Nifty Bear Market: निफ्टी में 13% गिरावट और निफ्टी 500 के करीब आधे शेयर 30% टूटे। जानें बियर मार्केट क्या है और क्या भारतीय शेयर बाजार में मंदी शुरू हो गई है।
Nifty Bear Market: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 13 फीसदी नीचे आ चुका है, जबकि व्यापक बाजार में कई शेयरों की स्थिति इससे भी ज्यादा कमजोर है। निफ्टी 500 में शामिल करीब आधे शेयर अपने उच्चतम स्तर से 30 फीसदी या उससे अधिक गिर चुके हैं।
बाजार में इस गिरावट के बाद निवेशकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारतीय शेयर बाजार में मंदी यानी बियर मार्केट की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि, किसी प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक में 20 फीसदी या उससे अधिक की गिरावट को आमतौर पर बियर मार्केट की तकनीकी सीमा माना जाता है।
निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
अगस्त की शुरुआत में निफ्टी ने करीब 24,774 अंक का उच्च स्तर छुआ था। इसके बाद बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा और सितंबर के दौरान भी कमजोरी बनी रही। अक्टूबर की शुरुआत में भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।
पिछले दो महीनों में निफ्टी में 7 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, छोटे और मझोले शेयरों समेत व्यापक बाजार में नुकसान कहीं ज्यादा देखने को मिला है।
निफ्टी 500 के करीब आधे शेयर 30% से ज्यादा नीचे
बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 500 में शामिल लगभग 50 फीसदी शेयर अपने उच्चतम स्तर से कम से कम 30 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे हैं।
बताए गए आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी 500 के 500 शेयरों में से करीब 252 शेयर अपने पीक स्तर से 30 फीसदी या उससे ज्यादा टूट चुके हैं। इससे साफ होता है कि इंडेक्स की तुलना में व्यक्तिगत शेयरों में गिरावट का असर काफी व्यापक है।
इसी स्थिति को बाजार के कुछ विश्लेषणों में अनौपचारिक रूप से ‘हिडन बियर मार्केट’ कहा जा रहा है। हालांकि, यह शेयर बाजार का कोई आधिकारिक वर्गीकरण नहीं है।
कब शुरू माना जाता है बियर मार्केट?
आमतौर पर किसी प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक के हालिया उच्चतम स्तर से 20 फीसदी या उससे अधिक गिरने पर उसे बियर मार्केट कहा जाता है।
यदि निफ्टी के करीब 26,325 के रिकॉर्ड हाई को आधार माना जाए, तो 20 फीसदी की गिरावट के बाद इसका स्तर लगभग 21,060 अंक होगा। फिलहाल निफ्टी में करीब 13 फीसदी की गिरावट है, इसलिए यह तकनीकी 20 फीसदी सीमा से नीचे नहीं आया है।
इसका मतलब यह है कि कई शेयरों में बड़ी गिरावट के बावजूद पूरे बेंचमार्क इंडेक्स को तकनीकी रूप से बियर मार्केट में कहना अलग स्थिति है।
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बड़े शेयरों में भी आई भारी गिरावट
इस गिरावट के दौर में कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक:
- रिलायंस इंडस्ट्रीज: करीब 25 फीसदी गिरावट
- एचडीएफसी बैंक: करीब 27 फीसदी गिरावट
- एचयूएल: करीब 20 फीसदी गिरावट
- टीसीएस: करीब 35 फीसदी गिरावट
- इंफोसिस: करीब 37 फीसदी गिरावट
- मारुति: करीब 30 फीसदी गिरावट
- हैवेल्स इंडिया: करीब 27 फीसदी गिरावट
इन आंकड़ों से पता चलता है कि बाजार में कमजोरी केवल छोटे शेयरों तक सीमित नहीं है। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी महत्वपूर्ण करेक्शन देखने को मिला है।
200-दिन का SMA क्यों है अहम?
शेयर बाजार में लंबी अवधि के रुझान को समझने के लिए 200-Day Simple Moving Average यानी 200-दिन का सरल मूविंग एवरेज एक महत्वपूर्ण तकनीकी संकेतक माना जाता है।
जब बड़ी संख्या में शेयर अपने 200-दिन के औसत स्तर से नीचे कारोबार करने लगते हैं, तो इसे बाजार में व्यापक कमजोरी के संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, केवल इस आधार पर पूरे बाजार को बियर मार्केट घोषित नहीं किया जा सकता।
कुछ सेक्टरों ने संभाला निफ्टी
निफ्टी में गिरावट के बावजूद कुछ प्रमुख क्षेत्रों ने इंडेक्स को सहारा दिया है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो और मेटल से जुड़े शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिली है।
इसके विपरीत आईटी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों के कई शेयरों पर ज्यादा दबाव रहा है। यही सेक्टोरल अंतर निफ्टी और व्यक्तिगत शेयरों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर पैदा कर रहा है।
क्या बाजार में सच में आ गई है मंदी?
मौजूदा आंकड़ों में कई शेयरों की कीमतों में बड़ी गिरावट जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन निफ्टी अभी अपने रिकॉर्ड हाई से 20 फीसदी नीचे नहीं आया है। इसलिए तकनीकी परिभाषा के आधार पर पूरे बाजार को बियर मार्केट कहना अभी उचित नहीं होगा।
निवेशकों के लिए केवल निफ्टी की चाल देखने के बजाय व्यापक बाजार, अलग-अलग सेक्टर, 200-दिन के मूविंग एवरेज और व्यक्तिगत शेयरों के प्रदर्शन पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण है। बाजार की आगे की दिशा घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों और अन्य आर्थिक कारकों से भी प्रभावित हो सकती है।

