कुत्ते के काटने के बाद रेबीज का टीका कब लगवाएं? जानें घाव की तुरंत सफाई, वैक्सीन की जरूरत, PEP और किन लक्षणों में तुरंत चिकित्सा मदद जरूरी है।
कुत्ते के काटने या खरोंचने को मामूली चोट समझना गंभीर गलती हो सकती है। अगर संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से रेबीज वायरस शरीर में पहुंच जाए, तो यह जानलेवा बीमारी का कारण बन सकता है। खास बात यह है कि रेबीज के लक्षण शुरू होने के बाद बीमारी लगभग हमेशा घातक होती है, जबकि संभावित संक्रमण के बाद समय पर उचित चिकित्सा उपायों से इसे रोका जा सकता है।
इसीलिए कुत्ते के काटने के बाद लक्षण आने का इंतजार करने के बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। हर कुत्ते के काटने पर एक जैसा उपचार नहीं होता। चोट की गंभीरता, त्वचा के टूटने, खून निकलने और संक्रमित लार के संपर्क जैसी परिस्थितियों के आधार पर डॉक्टर रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) की सलाह देते हैं।
कुत्ते के काटने के तुरंत बाद क्या करें?
कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर सबसे पहला कदम घाव को अच्छी तरह साफ करना है।
- घाव को साबुन और बहते पानी से करीब 15 मिनट तक धोएं।
- घाव को साफ करने के बाद जल्द से जल्द डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
- घाव पर मिर्च, चूना, तेजाब, मिट्टी या किसी अन्य जलन पैदा करने वाले पदार्थ का इस्तेमाल न करें।
- खुद से यह तय न करें कि कुत्ता स्वस्थ है, इसलिए टीके की जरूरत नहीं है।
घाव की शुरुआती सफाई वायरस के संभावित जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके बाद चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
किन मामलों में रेबीज वैक्सीन की जरूरत पड़ सकती है?
रेबीज से बचाव के लिए उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि जानवर की लार का संपर्क किस तरह हुआ है। सिर्फ छूने या स्वस्थ त्वचा पर चाटने की स्थिति: आमतौर पर इसे रेबीज एक्सपोजर नहीं माना जाता और वैक्सीन की आवश्यकता नहीं होती।
हल्की खरोंच या त्वचा पर मामूली चोट: अगर त्वचा टूट गई है, भले ही खून न निकला हो, तो इसे संभावित रेबीज एक्सपोजर माना जा सकता है और डॉक्टर वैक्सीन की सलाह दे सकते हैं।
गहरा काटना या खून निकलना: त्वचा को गहराई से काटने, खून निकलने या टूटे हुए त्वचा वाले हिस्से पर संक्रमित जानवर की लार लगने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन जरूरी है। ऐसे मामलों में वैक्सीन के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) की जरूरत भी पड़ सकती है। आंख, मुंह या शरीर की अन्य म्यूकस मेम्ब्रेन पर संक्रमित जानवर की लार का संपर्क भी गंभीर एक्सपोजर माना जा सकता है।
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कुत्ते के काटने के कितने घंटे बाद वैक्सीन लगवानी चाहिए?
कुत्ते के काटने के बाद रेबीज का इलाज शुरू करने के लिए किसी निश्चित संख्या में घंटे का इंतजार नहीं करना चाहिए। संभावित रेबीज एक्सपोजर होने पर जितनी जल्दी संभव हो, डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।
डॉक्टर एक्सपोजर की श्रेणी और व्यक्ति की स्थिति के आधार पर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) तय करते हैं। इसमें रेबीज वैक्सीन और कुछ गंभीर एक्सपोजर में RIG शामिल हो सकता है।
वैक्सीन की डोज और उसका शेड्यूल इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीनेशन पद्धति तथा स्थानीय चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरे वैक्सीन शेड्यूल को समय पर पूरा करना जरूरी है।
क्या लक्षण आने तक इंतजार करना सही है?
नहीं। रेबीज के मामले में लक्षणों का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है। एक बार बीमारी के स्पष्ट लक्षण शुरू हो जाने के बाद प्रभावी उपचार के विकल्प बेहद सीमित होते हैं और बीमारी लगभग हमेशा घातक होती है।
इसीलिए कुत्ते के काटने के बाद बुखार, पानी से डर लगना, बेचैनी या अन्य लक्षण आने का इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सलाह लेना जरूरी है।
कुत्ता स्वस्थ दिख रहा हो तो क्या टीका छोड़ सकते हैं?
सिर्फ कुत्ते के सामान्य या स्वस्थ दिखाई देने के आधार पर खुद से रेबीज वैक्सीन बंद करने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
कुछ परिस्थितियों में कुत्ते या बिल्ली जैसे जानवर को प्रशिक्षित व्यक्ति या पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ की निगरानी में 10 दिनों तक देखा जा सकता है। लेकिन इस निगरानी के कारण घायल व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए। चिकित्सक जानवर की स्थिति, एक्सपोजर की प्रकृति और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे का उपचार तय करेंगे।
World Rabies Day पर जानें यह जरूरी बात
हर साल 28 सितंबर को World Rabies Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रेबीज के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बीमारी से बचाव के उपायों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है।
कुत्ते के काटने के बाद सबसे जरूरी तीन कदम हैं – घाव को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना, जल्द से जल्द स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई रेबीज वैक्सीन/अन्य PEP को समय पर पूरा करना।

