स्वच्छता ही सेवा 2026 में संस्कृति मंत्रालय के 43 संस्थानों ने देशभर में अभियान चलाया। 424 स्वच्छता इकाइयों और 128 सार्वजनिक स्थलों का कायाकल्प किया गया।
संस्कृति मंत्रालय और उसके अधीन आने वाले संस्थानों ने देशभर में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 का आयोजन किया। इस वर्ष अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभाग: स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ रखी गई। अभियान के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
संस्कृति मंत्रालय के 43 संगठनों और सांस्कृतिक संस्थानों ने इस अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों का कायाकल्प, श्रमदान, जागरूकता कार्यक्रम, कला गतिविधियां और स्वच्छता से जुड़े जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए।
424 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों का किया गया कायाकल्प
अभियान के दौरान 10 हजार से अधिक लोगों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। इस दौरान 424 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (CTUs) की पहचान कर उनका कायाकल्प किया गया। इसके अलावा देशभर में 128 सार्वजनिक स्थानों को चिन्हित कर वहां विशेष सफाई अभियान चलाए गए।
इन गतिविधियों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ बनाने के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और उन्हें सफाई अभियानों से सीधे जोड़ना था।
207 नुक्कड़ नाटकों के जरिए दिया स्वच्छता संदेश
संस्कृति मंत्रालय से जुड़े जोनल कल्चरल सेंटर्स, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, संगीत नाटक अकादमी और सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्रों ने स्वच्छता जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 207 नुक्कड़ नाटक आयोजित किए।
इन कार्यक्रमों का आयोजन स्कूलों, कॉलेजों और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर किया गया। नाटकों के माध्यम से कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।
ऐतिहासिक स्मारकों पर भी चला विशेष सफाई अभियान
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपने विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों और स्मारकों में स्वच्छता अभियान चलाया। अधिकारियों के साथ स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी श्रमदान किया और स्मारकों के आसपास के रास्तों, लॉन तथा प्रमुख स्थानों से प्लास्टिक कचरा, सूखी पत्तियां और अन्य गंदगी हटाई।
चयनित ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस दौरान 300 से अधिक पेड़ लगाए गए।
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‘कबाड़ से कला’ के जरिए दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्रों में ‘कबाड़ से जुगाड़’ और ‘कबाड़ से कला’ जैसी थीम पर ‘कचरे से संपदा’ शिविर आयोजित किए गए। इनमें स्थानीय मूर्तिकारों, महिला कलाकारों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
प्रतिभागियों ने बेकार और अनुपयोगी सामग्री से रचनात्मक कलाकृतियां तैयार कीं। इस पहल के माध्यम से कचरे के पुन: उपयोग, रीसाइक्लिंग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।
छात्रों के लिए आयोजित हुईं कला प्रतियोगिताएं
नई दिल्ली के राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र ने भी स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘कचरे से कला’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 30 सितंबर और 1 अक्टूबर 2026 को आयोजित हुआ।
इसके अलावा मंत्रालय के विभिन्न संगठनों ने स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए कला प्रतियोगिताओं तथा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। 178 प्रदर्शन गतिविधियों और जल संचय संवाद सत्रों में 2,500 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
नारा लेखन और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन
नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में ‘स्वच्छता में सहभाग’ और ‘स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ विषय पर नारा लेखन और पोस्टर बनाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इनमें संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लेकर स्वच्छता के प्रति अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
राष्ट्रीय अभिलेखागार में हुआ श्रमदान
29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार परिसर में श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और परिसर में स्वच्छता से जुड़े कार्य किए।
इसके बाद 2 अक्टूबर 2026, स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के पुराना किला में भी श्रमदान और वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। संस्कृति सचिव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता मित्रों को स्वच्छता किट भी वितरित की गईं।
सफाई मित्रों के लिए लगाए गए 5 शिविर
अभियान के तहत सफाई मित्रों के लिए पांच सुरक्षा शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों के माध्यम से मंत्रालय के अधीन आने वाले विभिन्न संस्थानों में कार्यरत सफाई मित्रों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की गई।
इसके साथ ही मंत्रालय के सभी संगठनों में स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई। इसमें कर्मचारियों ने स्वच्छता, साफ-सफाई और जिम्मेदार नागरिक भागीदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सोशल मीडिया पर भी अभियान को मिला व्यापक समर्थन
‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर प्रचारित किया गया। अभियान से संबंधित 200 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए गए, जिन्हें 3.7 लाख से ज्यादा बार देखा गया।
कुल मिलाकर, संस्कृति मंत्रालय के इस अभियान ने ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश मजबूत किया। अभियान का उद्देश्य लोगों को केवल सफाई गतिविधियों से जोड़ना नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना भी रहा।

