मंदसौर के धमनार, सेमलिया हीरा और नंदावता में 12 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में औषधीय फसलों की खेती हो रही है। जानें हर्बल क्लस्टर और ‘उपज से उद्यम’ अभियान की पूरी जानकारी।
किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि को व्यवसाय से जोड़ने के उद्देश्य से मंदसौर जिले में औषधीय फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘उपज से उद्यम’ अभियान के अंतर्गत धमनार, सेमलिया हीरा और नंदावता गांवों में हर्बल क्लस्टर विकसित किए गए हैं। इन क्लस्टरों में 12 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर विभिन्न औषधीय फसलों का उत्पादन किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को केवल खेती तक सीमित न रखते हुए प्रसंस्करण, पैकेजिंग और हर्बल उत्पादों के निर्माण जैसी गतिविधियों से जोड़ना है, ताकि कृषि उपज का मूल्य बढ़े और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के नए अवसर विकसित हों।
‘उपज से उद्यम’ अभियान से औषधीय खेती को बढ़ावा
मंदसौर जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित बैठक में हर्बल क्लस्टरों के विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि इन क्लस्टरों से जुड़े किसान अश्वगंधा, कालमेघ, चिया सीड, अकरकरा और चंद्रसूर सहित विभिन्न औषधीय फसलों की खेती कर रहे हैं।
योजना के तहत खेती की उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ उपज की छंटाई, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और पैकेजिंग पर भी काम किया जाएगा। इसके अलावा हर्बल उत्पाद और पाउडर तैयार करने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की योजना है।
इससे किसानों को कृषि उत्पादन के साथ मूल्यवर्धन और बाजार से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिल सकता है।
कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश
बैठक में कलेक्टर श्री दिव्यांक सिंह ने संबंधित अधिकारियों को हर्बल क्लस्टरों से जुड़े किसानों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सहयोग और प्रयास सुनिश्चित किए जाएं।
क्लस्टर के विकास पर ध्यान देने का उद्देश्य किसानों को औषधीय फसलों की खेती से लेकर उत्पाद निर्माण तक की प्रक्रिया से जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देने और कृषि आधारित उद्यम विकसित करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
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औषधीय फसलों से तैयार किए जाएंगे मूल्यवर्धित उत्पाद
हर्बल क्लस्टर विकास के तहत अलग-अलग औषधीय फसलों से विविध उत्पाद तैयार करने की योजना बनाई गई है। इससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर उपयोग और बाजार में नए उत्पाद उपलब्ध कराने के अवसर मिल सकते हैं।
प्रस्तावित उत्पादों में शामिल हैं:
- अश्वगंधा: चूर्ण, कैप्सूल, टैबलेट और स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद।
- तुलसी: हर्बल चाय, तुलसी ड्रॉप्स और सूखी पत्तियों के पैकेट।
- कालमेघ: पाउडर, टैबलेट और स्वरस।
- ईसबगोल: भूसी और पशु आहार से संबंधित उत्पाद।
- चिया सीड: आटा और तेल।
- अकरकरा: पाउडर और तेल।
- सफेद मूसली: चूर्ण, कैप्सूल, टैबलेट और तेल।
इन उत्पादों के निर्माण की दिशा में पहल से कच्ची उपज के बजाय प्रसंस्कृत उत्पादों के माध्यम से मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। हालांकि, उत्पाद निर्माण और विपणन के लिए आवश्यक गुणवत्ता मानकों तथा नियामकीय प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा।
किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा अवसर
औषधीय फसलों की खेती और उनसे जुड़े प्रसंस्करण कार्य किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित कर सकते हैं। हर्बल क्लस्टरों के माध्यम से किसान समूहों को एक साथ जोड़कर उत्पादन, उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
मंदसौर के धमनार, सेमलिया हीरा और नंदावता में विकसित ये क्लस्टर खेती को उद्यम से जोड़ने की पहल का हिस्सा हैं। ‘उपज से उद्यम’ अभियान के तहत इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जिले में औषधीय फसलों के उत्पादन और कृषि आधारित व्यवसायों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

