हरियाणा के धार्मिक स्थलों पर नया कचरा प्रबंधन मॉडल लागू होगा। 500 मीटर बफर जोन, IoT स्मार्ट डस्टबिन और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन किया जाएगा।
हरियाणा के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर कचरा प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था तैयार की गई है। राज्य सरकार अब मेलों या त्योहारों के दौरान होने वाली अस्थायी सफाई व्यवस्था के बजाय ऐसे स्थानों के लिए स्थायी, तकनीक आधारित और स्थल-विशेष सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने की तैयारी में है। पहले चरण में गुरुग्राम का श्री माता शीतला देवी मंदिर, पंचकूला का श्री मनसा देवी मंदिर और कुरुक्षेत्र का ब्रह्म सरोवर शामिल किए गए हैं।
हर धार्मिक स्थल का बनेगा अलग वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल
नई रणनीति के तहत संबंधित शहरी निकाय प्रत्येक स्थल का विस्तृत सर्वे करेगा। इसमें सालभर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या, पीक सीजन में फुटफॉल और सबसे अधिक भीड़ वाले दिनों का आंकड़ा जुटाया जाएगा।
इसके साथ कम से कम सात दिनों का वेस्ट ऑडिट भी किया जाएगा। इन जानकारियों के आधार पर स्थानीय और जिला स्तर पर डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा, जिसे नए आकलन के बाद अपडेट किया जाएगा।
स्मार्ट डस्टबिन से मिलेगी कचरे की रियल-टाइम जानकारी
प्रस्तावित मॉडल में IoT आधारित स्मार्ट डस्टबिन लगाए जाएंगे। इनमें लगे सेंसर कूड़ेदान के भरने की स्थिति की जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध करा सकेंगे। कुछ स्मार्ट डिब्बों में सेंसर आधारित ढक्कन खोलने की सुविधा भी प्रस्तावित है।
इसके अलावा जहां बार-बार कचरा जमा होता है, ऐसे स्थानों की पहचान कर उन्हें जियो-टैग किया जाएगा। इससे सफाई एजेंसियों को कचरा उठाने के लिए प्राथमिकता वाले स्थानों की जानकारी मिल सकेगी।
500 मीटर के दायरे में नहीं होगा खुला कचरा संग्रह
हर चयनित धार्मिक या पर्यटन स्थल को मुख्य परिसर के साथ 500 मीटर के बफर जोन में बांटने की योजना है। इसमें आने-जाने की सड़कें, पार्किंग क्षेत्र, वेंडर जोन और कचरा ले जाने वाले निर्धारित रास्ते भी शामिल होंगे।
मुख्य मार्गों पर करीब हर 50 मीटर और श्रद्धालुओं की कतार वाले कॉरिडोर में हर 25 मीटर पर चार तरह के कूड़ेदान लगाए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। चार-स्ट्रीम कलेक्शन स्टेशनों पर कचरे को ढककर रखने की सुविधा होगी। बफर जोन में खुले में कचरा संग्रह करने की अनुमति नहीं होगी।
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पीक सीजन में बढ़ाए जाएंगे सफाई संसाधन
त्योहारों, मेलों और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए संबंधित स्थलों पर अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों और विशेष कचरा संग्रहण वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।
फूलों से निकलने वाले कचरे के लिए भी अलग प्रबंधन व्यवस्था रखी जाएगी। प्रस्तावित नियमों के अनुसार फूलों के कचरे को जलाशयों या दूसरे जलस्रोतों में डालने पर रोक रहेगी।
प्रसाद और फूल की दुकानों पर भी रहेगी निगरानी
500 मीटर के दायरे में आने वाले भंडारे, प्रसाद की दुकानें, फूल विक्रेता, धर्मशालाएं, होटल और ढाबों को बल्क वेस्ट जनरेटर के तौर पर चिह्नित करने की योजना है।
ऐसे प्रतिष्ठानों के कचरा उत्पादन और निपटान की व्यवस्था को भी नए सिस्टम का हिस्सा बनाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ी है योजना
शहरी निकाय विभाग की रणनीति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर ठोस कचरा प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े निर्देशों के अनुपालन से जोड़ा गया है। इसके तहत राज्यों को प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की पहचान कर वहां विशेष कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए थे।
हरियाणा के शहरी निकाय विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर सफाई को केवल मेलों तक सीमित रखने के बजाय स्थायी, तकनीक समर्थित और लगातार मॉनिटर किए जाने वाले सिस्टम में बदलना है।
तीन प्रमुख स्थलों से होगी शुरुआत
पहले चरण में जिन तीन स्थानों को शामिल किया गया है, वे हैं:
- श्री माता शीतला देवी मंदिर, गुरुग्राम
- श्री मनसा देवी मंदिर, पंचकूला
- ब्रह्म सरोवर, थानेसर, कुरुक्षेत्र
जरूरत और शुरुआती अनुभव के आधार पर इस मॉडल को आगे राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक, पर्यटन, ऐतिहासिक स्थलों, पवित्र जलाशयों और बड़े मेलों वाले क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है।

