पीएम-अजय योजना के तहत 18,093 गांव आदर्श ग्राम घोषित हुए। जानें 1,730 करोड़ रुपये की सहायता, 785 छात्रावासों और अनुसूचित जाति विकास से जुड़ी अहम जानकारी।
पीएम-अजय योजना: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत देशभर में अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है। वहीं, राज्यों और जिलों को सामाजिक-आर्थिक विकास परियोजनाओं के लिए लगभग 1,730 करोड़ रुपये की सहायता जारी की गई है। इसके अलावा, योजना के तहत 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
पीएम-अजय योजना से 47 हजार से अधिक गांवों को मिला लाभ
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से संचालित प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाना और उन्हें विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के आदर्श ग्राम घटक के अंतर्गत देश के 47,200 से अधिक गांवों को शामिल किया गया है। इससे 47.79 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ मिल रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 8 सितंबर 2026 तक कुल 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम का दर्जा दिया जा चुका था। इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने, आवश्यक सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करने और ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत अब तक 46,944 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि गांवों के समग्र विकास के लिए 27,032 ग्राम विकास योजनाएं (VDP) तैयार की गई हैं।
पीएम-अजय के तीन प्रमुख घटक
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना को तीन प्रमुख हिस्सों में लागू किया जा रहा है। इनमें अनुसूचित जाति बहुल गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना, सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता उपलब्ध कराना और छात्रावासों का निर्माण एवं मरम्मत शामिल है।
आदर्श ग्राम पहल के तहत ऐसे गांवों का विकास किया जाता है, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इसका लक्ष्य लोगों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना, जीवन स्तर बेहतर बनाना और सामाजिक असमानताओं को कम करना है।
सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए 1,730 करोड़ रुपये जारी
पीएम-अजय के अनुदान सहायता घटक के माध्यम से राज्यों और जिलों को अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। इन परियोजनाओं में आजीविका के अवसर बढ़ाने, कौशल विकास को प्रोत्साहित करने और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच इस घटक के तहत राज्यों को सीधे लगभग 1,730 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस सहायता के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत और समूह लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण तथा आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों की आय बढ़ाना, रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करना है।
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छात्रावासों के निर्माण पर भी जोर, 785 भवन तैयार
पीएम-अजय के तहत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा हासिल करने में मदद देने के लिए छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत भी की जाती है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को इससे लाभ मिलता है, क्योंकि उन्हें पढ़ाई के दौरान रहने की सुविधा मिल सकती है।
सितंबर 2026 तक योजना के तहत कुल 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा किया जा चुका था। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लड़कियों और लड़कों के लिए प्रस्तावित दो छात्रावास परियोजनाओं को 61.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है। इन दोनों परियोजनाओं में कुल 264 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए शिक्षा तक पहुंच आसान बनाना और उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप से निगरानी होगी मजबूत
योजना के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए मंत्रालय ने पीएम-अजय पोर्टल और मोबाइल ऐप की शुरुआत की है। इनके जरिए योजना से संबंधित प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने और वास्तविक समय में निगरानी करने पर जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था से आवेदन और परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने, जानकारी उपलब्ध कराने तथा आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलती है। इससे योजना के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और विभिन्न स्तरों पर समन्वय बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
योजना के लिए फंड का आवंटन कैसे होता है?
पीएम-अजय पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना है। हालांकि, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जरूरत के अनुसार इसमें अतिरिक्त संसाधन भी लगा सकते हैं।
योजना के वित्तीय प्रावधानों के तहत चुने गए आदर्श गांवों में विकास संबंधी कमियों को दूर करने के लिए कुल फंड का 50 प्रतिशत तक इस्तेमाल किया जा सकता है। तकनीकी सहायता समूहों और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों की स्थापना तथा संचालन के लिए 5 प्रतिशत तक राशि निर्धारित है।
वहीं, छात्रावासों के निर्माण और मरम्मत के लिए 2 प्रतिशत तक फंड का प्रावधान है। शेष राशि राज्य और जिला स्तर की सामाजिक-आर्थिक विकास परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
अनुदान के आवंटन में संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की अनुसूचित जाति आबादी और अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) सहित वार्षिक योजना से जुड़े मानकों को ध्यान में रखा जाता है। विकास कार्य पूरे होने के बाद संबंधित अवसंरचना के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों या कार्यान्वयन एजेंसियों की होती है। छात्रावासों के रखरखाव के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी सहायता प्रदान की जाती है।
विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में योगदान
भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के तहत समावेशी विकास को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम-अजय इसी दिशा में अनुसूचित जाति समुदायों के लिए बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसर बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अवसंरचना तैयार करने, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के माध्यम से योजना का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचाना है। इससे अनुसूचित जाति समुदायों को सामाजिक और आर्थिक प्रगति में अधिक भागीदारी के अवसर मिल सकते हैं।

