ग्वालियर के किसान गजराज सिंह कुशवाह गुलाब की खेती से प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये से अधिक का लाभ कमा रहे हैं। जानिए उनकी सफलता की कहानी।
खेती में नई तकनीकों और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इसकी मिसाल ग्वालियर जिले के ग्राम भयापुरा निवासी किसान गजराज सिंह कुशवाह हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फूलों की खेती को अपनी आमदनी का प्रमुख जरिया बनाया है। कभी अपने पिता को कर्ज की चिंता से परेशान देखते हुए भविष्य को लेकर चिंतित रहने वाले गजराज सिंह आज गुलाब की खेती से प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये से अधिक का लाभ अर्जित कर रहे हैं।
उनकी इस सफलता के पीछे उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और आत्मा परियोजना से मिले तकनीकी मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी कहानी दूसरे किसानों के लिए भी खेती में नए विकल्प तलाशने की प्रेरणा देती है।
आत्मा परियोजना के प्रशिक्षण ने दिखाई उन्नत खेती की राह
गजराज सिंह कुशवाह बताते हैं कि बचपन से उन्होंने अपने पिता रमाजीलाल कुशवाह को खेती करते हुए और कर्ज की परेशानियों से जूझते देखा। परिवार की खेती में सहयोग करते हुए उन्होंने कृषि का अनुभव हासिल किया, लेकिन उनके मन में यह चिंता बनी रहती थी कि क्या खेती के सहारे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हो पाएगी।
इसी चिंता का समाधान तलाशने के लिए वह ग्वालियर स्थित आत्मा परियोजना कार्यालय पहुंचे, जो किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अंतर्गत कार्य करता है। यहां उन्हें खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाने और कमाई के नए अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसके बाद उन्होंने आत्मा परियोजना के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण से मिली जानकारी का उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी खेती में बदलाव करना शुरू किया और पारंपरिक फसलों के अलावा अधिक संभावनाओं वाली फसलों पर भी ध्यान दिया।
सरसों, गेहूं और चने से आगे बढ़कर शुरू की नगदी फसलों की खेती
शुरुआत में गजराज सिंह मुख्य रूप से सरसों, गेहूं और चने जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। बाद में उन्होंने खेती के तरीके में बदलाव करते हुए मेथी और मिर्च जैसी नगदी फसलों का उत्पादन शुरू किया। इससे उन्हें बेहतर आमदनी की संभावनाएं दिखाई देने लगीं।
इसके बाद उन्होंने आलू, बैंगन और पपीते की खेती को भी अपने कृषि कार्य में शामिल किया। अलग-अलग फसलों को अपनाने से उन्हें खेती में नए प्रयोग करने और आय के विविध स्रोत विकसित करने का अवसर मिला।
इसी दौरान आत्मा परियोजना के बीटीएम उदय आर्य और एटीएम आर.के. सिंह ने उन्हें लहसुन की उन्नत खेती के संबंध में तकनीकी जानकारी दी। मार्गदर्शन के आधार पर उन्होंने लहसुन का उत्पादन किया और एक बीघा जमीन से लगभग 50 हजार रुपये का लाभ हासिल किया।
लहसुन की खेती में मिली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों को समझने और खेती में नए प्रयोग करने की दिशा में अपने प्रयास जारी रखे।
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गुलाब की खेती बनी कमाई का बड़ा जरिया
लहसुन की खेती से अच्छा परिणाम मिलने के बाद गजराज सिंह ने अपनी कृषि गतिविधियों को और बेहतर बनाने के लिए तकनीकी जानकारी जुटाना शुरू किया। आत्मा परियोजना के अधिकारियों ने उन्हें विभिन्न कृषि गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए भ्रमण कराया।
इस दौरान उन्होंने गुलाब की खेती की तकनीकों को समझा और फूलों के उत्पादन की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में गुलाब की खेती शुरू करने का निर्णय लिया।
आज गजराज सिंह गुलाब की खेती से प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये से अधिक का लाभ अर्जित कर रहे हैं। उनके अनुभव से पता चलता है कि उचित प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किसान पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती जैसे विकल्प भी अपना सकते हैं।
हालांकि, गुलाब की खेती में वास्तविक मुनाफा उत्पादन लागत, फूलों की गुणवत्ता, बाजार भाव और बिक्री व्यवस्था पर निर्भर करता है।
8.80 हेक्टेयर जमीन पर उगा रहे कई तरह की फसलें
गजराज सिंह कुशवाह के पास कुल 8.80 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस जमीन पर वह गुलाब के साथ मिर्च, बैंगन, मेथी, आलू और पपीते जैसी विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।
अलग-अलग फसलों को खेती में शामिल करने से उन्होंने फसल विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनके कृषि कार्य में आए बदलाव का असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है। अब उनके परिवार को पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं और उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए आत्मा परियोजना की ओर से जिला स्तरीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। उन्हें पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
किसानों के लिए प्रेरणा बने गजराज सिंह कुशवाह
गजराज सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय आत्मा परियोजना के अधिकारियों से मिले प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और प्रोत्साहन को दिया। उनके अनुसार, खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों की जानकारी हासिल करना और उन्हें खेतों में अपनाना महत्वपूर्ण है।
उनकी सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि किसान अपनी जमीन, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय बाजार की मांग को समझकर खेती में नए विकल्प अपना सकते हैं। सब्जियों, फल और फूलों की खेती को उचित योजना के साथ अपनाने से कृषि आय बढ़ाने की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
ग्वालियर के किसान गजराज सिंह कुशवाह का सफर बताता है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर प्रयास और खेती में नवाचार के जरिए किसान अपनी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी उन्नत खेती और फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

