बदलते मौसम में तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द डेंगू के संकेत हो सकते हैं। जानें डेंगू के प्रमुख लक्षण, बचाव के आसान उपाय और कब डॉक्टर से संपर्क करें।
मानसून और बदलते मौसम के दौरान मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस समय डेंगू के मामलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर या मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दिल्ली में डेंगू के मामलों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऐसे में डेंगू के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
एडीज मच्छर के काटने से फैलता है डेंगू
डेंगू वायरस संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर संक्रमित व्यक्ति का खून चूसने के बाद वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता है।
एडीज मच्छर आमतौर पर घरों और आसपास मौजूद साफ, जमा हुए पानी में पनपता है। कूलर, गमले, बाल्टी, टंकी या अन्य ऐसे स्थान जहां पानी कई दिनों तक जमा रहता है, वहां मच्छरों के प्रजनन का खतरा बढ़ सकता है।
एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहता है। संक्रमित मच्छर के काटने के कुछ दिनों बाद डेंगू के लक्षण सामने आ सकते हैं।
डेंगू के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
डेंगू में अचानक तेज बुखार आना प्रमुख लक्षणों में शामिल है। इसके साथ कई लोगों को सिरदर्द और मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द भी हो सकता है।
इसके अलावा निम्न लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं:
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- मतली या उल्टी
- पेट में दर्द
- अत्यधिक कमजोरी या थकान
- कुछ मामलों में त्वचा पर लाल चकत्ते
अगर बुखार के साथ ऐसे लक्षण लगातार बने रहें या स्थिति बिगड़ती महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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डेंगू की आशंका में खुद से दवा न लें
डेंगू के लक्षण कई दूसरी वायरल बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से डेंगू की पुष्टि करना सही नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।
बुखार होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयां लेना भी उचित नहीं है। विशेष रूप से ऐसी दवाओं से बचना चाहिए जो डेंगू की स्थिति में रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं। दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।
प्लेटलेट्स कम होना हमेशा गंभीर स्थिति का संकेत नहीं
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट काउंट के आधार पर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जाती। मरीज की पूरी स्थिति और डॉक्टर की निगरानी अधिक महत्वपूर्ण होती है।
डेंगू में पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना उपचार का अहम हिस्सा है। पानी, ओआरएस और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जा सकती है।
पपीते के पत्तों के जूस को प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय के तौर पर बताया जाता है, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसे डॉक्टर के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
डेंगू से बचाव के लिए क्या करें?
डेंगू से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने और उनके पनपने की जगहों को कम करना है।
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर और पानी के कंटेनर नियमित रूप से साफ करें।
- गमलों और अन्य बर्तनों में जमा पानी खाली करें।
- दिन के समय भी मच्छर भगाने वाले उपायों का इस्तेमाल करें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली का इस्तेमाल करें।
बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
बदलते मौसम में बुखार को सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है। खासकर तेज बुखार के साथ लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

