता है, तो पौधे का बीच का हिस्सा सूखने लगता है। शुरुआती अवस्था में यह भाग पीला पड़ सकता है और बाद में सूखकर अलग हो सकता है। यदि प्रकोप बढ़ने पर बालियां बनने की अवस्था प्रभावित होती है, तो उपज में भी कमी आ सकती है।
तने के अंदर पहुंच चुके लार्वा पर बाहरी छिड़काव का असर सीमित हो सकता है। इसलिए खेत में शुरुआती लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है।
शुरुआती प्रकोप में नीम तेल से करें नियंत्रण
नागालैंड के लिए जारी कृषि सलाह में तना छेदक के शुरुआती प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए नीम तेल के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।
बताई गई सलाह के अनुसार, एक लीटर पानी में 2 मिलीलीटर नीम तेल मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। हालांकि, इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के लेबल पर दी गई मात्रा और निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
किसानों को खेत के अलग-अलग हिस्सों में पौधों की जांच करनी चाहिए। यदि कुछ पौधों का बीच वाला हिस्सा सूखता दिखाई दे, तो उसकी वजह की पहचान कर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
स्पिनोसैड और जैविक उपायों का भी दिया गया सुझाव
यदि कीट का प्रकोप बढ़ रहा हो, तो कृषि सलाह में कुछ अन्य नियंत्रण विकल्पों का उल्लेख किया गया है।
- स्पिनोसैड 45 SC: उपलब्ध सलाह में 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की मात्रा बताई गई है।
- बैसिलस थुरिंजिएन्सिस वर. कुर्स्टाकी (Bt): सलाह में 3 मिलीलीटर या 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी का उल्लेख है। सही मात्रा उत्पाद के फॉर्मूलेशन और लेबल पर निर्भर करेगी।
इन उत्पादों का उपयोग करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि संबंधित फॉर्मूलेशन धान में तना छेदक के नियंत्रण के लिए पंजीकृत और अनुशंसित है। केवल नाम या सामान्य मात्रा के आधार पर किसी उत्पाद का छिड़काव नहीं करना चाहिए।
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गंभीर प्रकोप में इंडोक्साकार्ब का विकल्प
कृषि सलाह में गंभीर प्रकोप की स्थिति में इंडोक्साकार्ब 14.5 SC के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है। इसके लिए 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की मात्रा बताई गई है।
इसके अलावा फ्लूबेंडियामाइड 39.35 SC का भी जिक्र किया गया है, लेकिन उपलब्ध विवरण में इसकी मात्रा स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसका इस्तेमाल करने से पहले आधिकारिक उत्पाद लेबल या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सही खुराक की पुष्टि करना जरूरी है।
किसानों को कीटनाशक का चयन कीट की पहचान, प्रकोप की स्थिति और फसल की अवस्था के आधार पर करना चाहिए। अनावश्यक छिड़काव से लागत बढ़ सकती है और लाभकारी कीटों पर भी असर पड़ सकता है।
धान में गंधी बग से भी रहें सावधान
तना छेदक के अलावा धान की फसल में गंधी बग की निगरानी करने की सलाह भी दी गई है। यह कीट दानों को नुकसान पहुंचा सकता है और फसल की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
उपलब्ध कृषि सलाह के अनुसार, जब प्रति झुंड एक से दो कीट से अधिक संख्या दिखाई दे, तभी रासायनिक नियंत्रण पर विचार करने को कहा गया है। हल्के प्रकोप के लिए 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से नीम तेल का सुझाव दिया गया है।
हालांकि, छिड़काव से पहले स्थानीय कृषि विभाग से कीट की पहचान, आर्थिक नुकसान की सीमा और उत्पाद की उपयुक्तता की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
ब्लास्ट और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट से कैसे बचाएं फसल?
धान में तना छेदक के साथ-साथ ब्लास्ट और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट जैसी बीमारियों पर भी नजर रखना जरूरी है। कृषि वैज्ञानिकों ने जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन उर्वरक इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी है, क्योंकि असंतुलित पोषण कुछ परिस्थितियों में रोगों की गंभीरता बढ़ा सकता है।
किसानों को खेत में संतुलित खाद का इस्तेमाल करना चाहिए और रोग के लक्षण दिखाई देने पर सही पहचान के बाद ही उपचार अपनाना चाहिए। रोग नियंत्रण के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहता है।
लाइट ट्रैप से पतंगों की निगरानी में मिल सकती है मदद
तना छेदक के पतंगे रात के समय सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में खेत के आसपास लाइट ट्रैप का इस्तेमाल उनकी गतिविधि पर नजर रखने में मदद कर सकता है।
जिन खेतों में पहले तना छेदक का प्रकोप रहा है, वहां किसानों को फसल की शुरुआती अवस्था से ही निगरानी करनी चाहिए। खेत की मेड़ों और आसपास के हिस्सों में खरपतवार का उचित प्रबंधन भी जरूरी है। हालांकि, केवल खरपतवार हटाने से तना छेदक का प्रकोप पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं होती।
अक्टूबर में धान किसानों को क्यों बढ़ानी चाहिए निगरानी?
बारिश, अधिक नमी और मौसम में बदलाव के दौरान फसल में कीटों तथा रोगों की स्थिति तेजी से बदल सकती है। इसलिए अक्टूबर में किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करना चाहिए।
पौधों के सूखते मध्य भाग, पत्तियों के रंग में बदलाव और कीटों की मौजूदगी जैसे संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। शुरुआती पहचान के बाद उचित उपाय अपनाने से फसल को होने वाले नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

