प्राकृतिक खेती से अब तक 27.32 लाख किसान और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जुड़ा है। सरकार ने खेत बचाओ अभियान, डिजिटल फार्मर आईडी और मिट्टी संरक्षण पर जोर दिया।
केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती को देशभर में बढ़ावा देने के साथ किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी तेजी से काम शुरू किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में प्राकृतिक खेती, डिजिटल फार्मर आईडी, मिट्टी संरक्षण और दलहन-तिलहन के उत्पादन को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
सरकार के अनुसार, प्राकृतिक खेती के अभियान से अब तक 27.32 लाख किसान जुड़ चुके हैं, जबकि करीब 12.85 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र इसके दायरे में आ चुका है। इसके अलावा किसानों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के लिए डिजिटल कृषि व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती से जुड़े 27.32 लाख किसान
समीक्षा बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य किसानों को कम लागत वाली और पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर प्रोत्साहित करना है। प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, रासायनिक इनपुट पर निर्भरता घटाने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में इस अभियान को और व्यापक बनाने के लिए 33 हजार कृषि सखियों की तैनाती का भी उल्लेख किया गया। इनका उद्देश्य किसानों तक खेती से संबंधित जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने में सहायता करना है।
इसी महीने शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
बैठक में मिट्टी की घटती उर्वरता, फसल अवशेष प्रबंधन और रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल जैसी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। किसानों और कृषि भूमि को इन चुनौतियों से बचाने के लिए सरकार 22 अक्टूबर से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने की तैयारी में है।
इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक और मैदानी कर्मचारी किसानों तक पहुंचकर मिट्टी की जांच, जैविक पदार्थों के संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन और संतुलित पोषण प्रबंधन के बारे में जानकारी देंगे। सरकार का प्रयास है कि अभियान का लाभ सीधे गांवों और खेतों तक पहुंचे।
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10.77 करोड़ किसानों की बनी डिजिटल फार्मर आईडी
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। देश में करीब 14 करोड़ किसानों को डिजिटल रूप से जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 10.77 करोड़ से अधिक किसानों की डिजिटल फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है।
डिजिटल फार्मर आईडी के जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं, संस्थागत ऋण, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और आपदा राहत जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे किसान की पहचान और कृषि संबंधी जानकारी को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल क्रॉप सर्वे में 26.73 करोड़ से अधिक खेत शामिल
सरकार के डिजिटल कृषि अभियान के तहत चालू खरीफ सीजन में अब तक 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस व्यवस्था के माध्यम से फसलों से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यमों और तकनीकी संसाधनों के जरिए जुटाई जा रही है।
इसके अलावा राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत 80.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का डिजिटल मैपिंग कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई। सरकार का मानना है कि इस तरह के डिजिटल डेटा से कृषि योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने और किसानों की जरूरत के अनुसार निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
पिछड़ रहे राज्यों में तेजी लाने के निर्देश
केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को उन राज्यों और जिलों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए जहां डिजिटल फार्मर आईडी और डिजिटल सर्वे का काम अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है। ऐसे क्षेत्रों में विशेष कैंप आयोजित कर किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर जोर दिया गया।
बैठक में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्यों को स्वीकृतियां जारी रखने और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की प्रशासनिक देरी दूर करने पर भी चर्चा हुई।
किसानों की आय और कृषि आत्मनिर्भरता पर जोर
केंद्र सरकार की कृषि नीति में किसानों को आर्थिक सहायता, संस्थागत ऋण की उपलब्धता, डिजिटल सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि ढांचे और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही दलहन और तिलहन के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
मासिक समीक्षा व्यवस्था के जरिए मंत्रालय के अलग-अलग विभागों और राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति पर लगातार नजर रखने का फैसला किया गया है। अधिकारियों के लिए वित्तीय और भौतिक लक्ष्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि योजनाओं का प्रभाव केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित न रहे बल्कि उसका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके।

