छिंदवाड़ा के किसान दुर्गेश मंगरोले ने गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती से प्रति एकड़ 6 क्विंटल उत्पादन लिया। अब लहसुन लगाने की तैयारी है।
खेती में नई तकनीकों को अपनाकर और उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करके किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के नए अवसर तलाश सकते हैं। इसका उदाहरण छिंदवाड़ा जिले के ग्राम दिलावर मोहगांव के किसान दुर्गेश मंगरोले ने पेश किया है। उन्होंने गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती करके एक ही खेत से दो फसलों का उत्पादन प्राप्त किया। इस प्रयोग से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6 क्विंटल सोयाबीन की उपज मिली है। अब वे इसी खेत में लहसुन की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं।
किसान दुर्गेश मंगरोले का यह प्रयोग फसल विविधीकरण और खेती में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक नई पहल है। इससे दूसरे किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है।
गन्ने के बीच सोयाबीन की पांच कतारें बोकर किया प्रयोग
किसान दुर्गेश मंगरोले ने अपने खेत में गन्ने की फसल लगाते समय कतारों के बीच 9 फीट की दूरी रखी। इस खाली जगह का उपयोग करते हुए उन्होंने सोयाबीन की पांच कतारों की बुवाई की। इस तरह उन्होंने एक ही खेत में मुख्य फसल गन्ने के साथ सोयाबीन का उत्पादन लेने का प्रयास किया।
इस अंतरवर्तीय खेती से उन्हें करीब 6 क्विंटल प्रति एकड़ सोयाबीन की उपज प्राप्त हुई। इससे खेत की उपलब्ध जगह का अतिरिक्त उपयोग संभव हुआ और गन्ने के साथ दूसरी फसल लेने का अवसर मिला।
उनका यह प्रयोग दर्शाता है कि फसलों का उचित संयोजन करके किसान अपनी खेती में विविधता ला सकते हैं। हालांकि, ऐसी खेती अपनाने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी, फसलों की अवधि और कृषि प्रबंधन की जरूरतों का आकलन करना जरूरी है।
सोयाबीन के बाद अब उसी खेत में लगाएंगे लहसुन
गन्ने और सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती के बाद दुर्गेश मंगरोले अब उसी खेत में लहसुन लगाने की तैयारी कर रहे हैं। अलग-अलग फसलों को अपनाने की उनकी योजना का उद्देश्य उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करना और खेती में नए विकल्प तलाशना है।
फसल विविधीकरण से किसानों को अपनी भूमि, मौसम और संसाधनों के अनुसार खेती की योजना बनाने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही किसी एक फसल पर पूरी तरह निर्भर रहने से जुड़े जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, एक ही खेत में अलग-अलग फसलें लेने की सफलता फसलों के चयन, बुवाई के समय, सिंचाई, पोषक तत्वों की उपलब्धता और वैज्ञानिक प्रबंधन पर निर्भर करती है।
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कृषि अधिकारियों ने खेत का निरीक्षण कर देखा नवाचार
छिंदवाड़ा जिले में आधुनिक कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा किसानों के प्रयोगों का अवलोकन किया जा रहा है। इसी क्रम में उप संचालक कृषि मोरिस नाथ और परियोजना संचालक आत्मा धीरज ठाकुर ने किसान दुर्गेश मंगरोले के खेत का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती के प्रयोग को देखा। इस दौरान खेती में उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने और विभिन्न फसलों के संयोजन की संभावनाओं को समझने पर ध्यान दिया गया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उचित फसल संयोजन और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर अंतरवर्तीय प्रणाली भूमि की उपयोगिता बढ़ाने तथा अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त करने का विकल्प बन सकती है।
अंतरवर्तीय खेती में इन बातों का रखें ध्यान
गन्ने के साथ सोयाबीन जैसी अंतरवर्तीय खेती अपनाने वाले किसानों के लिए फसल प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है। बेहतर परिणामों के लिए कुछ प्रमुख बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- फसलों के बीच उचित दूरी: दोनों फसलों की वृद्धि और जरूरतों के अनुसार कतारों की दूरी तय करें।
- सिंचाई प्रबंधन: फसलों की आवश्यकताओं के अनुसार पानी का उपयोग करें, ताकि किसी एक फसल की जरूरत दूसरी पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले।
- पोषक तत्व प्रबंधन: मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
- समय पर बुवाई: स्थानीय मौसम और फसलों की अवधि को ध्यान में रखकर बुवाई की योजना बनाएं।
- फसल स्वास्थ्य की निगरानी: कीटों, बीमारियों और पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों पर नियमित नजर रखें।
इन उपायों से किसानों को अंतरवर्तीय खेती की योजना बेहतर तरीके से बनाने में सहायता मिल सकती है।
छिंदवाड़ा के किसानों के लिए प्रेरणादायक पहल
दिलावर मोहगांव के किसान दुर्गेश मंगरोले ने गन्ने के साथ सोयाबीन की खेती करके फसल विविधीकरण का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रति एकड़ लगभग 6 क्विंटल सोयाबीन का उत्पादन प्राप्त करने के बाद अब उनका अगला कदम उसी खेत में लहसुन की फसल लगाने की तैयारी करना है।
खेती में इस तरह के प्रयोग किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। हालांकि, दूसरे किसानों को ऐसी तकनीक अपनाने से पहले अपने क्षेत्र की परिस्थितियों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इसकी उपयुक्तता का आकलन करना चाहिए।

