छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को पौधे, बोरवेल, ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण संरचनाओं पर नियमानुसार अनुदान मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने और खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उद्यानिकी विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम के तहत किसानों को पौधे, टपक सिंचाई प्रणाली, बोरवेल, पंपसेट और जल संरक्षण संरचनाओं के लिए नियमानुसार अनुदान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य खेती का रकबा बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी में सुधार करना और खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना है।
इसी सिलसिले में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहायक आयुक्त (ऑयल पाम) कृष्णकांत दुबे ने छत्तीसगढ़ के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों और राज्य सरकार से अनुबंधित ऑयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने, गुणवत्तापूर्ण पौधों की आपूर्ति और उपज की खरीदी व भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
अगले साल ऑयल पाम की खेती का लक्ष्य दोगुना करने की तैयारी
समीक्षा बैठक में सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ऑयल पाम की खेती का निरीक्षण करने के दौरान सामने आए अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में ऑयल पाम के खेती क्षेत्र का विस्तार करने पर जोर दे रही है। इसके तहत अगले वर्ष खेती का लक्ष्य दोगुना करने की तैयारी है।
उन्होंने जिला स्तर के अधिकारियों को समय रहते कार्ययोजना तैयार करने और अधिक से अधिक किसानों को इस खेती से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों को खेती की तकनीक, सरकारी सहायता और योजना की पात्रता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालक लोकेश कुमार ने कहा कि ऑयल पाम योजना की सफलता के लिए केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है। पौधों का उचित रखरखाव, बेहतर उत्पादन और किसानों को समय पर आर्थिक लाभ मिलना भी जरूरी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों, किसानों और प्रसंस्करण कंपनियों के बीच समन्वय मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
पौधे, बोरवेल और ड्रिप सिंचाई पर मिलेगी सरकारी सहायता
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम के अंतर्गत किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुसार कई कृषि सुविधाओं के लिए अनुदान भी दिया जाता है।
योजना के तहत इन सुविधाओं पर सहायता का प्रावधान है:
- ऑयल पाम के पौधे: किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराना।
- ड्रिप सिंचाई प्रणाली: पानी का बेहतर उपयोग करने के लिए टपक सिंचाई पर अनुदान।
- बोरवेल और पंपसेट: सिंचाई के लिए आवश्यक जलस्रोत एवं उपकरणों पर नियमानुसार सहायता।
- जल संरक्षण संरचनाएं: खेतों में पानी की उपलब्धता और संरक्षण से जुड़ी सुविधाओं के लिए अनुदान।
- वर्मी कम्पोस्ट पिट: जैविक खाद तैयार करने के लिए सहायता।
- वायर मेश: पौधों को चूहों और अन्य कारणों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए निर्धारित सहायता।
सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने संबंधित कंपनियों को निर्देश दिए कि किसानों तक अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे समय पर पहुंचाए जाएं। साथ ही, पौधरोपण से लेकर पौधों के रखरखाव तक किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाए।
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किसानों को अनुदान और फसल का भुगतान समय पर देने के निर्देश
बैठक में ऑयल पाम उत्पादकों को मिलने वाले अनुदान और उनकी उपज के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया। उद्यानिकी संचालक लोकेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र किसानों को अनुदान की राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही किसानों द्वारा उत्पादित फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) की निर्धारित समय पर खरीदी और भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। ऑयल पाम की उपज की समय पर खरीद और राशि मिलने से किसानों को आर्थिक प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
योजना की निगरानी बेहतर बनाने के लिए ऑयल पाम की खेती करने वाले किसानों का विवरण कृषि मैपर पोर्टल पर दर्ज करना भी अनिवार्य किया गया है। इससे योजना की प्रगति और लाभार्थियों से संबंधित जानकारी अपडेट रखने में मदद मिलेगी।
खराब पौधों की जगह मिलेंगे नए पौधे
समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न जिलों के अधिकारियों और किसानों से ऑनलाइन संवाद भी किया गया। किसानों ने बताया कि प्रतिकूल मौसम, प्राकृतिक कारणों और सिंचाई के लिए पर्याप्त जलस्रोत उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन समस्याओं को देखते हुए संबंधित कंपनियों को खराब हो चुके पौधों के स्थान पर उच्च गुणवत्ता वाले नए पौधे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। किसानों को बोरवेल और अन्य सिंचाई सुविधाओं के लिए उपलब्ध अनुदान की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल और सिंचाई संरचनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया में अन्य विभागों की भागीदारी के कारण कई बार अनुदान वितरण में देरी होती है। इस पर संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करके सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करने के निर्देश दिए गए।
ऑयल पाम कंपनियों को अपनी नर्सरी विकसित करने के निर्देश
सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने ऑयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं और सुझावों पर चर्चा की। उन्होंने कंपनियों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपनी नर्सरी विकसित करने और पौधों के उचित रखरखाव की व्यवस्था बनाने को कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि नर्सरी स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने का प्रावधान है। इससे किसानों को समय पर पौधे उपलब्ध कराने और खेती के विस्तार में मदद मिल सकती है।
बैठक में राजनांदगांव जिले में ऑयल पाम योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई। अन्य जिलों को भी इसी तरह बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इस अवसर पर संयुक्त संचालक उद्यान नीरज शाहा, प्रभारी संयुक्त संचालक सुरेश कुमार ठाकुर, विभिन्न जिलों के उद्यानिकी अधिकारी, किसान और ऑयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

