प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना 2026 की अगस्त समीक्षा में उमरिया देश में तीसरे स्थान पर रहा। जानिए कृषि, पशुपालन और मत्स्य उत्पादन की प्रमुख उपलब्धियां।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना 2026 के तहत उमरिया जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धि दर्ज कराई है। अगस्त माह की समीक्षा में जिले को योजना के अंतर्गत किए गए कार्यों के लिए पूरे देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि के बाद जिले में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और खेती के क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने के प्रयासों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
भारत सरकार में पदस्थ आईएएस अधिकारी एवं जिले के नोडल अधिकारी तरुण पिथोड़े ने उमरिया का दौरा कर योजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रगति की समीक्षा की।
उमरिया में कृषि विकास के प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान
समीक्षा बैठक में नोडल अधिकारी तरुण पिथोड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत उमरिया जिले में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए की जा रही गतिविधियां सराहनीय हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना से जुड़े किसी एक क्षेत्र में ऐसा प्रभावी मॉडल विकसित किया जाए, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। उनका जोर इस बात पर रहा कि उमरिया जिले की उपलब्धियां दूसरे क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बनें।
श्री अन्न की बेहतर पैकेजिंग और बाजार पर रहेगा फोकस
नोडल अधिकारी ने जिले में उत्पादित होने वाले श्री अन्न की गुणवत्ता बनाए रखने और उसकी आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों के लिए उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराने से उनकी पहचान मजबूत हो सकती है और किसानों को बेहतर विपणन के अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर युवाओं और ग्रामीण नागरिकों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाए। इससे रोजगार के नए अवसर विकसित करने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, ग्रामीण विकास और कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों को मिलने वाली सहायता तथा उससे उनकी आय और उत्पादन में हुए सुधार का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया गया।
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धान के साथ दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा
बैठक में कलेक्टर राखी सहाय ने जिले में कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले उमरिया के किसान मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर थे, लेकिन अब दलहन और तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले के किसी एक गांव को प्राकृतिक खेती के आदर्श गांव के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, जहां सभी किसान प्राकृतिक खेती की पद्धतियां अपनाएं और रासायनिक खादों के उपयोग से बचें।
इस पहल का उद्देश्य खेती में वैकल्पिक पद्धतियों को प्रोत्साहित करना और किसानों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए प्रेरित करना है।
सिंचाई, फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों पर जोर
समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिले में चल रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी ली गई। इसमें कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और कृषि अधोसंरचना को मजबूत बनाने जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अलावा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, फसल बीमा, पीएम किसान सम्मान निधि और भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि जिले में कृषि यंत्रों के लिए 348 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह जानकारी भी साझा की गई कि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने और कृषि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग काम कर रहे हैं।
मत्स्य उत्पादन और पशुपालन में भी दर्ज हुई प्रगति
बैठक में कृषि के साथ अन्य संबंधित क्षेत्रों की उपलब्धियों का विवरण भी प्रस्तुत किया गया। जानकारी के अनुसार, चालू वर्ष में अब तक उमरिया जिले में 7 हजार मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ है।
पशुपालन विभाग की ओर से 2 लाख 65 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया है, जबकि 16 हजार 706 पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान (AI) की प्रक्रिया पूरी की गई है।
इन गतिविधियों का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, पशुधन की देखभाल में सुधार करना और किसानों के लिए कृषि के अतिरिक्त आय के अवसरों को बढ़ावा देना है।
एफपीओ से जुड़े 4,500 सदस्य, किसानों को मिल रहा तकनीकी मार्गदर्शन
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ से अब तक 4,500 सदस्य जुड़ चुके हैं। एफपीओ के माध्यम से किसानों को सामूहिक गतिविधियों, कृषि संबंधी जानकारी और तकनीकी सहयोग से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और तकनीकी सहायता से उत्पादन तथा आय में किस प्रकार सुधार हो रहा है। इन उपलब्धियों को दूसरे किसानों तक पहुंचाने से उन्हें भी आधुनिक तकनीक अपनाने और खेती में नए प्रयोग करने की प्रेरणा मिल सकती है।
अधिकारियों को बेहतर परिणाम हासिल करने के निर्देश
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह, उप संचालक कृषि संग्राम सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने योजना के अंतर्गत चल रही गतिविधियों और विभागीय प्रगति से संबंधित जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में उमरिया का तीसरा स्थान हासिल करना जिले के कृषि विकास प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले समय में फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, कृषि अधोसंरचना, पशुपालन और मत्स्य पालन पर ध्यान देकर किसानों के लिए आय के नए अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा।

