लक्षद्वीप के मिनिकॉय में FAD तकनीक से टूना मछुआरों को मछलियां खोजने में मदद मिल रही है। ईंधन खर्च में 30-50% तक बचत की जानकारी सामने आई है।
FAD तकनीक: लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप में आधुनिक मत्स्य तकनीक पारंपरिक मछुआरों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। समुद्र में मछलियों को एकत्र करने के लिए लगाया गया फिश एग्रीगेटिंग डिवाइस (FAD) टूना मछुआरों को मछलियों के झुंड खोजने में मदद कर रहा है। इससे मछली पकड़ने में लगने वाला समय कम हुआ है और मछुआरों के ईंधन खर्च में 30 से 50 प्रतिशत तक की बचत दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह उपकरण 18 जनवरी 2026 को मिनिकॉय द्वीप के तट से लगभग 8.5 समुद्री मील दूर स्थापित किया गया था। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIARI) के मिनिकॉय क्षेत्रीय केंद्र ने मलिकु मासवेरिंगे जमात यानी मलिकु फिशरमेन सोसाइटी के सहयोग से लगाया है।
क्या है FAD तकनीक और कैसे करती है काम?
फिश एग्रीगेटिंग डिवाइस (FAD) समुद्र में लगाया जाने वाला एक विशेष उपकरण है, जो टूना जैसी मछलियों के समूहों को एक स्थान के आसपास एकत्र होने में मदद करता है। इससे मछुआरों को समुद्र में दूर-दूर तक मछलियों के झुंड तलाशने में कम समय लगाना पड़ता है।
मिनिकॉय के मछुआरे पारंपरिक रूप से पोल-एंड-लाइन पद्धति से स्किपजैक और येलोफिन टूना पकड़ते हैं। इस तरीके में मछलियों के समूह का पता लगाने के लिए कई घंटे समुद्र में बिताने पड़ सकते हैं। FAD की मदद से मछुआरों को मछली पकड़ने के संभावित स्थान तक पहुंचने में आसानी हो रही है।
इस तकनीक से खासकर छोटी नावों से मछली पकड़ने वाले लोगों को लाभ मिल सकता है, क्योंकि उनके लिए ईंधन की बचत सीधे परिचालन लागत कम करने में मदद करती है।
ईंधन खर्च में 30 से 50 प्रतिशत तक की बचत
मछुआरों के अनुसार, FAD के आसपास मछलियों के समूह मिलने से उनकी खोज में लगने वाला समय घटा है। इसके परिणामस्वरूप नावों को समुद्र में कम दूरी तय करनी पड़ती है और डीजल पर होने वाला खर्च भी कम हो रहा है।
ईंधन की बचत होने से प्रत्येक मछली पकड़ने की यात्रा की लागत घट सकती है। साथ ही, कम समय में मछलियों तक पहुंचने से मछुआरों को अपनी यात्राओं की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।
हालांकि, वास्तविक बचत नाव के आकार, मौसम, समुद्री परिस्थितियों और मछलियों की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
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मिनिकॉय में टूना मछली की लैंडिंग में लगभग 31% वृद्धि
उपलब्ध संस्थागत आंकड़ों के अनुसार, मिनिकॉय द्वीप में टूना मछली की कुल लैंडिंग में वर्ष 2025 से 2026 के बीच उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- वर्ष 2025: 3,289.85 टन टूना मछली
- वर्ष 2026: 4,304.44 टन टूना मछली
- कुल वृद्धि: लगभग 31 प्रतिशत
यह आंकड़ा पूरे मिनिकॉय द्वीप की टूना लैंडिंग से संबंधित है। इसलिए इस बढ़ोतरी का पूरा श्रेय केवल एक FAD उपकरण को देना उचित नहीं होगा। फिर भी, मछुआरों के अनुभव बताते हैं कि उपकरण के आसपास मछलियों की उपलब्धता से मछली पकड़ने की प्रक्रिया आसान हुई है।
टूना कारोबार को भी मिल सकता है आर्थिक लाभ
मछली उत्पादन में बढ़ोतरी का असर स्थानीय व्यापार और मछुआरा परिवारों की आय पर भी पड़ सकता है। यदि 150 रुपये प्रति किलोग्राम का औसत भाव मानकर गणना की जाए, तो 2025 की टूना लैंडिंग का अनुमानित मूल्य करीब 49.35 करोड़ रुपये और 2026 का मूल्य लगभग 64.57 करोड़ रुपये बैठता है।
ये आंकड़े केवल अनुमानित बाजार मूल्य दर्शाते हैं। वास्तविक बिक्री से होने वाली आय मछली की गुणवत्ता, बाजार भाव, परिवहन लागत और अन्य व्यावसायिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
कम ईंधन खर्च और बेहतर मछली उपलब्धता से मछुआरों के लिए लाभ की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, वास्तविक आर्थिक लाभ का आकलन करने के लिए परिचालन खर्च और बिक्री से प्राप्त आय को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
पारंपरिक मछुआरों के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा
मिनिकॉय में मछली पकड़ना लंबे समय से स्थानीय परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन रहा है। यहां के मछुआरे समुद्री पक्षियों की गतिविधियों, लहरों के रंग और अन्य प्राकृतिक संकेतों के आधार पर टूना के झुंडों का पता लगाते रहे हैं।
FAD तकनीक इस पारंपरिक अनुभव का विकल्प बनने के बजाय मछलियों की खोज को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकती है। इससे समुद्र में अनावश्यक चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है और मछुआरों को समय तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलता है।
लक्षद्वीप के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार की संभावना
ICAR-CIARI के वैज्ञानिकों और मलिकु फिशरमेन सोसाइटी के सहयोग से स्थापित इस उपकरण के शुरुआती अनुभवों को उत्साहजनक बताया गया है। इसी आधार पर लक्षद्वीप के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी तकनीक अपनाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
यदि भविष्य में उचित वैज्ञानिक निगरानी और टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन के साथ इस तकनीक का विस्तार किया जाता है, तो इससे पारंपरिक मछुआरों को मछली खोजने में लगने वाला समय कम करने और परिचालन लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

