Shingles Symptoms: शरीर पर दर्द, जलन और फफोले को नजरअंदाज न करें। जानें शिंगल्स क्या है, स्ट्रोक-हार्ट जोखिम से इसका संबंध और बचाव के तरीके।
Shingles Symptoms: शरीर पर जलन, तेज दर्द और एक तरफ फफोले दिखाई दें तो इसे सामान्य दाद समझकर नजरअंदाज न करें। यह हर्पीज जोस्टर यानी शिंगल्स हो सकता है। कुछ शोधों में शिंगल्स के बाद स्ट्रोक और हृदय संबंधी घटनाओं के जोखिम में अस्थायी बढ़ोतरी का संबंध सामने आया है।
त्वचा पर अचानक जलन, चुभन, खुजली या दर्द के साथ छोटे-छोटे फफोले दिखाई देना कई बार सामान्य स्किन इंफेक्शन जैसा लग सकता है। लेकिन अगर ये लक्षण शरीर के किसी एक हिस्से में नसों के रास्ते के साथ दिखाई दे रहे हैं, तो यह शिंगल्स (Herpes Zoster) का संकेत हो सकता है।
शिंगल्स को केवल त्वचा की समस्या मानकर छोड़ना सही नहीं है। इसके कारण लंबे समय तक नसों में दर्द जैसी परेशानी हो सकती है और कुछ अध्ययनों में संक्रमण के बाद स्ट्रोक तथा हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम में बढ़ोतरी का संबंध भी पाया गया है।
क्या होता है शिंगल्स?
शिंगल्स वैरिसेला-जोस्टर वायरस (Varicella-Zoster Virus) के दोबारा सक्रिय होने से होता है। यही वायरस चिकनपॉक्स का कारण बनता है। चिकनपॉक्स से ठीक होने के बाद वायरस शरीर से पूरी तरह बाहर नहीं जाता, बल्कि तंत्रिका कोशिकाओं में निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है।
बाद में उम्र बढ़ने, इम्यून सिस्टम कमजोर होने या कुछ अन्य परिस्थितियों में यह वायरस दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसके बाद प्रभावित नसों के आसपास दर्द और त्वचा पर दाने या फफोले विकसित हो सकते हैं।
शिंगल्स के दौरान अक्सर पहले प्रभावित हिस्से में दर्द, जलन, झुनझुनी या अत्यधिक संवेदनशीलता महसूस होती है। इसके बाद शरीर या चेहरे के एक तरफ छोटे-छोटे फफोले नजर आ सकते हैं। आमतौर पर ये कुछ समय बाद सूखकर पपड़ी में बदल जाते हैं।
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दाने ठीक होने के बाद भी रह सकता है दर्द
शिंगल्स की एक प्रमुख जटिलता पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया (Postherpetic Neuralgia) है। इसमें त्वचा के दाने और फफोले ठीक हो जाने के बाद भी प्रभावित हिस्से में नसों का दर्द बना रह सकता है।
इस समस्या की संभावना उम्र बढ़ने के साथ अधिक हो सकती है। कुछ मरीजों में दर्द कई महीनों तक बना रहता है और दुर्लभ मामलों में यह लंबे समय तक परेशान कर सकता है।
अगर शिंगल्स चेहरे या आंख के आसपास दिखाई दे, तो इसे विशेष रूप से गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि संक्रमण आंखों को प्रभावित कर सकता है और दृष्टि संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
शिंगल्स और स्ट्रोक का क्या संबंध है?
कुछ मेडिकल रिसर्च में शिंगल्स होने के बाद स्ट्रोक के जोखिम में अस्थायी बढ़ोतरी देखी गई है। यह जोखिम संक्रमण के शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक संभावित कारण वायरस से जुड़ी रक्त वाहिकाओं में सूजन या अन्य vascular changes हो सकते हैं। हालांकि, शिंगल्स होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को स्ट्रोक जरूर होगा। उपलब्ध शोध मुख्य रूप से दोनों स्थितियों के बीच संबंध की ओर इशारा करता है।
खासकर आंख या चेहरे के आसपास होने वाले शिंगल्स को लेकर अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
हार्ट अटैक से भी जुड़ा है संक्रमण?
कुछ अध्ययनों में शिंगल्स के बाद हार्ट अटैक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के जोखिम में भी बढ़ोतरी का संबंध पाया गया है। संक्रमण के दौरान शरीर में होने वाली सूजन और अन्य जैविक प्रतिक्रियाएं संभावित कारणों में शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, इस संबंध को हार्ट अटैक का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, कोलेस्ट्रॉल और पहले से मौजूद हृदय संबंधी जोखिम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिंगल्स से बचाव कैसे करें?
शिंगल्स से बचाव के लिए वैक्सीन एक महत्वपूर्ण विकल्प है। विशेष रूप से अधिक उम्र के लोगों और कुछ जोखिम वाले व्यक्तियों में डॉक्टर से सलाह लेकर शिंगल्स वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को शिंगल्स हो गया है, तो प्रभावित फफोलों को ढककर रखना और उन्हें अनावश्यक रूप से छूने से बचना चाहिए। चिकनपॉक्स से संक्रमित न हुए या उसका टीका न लगवाने वाले संवेदनशील व्यक्ति सीधे संपर्क में आने पर वैरिसेला-जोस्टर वायरस के संपर्क में आ सकते हैं।
शिंगल्स के लक्षण दिखें तो क्या करें?
शरीर के किसी एक हिस्से में अचानक जलन, तेज दर्द, झुनझुनी और उसके बाद फफोले दिखाई दें तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना बेहतर है। शिंगल्स का उपचार शुरुआती चरण में शुरू करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
अगर दाने आंख, माथे या चेहरे के आसपास हों, दृष्टि में बदलाव आए, अत्यधिक सिरदर्द हो, कमजोरी या बोलने में परेशानी महसूस हो या सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण हों, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, हर दाद शिंगल्स नहीं होता, लेकिन एक तरफ दर्द और फफोलों वाला रैश इस संक्रमण का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और इलाज से जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

