किसान आर्थिक सहायता: पांढुर्ना में किसानों ने सूखा घोषित करने, 2 लाख रुपये की सहायता, कर्ज राहत, फसल बीमा भुगतान और भूली जलाशय के उचित मुआवजे सहित 10 मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
किसान आर्थिक सहायता: मध्य प्रदेश के पांढुर्ना जिले में किसानों ने सूखे की स्थिति, आर्थिक परेशानियों, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और वन्यजीवों से सुरक्षा सहित कई समस्याओं को लेकर आवाज उठाई है। किसानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर कार्यालय में सौंपा। इस दौरान पांढुर्ना विधायक निलेश उइके सहित आसपास के कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
किसानों ने कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ को ज्ञापन सौंपकर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने और प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत देने की मांग की। कलेक्टर ने किसानों को आश्वासन दिया कि ज्ञापन उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय, भोपाल भेजा जाएगा। वहां से प्राप्त होने वाले निर्देशों की जानकारी भी किसानों को दी जाएगी।
पांढुर्ना को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
किसानों का कहना है कि जिले में सूखे जैसी स्थिति के कारण कृषि कार्य और ग्रामीण आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने पांढुर्ना को सूखाग्रस्त घोषित करने के साथ प्रत्येक किसान को दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने और कर्ज से राहत प्रदान करने की मांग की।
ज्ञापन में फसल बीमा की राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें समय पर सरकारी सहायता मिलनी चाहिए।
खाद वितरण की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
किसानों ने खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था को बंद कर पहले की सरल प्रणाली फिर से शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए, ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय पर किसानों को परेशानी न हो।
इसके अलावा किसानों के बच्चों की शैक्षणिक फीस माफ करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। किसानों ने आर्थिक दबाव कम करने और परिवारों को राहत देने के लिए इन मांगों पर विचार करने की अपील की।
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पेयजल संकट और पशुओं के चारे की व्यवस्था पर जोर
ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या को देखते हुए किसानों ने गर्मी और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने की मांग की। उन्होंने पशुधन के लिए पर्याप्त चारा और पानी उपलब्ध कराने के साथ जरूरत पड़ने पर पशु शिविर स्थापित करने की मांग भी उठाई।
किसानों के अनुसार, सूखे जैसी परिस्थितियों में खेती के साथ पशुपालन पर भी असर पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और पशुओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
जंगली जानवरों से सुरक्षा और भूली जलाशय के मुआवजे का मुद्दा
ज्ञापन में वन्यजीवों के बढ़ते खतरे का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने ग्रामीणों और खेतों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
इसके साथ ही भूली जलाशय से प्रभावित किसानों को समान और न्यायसंगत मुआवजा देने की मांग रखी गई। किसानों ने कृषि को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालीन योजनाएं तैयार करने और खेती से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने पर भी जोर दिया।
विधायक निलेश उइके ने किया किसानों की मांगों का समर्थन
ज्ञापन सौंपने से पहले पांढुर्ना विधायक निलेश उइके ने किसानों को संबोधित करते हुए उनकी मांगों का समर्थन किया। इस दौरान किसानों ने महाराष्ट्र में सूखा घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य से सटे पांढुर्ना जिले में भी सूखे की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
किसानों ने दोनों क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार से राहत संबंधी निर्णय लेने की अपील की।
मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा किसानों का ज्ञापन
कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए किसानों को बताया कि उनकी मांगों को उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय, भोपाल भेजा जाएगा। संबंधित स्तर से निर्देश मिलने के बाद किसानों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
इस दौरान महेंद्र कोरडे, राहुल पठाड़े, किसान डोंगरे, राजेश भांडे, भीमराव देशमुख, रुपेश कसलीकर, नीरज दुबे, मंसाराम खोड़े, उमेश खोड़े, राहुल बेलखड़े, विनय डिगरसे, संदीप खोड़े, हरनाम सिंह सेंगर, प्रीतम खोड़े और रोशन कलम्बे सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।
किसानों ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं पर जल्द निर्णय लिया जाएगा और सूखे, पेयजल संकट, फसल नुकसान तथा अन्य कृषि संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

