सीधी के डॉ. विपिन शुक्ला ने आधुनिक उद्यानिकी और संरक्षित खेती से एक एकड़ में 10-15 लाख रुपये तक की आय का मॉडल तैयार किया। जानें सफलता का तरीका।
कृषि में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद अच्छी नौकरी या कॉर्पोरेट करियर चुनने के बजाय खेती को पेशे के रूप में अपनाना आज के दौर में युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण फैसला माना जाता है। लेकिन सीधी जिले के रामपुर नैकिन विकासखंड के मनकीसर गांव निवासी डॉ. विपिन शुक्ला ने वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक कृषि पद्धतियों के जरिए इस सोच को बदलने की मिसाल पेश की है।
कृषि विषय में एमएससी और डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. शुक्ला ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना। उन्होंने उद्यानिकी फसलों की उन्नत और संरक्षित खेती शुरू की और धीरे-धीरे इसे मिश्रित खेती के मॉडल में विकसित कर लिया। आज उनकी खेती से उन्हें एक एकड़ में 10 से 15 लाख रुपये तक की कुल आय हासिल हो रही है।
नौकरी के बजाय खेती को बनाया करियर
डॉ. विपिन शुक्ला ने उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद कृषि क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक अनाज वाली खेती के बजाय सब्जियों, फलों और फूलों की फसलों से शुरुआत की।
समय के साथ उन्होंने अलग-अलग फसलों को एक ही कृषि मॉडल में शामिल किया। मिश्रित खेती की वजह से उन्हें वर्ष के अलग-अलग समय में विभिन्न फसलों से आमदनी मिलती रही। इससे किसी एक फसल के खराब होने पर पूरी आय प्रभावित होने का जोखिम भी कम हुआ।
उद्यानिकी योजनाओं ने दिया आधुनिक खेती को बढ़ावा
डॉ. शुक्ला के अनुसार आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं। इन चुनौतियों से निपटने में उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र से मिले मार्गदर्शन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने सरकारी योजनाओं के माध्यम से ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, शेडनेट हाउस और कृषि यंत्रीकरण जैसी सुविधाओं का लाभ लिया। पात्रता के अनुसार इन योजनाओं में करीब 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से आधुनिक कृषि तकनीक में निवेश करना उनके लिए आसान हुआ।
शेडनेट हाउस में उत्पादन हुआ बेहतर
डॉ. विपिन शुक्ला ने संरक्षित खेती के लिए शेडनेट हाउस का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक नियंत्रित परिस्थितियों में खेती करने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखने को मिला।
उनका अनुभव है कि सामान्य खेती की तुलना में संरक्षित खेती के माध्यम से कई फसलों में उत्पादन लगभग दोगुना तक हासिल किया जा सकता है। इसके साथ ही फसल की गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ती है।
also read: हरदा में नरवाई न जलाएं किसान, कृषि विज्ञान केंद्र ने बताया फसल अवशेष…
शिमला मिर्च से लेकर गेंदा तक कई फसलों की खेती
वर्तमान में डॉ. शुक्ला अपने खेत में कई तरह की उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- शिमला मिर्च
- टमाटर
- खीरा
- गेंदा
- गोभी
शामिल हैं।
विभिन्न फसलों को शामिल करने से उन्हें बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन और बिक्री की योजना बनाने में मदद मिलती है।
एक एकड़ में 2 से 5 लाख लागत, आय 10 से 15 लाख तक
डॉ. शुक्ला के अनुसार आधुनिक उद्यानिकी और संरक्षित खेती में फसल एवं तकनीक के आधार पर करीब 2 से 5 लाख रुपये प्रति एकड़ तक खर्च हो सकता है।
वहीं बेहतर उत्पादन, फसल प्रबंधन और बाजार व्यवस्था के आधार पर उन्हें 10 से 15 लाख रुपये प्रति एकड़ तक कुल आय प्राप्त हो जाती है।
आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के बाद उनकी कृषि आय में पहले के मुकाबले करीब चार गुना तक वृद्धि हुई है।
खेती को व्यवसाय की तरह करने पर बढ़ सकती है आमदनी
डॉ. विपिन शुक्ला का मानना है कि खेती को केवल परंपरागत आजीविका के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। यदि किसान वैज्ञानिक तकनीक, उत्पादन प्रबंधन और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करें, तो कृषि एक लाभकारी व्यवसाय में बदल सकती है।
उनके मुताबिक युवाओं के लिए आधुनिक उद्यानिकी खेती रोजगार और आत्मनिर्भरता का अच्छा विकल्प बन सकती है।
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की सलाह
डॉ. शुक्ला अन्य किसानों को सलाह देते हैं कि वे उद्यानिकी विभाग और कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी जरूर लें। सरकारी सहायता के जरिए किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, संरक्षित खेती और कृषि यंत्रीकरण जैसी तकनीकों को अपेक्षाकृत कम निवेश में अपना सकते हैं।
इन तकनीकों से पानी और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ उत्पादन और आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
आधुनिक खेती में विभागों का सहयोग अहम
डॉ. शुक्ला ने अपनी सफलता में सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रति आभार जताया।
उनका कहना है कि किसानों तक सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचने से खेती में नए प्रयोगों को बढ़ावा मिल सकता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी डॉ. शुक्ला की कहानी
डॉ. विपिन शुक्ला की सफलता यह दिखाती है कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भी कृषि को अपना करियर बनाकर अच्छी आय हासिल कर सकते हैं। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच, फसल विविधीकरण और बाजार की समझ के साथ खेती को एक सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।
डॉ. शुक्ला का मानना है कि यदि किसानों को लगातार सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ा जाए, तो मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र आने वाले समय में और मजबूत हो सकता है और किसान अधिक आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

