बैतूल में कम बारिश को देखते हुए किसानों को पानी की उपलब्धता के अनुसार चना, सरसों, मसूर और अलसी जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में इस साल कम बारिश को देखते हुए किसानों को फसल चयन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कृषि विभाग के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करने तथा उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर खेती की योजना बनाने में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई एपीसी बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वर्तमान जल परिस्थिति को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिनमें सिंचाई की कम आवश्यकता होती है।
गेहूं की जगह कम पानी वाली फसलों को दें प्राथमिकता
कम वर्षा की स्थिति में किसानों को गेहूं जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय चना, सरसों, मसूर और अलसी जैसी फसलों को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया गया है।
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसानों को उपलब्ध पानी के अनुसार फसल का चुनाव करने की जानकारी दी जाए। कृषि विभाग का मैदानी अमला किसानों के साथ नियमित संपर्क कर उन्हें कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के विकल्प बताएगा।
गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगे अधिकारी
बैठक में कृषि अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए। एसडीओ कृषि को नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर किसानों की समस्याओं और जरूरतों की जानकारी लेने के लिए कहा गया है।
वहीं, डीडीए कृषि को ब्लॉक स्तर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों का रोस्टर तैयार करने और उनके फील्ड भ्रमण की निगरानी करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर सही फसल योजना तैयार करने में मदद करना है।
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किसान संगठनों से भी लिए गए सुझाव
एपीसी बैठक में किसान संगठनों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया। उनसे खेती और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए गए। प्रशासन का प्रयास है कि कम बारिश की मौजूदा स्थिति में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फसल प्रबंधन और कृषि संबंधी सलाह को गांव स्तर तक पहुंचाया जाए।
खाद की उपलब्धता और वितरण की भी समीक्षा
बैठक के दौरान जिले में उर्वरक की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को जरूरत के समय पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो और वितरण के दौरान किसी तरह की परेशानी न आए।
संबंधित अधिकारियों को उर्वरक वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखने और किसानों की आवश्यकता के अनुसार समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
विशेष ग्राम सभाओं में किसानों को दी जाएगी जानकारी
सहकारिता और कृषि विभाग के अधिकारियों को समय-सीमा में विशेष ग्राम सभाओं और किसान संवाद बैठकों का आयोजन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों के जरिए किसानों को कम बारिश की स्थिति में फसल चयन, उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग, सिंचाई प्रबंधन और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि किसान उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन करने के बाद ही ऐसी फसल का चयन करें, जिससे पानी की कमी के दौरान फसल पर प्रतिकूल प्रभाव कम हो।
पशुपालन और उद्यानिकी विभाग की भी समीक्षा
बैठक में कृषि के साथ-साथ पशु विभाग, हॉर्टिकल्चर और रेशम विभाग की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से विभागीय योजनाओं और किसानों तक पहुंच रही सुविधाओं की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
प्रशासन के अनुसार, मौजूदा मौसम और जल उपलब्धता को देखते हुए किसानों को समय पर उचित सलाह देना जरूरी है, ताकि वे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर खेती से होने वाले नुकसान को कम कर सकें।

