फसल अवशेष प्रबंधन अभियान: श्योपुर किसान मेले में 150 किसानों को बीज बांटे गए। पराली प्रबंधन, सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से नरवाई न जलाने की जानकारी दी गई।
किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने और पराली जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में जिला स्तरीय किसान मेले का आयोजन किया गया। कलेक्टर शीला दाहिमा के मार्गदर्शन में निषादराज भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को नरवाई नहीं जलाने, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के बारे में जानकारी दी गई। मेले के दौरान 150 किसानों को नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल योजना के वैल्यू चेन क्लस्टर घटक के अंतर्गत बीज वितरित किए गए। साथ ही, कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई।
पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ता है असर
किसान मेले में जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डी बाई आदिवासी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्योपुर के एसडीएम गगन सिंह मीणा ने की। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई।
एसडीएम गगन सिंह मीणा ने किसानों से खेतों में पराली और नरवाई जलाने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कृषि यंत्रों की सहायता से किया जाना चाहिए। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है तथा बेहतर फसल उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार होती हैं।
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेंद्र जाट ने भी किसानों को फसल अवशेषों को खेत में ही वैज्ञानिक तरीकों से प्रबंधित करने की सलाह दी। उन्होंने जल, भूमि और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए किसानों को उपलब्ध कृषि तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीरज जाट ने कहा कि खेतों में पराली जलाने से मिट्टी के उपयोगी तत्वों और सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय में इसका असर भूमि की उर्वरता और कृषि उत्पादन पर भी पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की अपील की। साथ ही, कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान का लाभ उठाने की जानकारी दी।
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सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी
किसान मेले में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पराली प्रबंधन के आधुनिक तरीकों और विभिन्न कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति के अध्यक्ष गिरधारी लाल बैरवा ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह चौधरी ने भी किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए जागरूक किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, बड़ौदा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. कायम सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और किसान मेले के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उप संचालक कृषि आर.के. सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन की जरूरत तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की।
वैज्ञानिक डॉ. लाखन सिंह गुर्जर ने सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर और बायोवेस्ट डी-कंपोजर जैसे कृषि उपकरणों की उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि इन तकनीकों की मदद से फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है, जिससे भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है।
वैज्ञानिक डॉ. चंद्रभान सिंह ने किसानों को मिट्टी की प्रकृति और खेत की परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त कृषि यंत्रों का चयन करने की सलाह दी। सहायक कृषि यांत्रिकी नवीन कुमार ने फसल अवशेषों के प्रबंधन में कृषि उपकरणों के इस्तेमाल की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. यू.सी. शर्मा ने कहा कि फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
150 किसानों को वितरित किए गए बीज
किसान मेले में कृषि विभाग की ओर से नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल योजना के वैल्यू चेन क्लस्टर घटक के तहत 150 किसानों को बीज वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य किसानों को कृषि गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना और योजना के माध्यम से उन्हें लाभ पहुंचाना है।
वहीं, कृषि अभियांत्रिकी विभाग की प्रदर्शनी में पराली और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न कृषि उपकरण प्रदर्शित किए गए। किसानों को इन यंत्रों की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और उपलब्ध अनुदान संबंधी प्रावधानों के बारे में बताया गया।
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए किया प्रेरित
कार्यक्रम में कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और ग्रामीण आजीविका से जुड़े विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें उप संचालक पशुपालन डॉ. सुभाष बाबू दोहरे, सहायक मत्स्य अधिकारी वंदना गोयल, उद्यानिकी विभाग के सरदार सिंह प्रजापति और एनआरएलएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोहनकृष्ण मुदगल शामिल थे।
इसके अलावा जनप्रतिनिधियों, किसान संगठनों के पदाधिकारियों, विभिन्न राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
इस किसान मेले के माध्यम से किसानों को संदेश दिया गया कि पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से फसल अवशेषों का प्रबंधन करना अधिक उपयोगी है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने में सहायता मिल सकती है।

