सीता नवमी 2026 कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत के लाभ और पूरी पूजा विधि जानें, सुहागिनों के लिए बेहद खास दिन।
हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ माने जाने वाला Sita Navami वर्ष 2026 में 25 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन माता Sita के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसे जानकी जयंती भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत फलदायी होता है और उनके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 24 अप्रैल 2026 को शाम 7:21 बजे से शुरू होकर 25 अप्रैल 2026 को शाम 6:27 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर सीता नवमी 25 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन को माता सीता के अवतरण दिवस के रूप में देखा जाता है, जो त्याग, प्रेम, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक है।
पूजा के लिए इस दिन का मध्याह्न मुहूर्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक का समय पूजा के लिए शुभ रहेगा, जबकि मध्याह्न क्षण 12:19 बजे का बताया गया है। इस दौरान की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है और इससे माता सीता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उनके पति की आयु लंबी होती है। इसके साथ ही दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है और संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। यही कारण है कि सीता नवमी को सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व का दिन माना जाता है।
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पूजा विधि के अनुसार इस दिन माता सीता और भगवान राम की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। माता को 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करना, लाल चुनरी चढ़ाना और विशेष मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही कन्याओं को भोजन कराना भी पुण्यकारी माना गया है।
इस दिन “ॐ सीतायै नमः”, “श्री जानकी रामाभ्यां नमः” और “ॐ श्री सीता रामाय नमः” जैसे मंत्रों का जाप करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा न केवल जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष भी प्रदान करती है।
कुल मिलाकर, सीता नवमी 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, त्याग और समर्पण के मूल्यों को अपनाने का संदेश भी देती है। इस दिन की गई पूजा और व्रत से भक्तों को माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।

