राजनाथ सिंह ने DFDPDS-2026 लागू किया, जिससे रक्षा खरीद में तेजी आएगी और 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय शक्तियां सशस्त्र बलों को मिलीं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार की शुरुआत करते हुए डिफेंस फोर्सेज डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स स्कीम-2026 (DFDPDS-2026) को लागू किया। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सैन्य बलों को अधिक वित्तीय अधिकार देकर खरीद प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है।
इस नई नीति के तहत अब सशस्त्र बलों को प्रतिवर्ष 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की राजस्व खरीद के लिए विस्तारित वित्तीय शक्तियां प्रदान की गई हैं।
त्वरित निर्णय और बेहतर परिचालन क्षमता पर जोर
रक्षा मंत्री ने इस पहल को एक महत्वपूर्ण सुधार बताते हुए कहा कि इससे फील्ड कमांडरों को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे वे तेजी से निर्णय ले सकेंगे और सेना की परिचालन तैयारी में सुधार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह ढांचा सैन्य जरूरतों को समय पर पूरा करने में सहायक साबित होगा।
आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशीकरण को बढ़ावा
राजनाथ सिंह ने बताया कि इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना है। इसके तहत घरेलू उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई की भागीदारी को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से भारत में रक्षा निर्माण परियोजनाओं में तेजी आएगी और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी।
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वित्तीय शक्तियों में बड़ा विस्तार
नई व्यवस्था में सैन्य कमांडरों की वित्तीय शक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। तत्काल आवश्यकताओं के लिए उपलब्ध सीमा को भी बढ़ाया गया है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में तेजी से खरीद संभव होगी।
इसके अलावा संयुक्त सेवाओं की खरीद को बढ़ावा देने के लिए नए नियम जोड़े गए हैं, जिससे थल, वायु और नौसेना के बीच समन्वित खरीद प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।
पुराने ढांचे में बदलाव की आवश्यकता
सरकार के अनुसार, अंतिम बार 2021 में वित्तीय शक्तियों में संशोधन किया गया था। बढ़ते रक्षा बजट, परिचालन आवश्यकताओं और आधुनिकीकरण को देखते हुए इस नए सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।
यह नई व्यवस्था अक्टूबर 2025 में संशोधित रक्षा खरीद नियमों के साथ मिलकर रक्षा खरीद प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सुधारात्मक कदम का स्वागत किया।

