इंदौर में 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोया उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, निवेश, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।
मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश के नए अवसर विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने सोयाबीन को किसानों की आर्थिक स्थिति, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) द्वारा आयोजित दो दिवसीय 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सोयाबीन उद्योग में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभिन्न कंपनियों और उनके प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया।
देश के सोयाबीन उत्पादन में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश की प्रमुख कृषि उपज उत्पादक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। सोयाबीन उत्पादन में भी राज्य का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने मालवा क्षेत्र को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम और अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्य सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार करने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, सोयाबीन क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों और संस्थानों का सम्मान उनके योगदान को पहचान देने के साथ उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है।
खाद्य प्रसंस्करण से किसानों को मिल सकता है बेहतर मूल्य
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार से कृषि उत्पादों के भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
सोयाबीन की प्रोसेसिंग और उससे बनने वाले उत्पादों के विविधीकरण पर ध्यान देने से किसानों को बाजार के नए अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ ही खाद्य तेल उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन केवल एक कृषि फसल नहीं है, बल्कि यह खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और बाजार विस्तार के माध्यम से भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को गति दी जा सकती है।
मध्यप्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए काम कर रही है। निवेशकों के साथ संवाद और औद्योगिक कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिजली, भूमि, जल और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता मध्यप्रदेश को उद्योगों के लिए आकर्षक बनाती है। अलग-अलग क्षेत्रों की औद्योगिक क्षमताओं को सामने लाने के लिए राज्य में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की जानकारी सरकार ने दी है। राज्य में निवेश प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को जोड़ने वाले औद्योगिक कॉरिडोर की घोषणा की गई है। इस पहल से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
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किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण पर सरकार का फोकस
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार भी किसान कल्याण वर्ष के माध्यम से कृषि क्षेत्र और किसानों से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए कृषि और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार का लक्ष्य उपलब्ध प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके विकास की गति बढ़ाना और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना है।
9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में 500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित इस सम्मेलन की थीम ‘आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन’ रखी गई। कार्यक्रम में देश और विदेश से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत के सदस्य, उद्यमी और प्रगतिशील किसान शामिल रहे।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग की भावी संभावनाओं पर चर्चा करना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उद्योग की स्थिति मजबूत करने के उपाय तलाशना था।
सम्मेलन में सोयाबीन उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, उत्पादों की गुणवत्ता, घरेलू बाजार, निर्यात और खाद्य तेल की उपलब्धता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस तरह के आयोजन कृषि वैज्ञानिकों, किसानों, सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।
सोया उद्योग में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कंपनियां सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोयाबीन के विनिर्माण, निर्यात, प्रसंस्करण, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड तेल के विपणन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कंपनियों के लगभग 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में SOPA के चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताते हुए किसानों के हित में राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
गोयनका ने भावांतर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को बाजार मूल्य और निर्धारित आधार मूल्य के बीच अंतर की राशि उपलब्ध कराने की पहल उनके हित में महत्वपूर्ण है। उन्होंने सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के सहयोग को भी अहम बताया।
कार्यक्रम के समापन पर SOPA के चेयरमैन नरेश गोयनका ने मुख्यमंत्री को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, SOPA के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्ण वीर, प्रो. विजय पाल शर्मा सहित कृषि, उद्योग और व्यापार जगत से जुड़े अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए सोया क्षेत्र महत्वपूर्ण
मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन और प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार किसानों की आय, औद्योगिक विकास और ग्रामीण रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कृषि उपज को स्थानीय स्तर पर संसाधित करने से उत्पादों का मूल्य बढ़ाने और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के अवसर मिल सकते हैं।
9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री द्वारा निवेश, तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार विस्तार पर दिया गया जोर इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ मिलने के लिए बेहतर बाजार मूल्य, प्रभावी विपणन व्यवस्था, प्रसंस्करण सुविधाओं और नीतिगत सहयोग की भूमिका अहम रहेगी।

