बेंगलुरु के किसान को बैंक में जमा कृषि आय पर मिले आयकर नोटिस से ITAT ने राहत दी। APMC बिल और जमीन के रिकॉर्ड से साबित हुआ नकदी का स्रोत।
बैंक खाते में खेती से हुई कमाई की नकदी जमा करने के बाद बेंगलुरु के एक किसान को आयकर विभाग के सवालों का सामना करना पड़ा। विभाग ने बैंक में जमा रकम के स्रोत पर संदेह जताते हुए इसे अघोषित आय मानने की कोशिश की। हालांकि, किसान ने कृषि उपज की बिक्री से जुड़े APMC बिल और जमीन के दस्तावेज पेश किए। मामले की सुनवाई के बाद बेंगलुरु ITAT ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया।
बैंक खाते में नकद जमा से शुरू हुआ आयकर विवाद
बेंगलुरु के किसान बालकृष्णमूर्ति रामचंद्रबाबू ने अपनी कृषि भूमि से होने वाली कमाई को बैंक खाते में जमा किया था। उन्होंने बताया कि वह अपनी जमीन पर फल और सब्जियों की खेती करते हैं और स्थानीय APMC के माध्यम से उपज बेचते हैं।
खेती से उपज बेचने के बाद मिली रकम को उन्होंने बैंक खाते में जमा कराया। इसी दौरान बैंक खाते में हुई नकद जमा और संपत्ति से जुड़े कुछ लेन-देन आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ गए।
विभाग को उनके ITR में संबंधित लेन-देन और कृषि आय का पर्याप्त विवरण नहीं मिला। इसके बाद नकद जमा रकम के स्रोत को लेकर किसान से जवाब मांगा गया।
किसान ने बताया कृषि आय का स्रोत
रामचंद्रबाबू ने आयकर अधिकारियों को बताया कि उनके पास करीब 4 एकड़ 4 गुंटा कृषि भूमि है। इस जमीन पर फल और सब्जियों की खेती की जाती है। फसल को APMC में बेचने से प्राप्त रकम ही बैंक खाते में जमा की गई थी।
किसान की दलील थी कि कृषि आय सामान्य तौर पर आयकर के दायरे से बाहर होती है। इसी वजह से जानकारी के अभाव में उन्होंने ITR में कृषि आय का अलग से उल्लेख नहीं किया था।
आयकर विभाग ने किन आधारों पर दावा नहीं माना?
आयकर अधिकारी ने किसान की दलील को स्वीकार नहीं किया। विभाग की ओर से कुछ अहम सवाल उठाए गए।
- जमीन के सरकारी रिकॉर्ड यानी RTC में उगाई गई फसल का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
- खेती में इस्तेमाल किए गए बीज, खाद और अन्य सामग्री से जुड़े पर्याप्त बिल या रसीदें किसान के पास नहीं थीं।
- पिछले और अगले वर्षों के ITR में भी कृषि आय का विवरण नहीं मिला।
- बैंक खाते में जमा नकदी के स्रोत को लेकर विभाग ने अतिरिक्त प्रमाणों की जरूरत बताई।
इन आधारों पर आयकर अधिकारी ने किसान के दावे को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद CIT(A) के स्तर पर भी किसान को राहत नहीं मिली।
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मामला ITAT बेंगलुरु पहुंचा
CIT(A) से राहत नहीं मिलने के बाद किसान ने मामले को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT), बेंगलुरु के सामने रखा।
सुनवाई के दौरान किसान की ओर से कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेज और APMC यार्ड की बिक्री रसीदें/बिल पेश किए गए। इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि बैंक खाते में जमा रकम खेती से हुई उपज की बिक्री से प्राप्त हुई थी।
APMC बिक्री बिल को ITAT ने माना महत्वपूर्ण
ITAT ने मामले में पेश किए गए रिकॉर्ड पर विचार किया। ट्रिब्यूनल ने पाया कि किसान ने APMC से संबंधित बिक्री दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। APMC एक मान्यता प्राप्त कृषि विपणन व्यवस्था है, इसलिए उसके रिकॉर्ड को केवल अनुमान के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ITAT ने यह भी देखा कि आयकर अधिकारी ने किसान के कृषि आय संबंधी दावे को गलत साबित करने के लिए कोई पर्याप्त स्वतंत्र जांच या ठोस विपरीत प्रमाण सामने नहीं रखा था।
ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि छोटे स्तर की खेती में बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों की हर खरीद का औपचारिक बिल उपलब्ध होना हमेशा जरूरी नहीं माना जा सकता।
ITR में कृषि आय नहीं बताने पर भी मिली राहत
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि किसान ने अपने ITR में कृषि आय का उल्लेख नहीं किया था। ITAT ने इस चूक को देखते हुए यह नहीं माना कि बैंक में जमा पूरी रकम स्वतः अघोषित आय बन जाती है।
ट्रिब्यूनल के सामने APMC बिक्री बिल और कृषि भूमि से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद थे। इन दस्तावेजों को रकम के संभावित स्रोत से जोड़ते हुए ITAT ने आयकर विभाग के रुख पर सवाल उठाया।
धारा 69A के तहत नकदी को अघोषित आय मानने पर फैसला
आयकर विभाग ने बैंक खाते में जमा नकदी को आयकर अधिनियम की धारा 69A के तहत अघोषित आय मानने का आधार बनाया था। हालांकि, ITAT ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए किसान के पक्ष में फैसला दिया।
ट्रिब्यूनल के अनुसार, जब रकम के स्रोत को दर्शाने वाले प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध हों और विभाग की ओर से उनके विपरीत पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न किए गए हों, तो केवल ITR में कृषि आय का उल्लेख नहीं होने के आधार पर रकम को अघोषित आय मानना उचित नहीं है।
किसानों के लिए क्या सीख है?
यह मामला बताता है कि कृषि उपज बेचने और उससे प्राप्त रकम को बैंक में जमा करने वाले किसानों के लिए बिक्री बिल, APMC रिकॉर्ड, जमीन के दस्तावेज और अन्य उपलब्ध प्रमाण संभालकर रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, हर आयकर मामले के तथ्य अलग होते हैं और किसी एक ITAT फैसले को सभी मामलों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। आयकर नोटिस मिलने पर संबंधित दस्तावेजों के साथ मामले की परिस्थितियों के अनुसार विशेषज्ञ सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

