PM धन-धान्य कृषि योजना में 100 जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा। जानें 24,000 करोड़ के बजट, योजना के फायदे और कृषि विकास की पूरी जानकारी।
केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश के चयनित 100 जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और कृषि से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के लिए हर साल 24,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य उन जिलों में कृषि विकास को गति देना है, जहां उत्पादकता और कृषि सुविधाएं अपेक्षाकृत कमजोर हैं।
क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना?
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना केंद्र सरकार की ऐसी पहल है, जिसमें अलग-अलग मंत्रालयों की मौजूदा योजनाओं और कार्यक्रमों को आपस में जोड़कर चयनित जिलों में कृषि विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस योजना के तहत 11 मंत्रालयों से जुड़ी 36 से अधिक योजनाओं और कार्यक्रमों को समन्वित तरीके से लागू करने की योजना है। इससे किसानों को कृषि, सिंचाई, भंडारण, पशुपालन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध सरकारी सुविधाओं का बेहतर लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस योजना का लाभ सीधे किसी एक किसान को राशि के रूप में देने के बजाय चयनित जिलों में कृषि विकास गतिविधियों के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। इसके लिए देशभर से 100 जिलों का चयन किया जाएगा।
इन जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने, बेहतर सिंचाई सुविधा हासिल करने और फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
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PM धन-धान्य कृषि योजना के प्रमुख उद्देश्य
योजना के तहत कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। इनमें प्रमुख रूप से:
- किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना।
- टिकाऊ और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना।
- सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना।
- कृषि उपज के भंडारण की क्षमता बढ़ाना।
- आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना।
- कृषि उत्पादकता में सुधार करना।
- किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि से जुड़ी अतिरिक्त गतिविधियों को बढ़ावा देना।
हर साल 24,000 करोड़ रुपये का बजट
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए सरकार ने हर साल 24,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। योजना में 11 मंत्रालयों के सहयोग से 36 से अधिक कार्यक्रमों को एकीकृत तरीके से लागू करने की योजना है।
इसका उद्देश्य अलग-अलग सरकारी योजनाओं को अलग-अलग तरीके से लागू करने के बजाय चयनित जिलों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को एक साथ आगे बढ़ाना है।
किन जिलों को मिलेगा योजना का लाभ?
योजना के तहत देश के 100 जिलों को चुना जाएगा। जिलों का चयन कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रमुख संकेतकों के आधार पर किया जाएगा।
इसके लिए मुख्य रूप से तीन मानकों पर ध्यान दिया जाएगा:
1. कम कृषि उत्पादकता
ऐसे जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां विभिन्न फसलों का उत्पादन राष्ट्रीय या क्षेत्रीय औसत की तुलना में कम है।
2. मध्यम फसल तीव्रता
जिन जिलों में उपलब्ध कृषि भूमि का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है और फसल चक्र को बेहतर बनाने की गुंजाइश है, उन्हें भी चयन प्रक्रिया में महत्व दिया जाएगा।
3. कम कृषि ऋण पहुंच
ऐसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा जहां किसानों तक संस्थागत कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी सुविधाओं की पहुंच अपेक्षाकृत कम है।
राज्यों और जिलों के साथ मिलकर लागू होगी योजना
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को केंद्र सरकार अकेले लागू नहीं करेगी। इसके लिए राज्यों और संबंधित 11 मंत्रालयों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
योजना को जिला और ब्लॉक स्तर पर लागू करने के लिए निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अलावा तकनीकी साझेदारों और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों को भी योजना से जोड़ा जाएगा।
हर चयनित जिले की जरूरतों के अनुसार जिला स्तर का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक कृषि विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके।
खेती के साथ पशुपालन और अन्य गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना में केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा। किसानों की आमदनी के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के लिए बकरी पालन, मुर्गी पालन और अन्य कृषि-संबंधित गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आय के विकल्प मिल सकते हैं।
फसल कटाई के बाद भी किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कृषि उत्पादों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भंडारण और अन्य सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर छोटे कृषि आधारित उद्योग और प्रसंस्करण गतिविधियां विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

