बिहार में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए MIDH के तहत किसानों को ₹36 हजार प्रति हेक्टेयर तक अनुदान मिलेगा। 100 हेक्टेयर खेती का लक्ष्य तय।
बिहार के किसानों के लिए औषधीय पौधों की खेती से जुड़ी अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में औषधीय फसलों का क्षेत्र बढ़ाने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए ₹36,000 प्रति हेक्टेयर तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ खेती के नए विकल्प उपलब्ध कराना और राज्य में औषधीय पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
100 हेक्टेयर में होगी औषधीय पौधों की खेती
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने MIDH के तहत औषधीय पौधों के क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य 100 हेक्टेयर तय किया है। इस योजना के तहत चयनित क्षेत्रों में विभिन्न औषधीय फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
योजना में मुख्य रूप से एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी जैसी फसलों को शामिल किया गया है। इन पौधों की खेती के लिए किसानों को योजना के तहत निर्धारित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
किसानों को कितनी मिलेगी सब्सिडी?
औषधीय पौधों की खेती करने वाले पात्र किसानों को ₹36,000 प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। 100 हेक्टेयर के निर्धारित लक्ष्य के हिसाब से इस योजना के लिए कुल ₹36 लाख की राशि निर्धारित की गई है।
इस वित्तीय सहायता का इस्तेमाल किसान औषधीय फसलों की खेती शुरू करने में आने वाली शुरुआती लागत के एक हिस्से को पूरा करने के लिए कर सकेंगे।
चार औषधीय फसलों पर रहेगा फोकस
योजना के तहत चार प्रमुख औषधीय पौधों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें शामिल हैं:
- एलोवेरा
- अश्वगंधा
- ब्राह्मी
- शतावरी
सरकार का उद्देश्य इन फसलों को किसानों के लिए वैकल्पिक कृषि गतिविधि के रूप में विकसित करना है। औषधीय उत्पादों की मांग को देखते हुए इन फसलों के उत्पादन को संगठित तरीके से बढ़ाने की योजना है।
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क्लस्टर मॉडल से होगी खेती
औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित खेती पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत एक ही क्षेत्र में अपेक्षाकृत बड़े भू-भाग पर निर्धारित औषधीय फसलों की खेती कराई जाएगी।
एलोवेरा, अश्वगंधा और ब्राह्मी के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम या क्लस्टर में 5 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित करने का प्रावधान बताया गया है। वहीं शतावरी की खेती के लिए प्रति राजस्व ग्राम या क्लस्टर 4 हेक्टेयर क्षेत्र रखा जाएगा।
किसानों को तकनीकी जानकारी भी मिलेगी
क्लस्टर आधारित खेती से किसानों तक तकनीकी मार्गदर्शन पहुंचाने में आसानी हो सकती है। एक क्षेत्र में एक जैसी फसल होने से उत्पादन तकनीक, फसल प्रबंधन और खेती से संबंधित जानकारी किसानों को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इसके अलावा किसानों को बाजार और विपणन व्यवस्था से जोड़ने में भी क्लस्टर मॉडल उपयोगी हो सकता है। इससे औषधीय फसलों के उत्पादन को संगठित रूप देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री ने बताया सरकार का उद्देश्य
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक कृषि के साथ आय के नए संभावित विकल्प उपलब्ध कराना है। सरकार चयनित क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से इस खेती का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।
कुल मिलाकर, MIDH के तहत 100 हेक्टेयर में औषधीय पौधों की खेती और ₹36,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान की पहल बिहार के किसानों के लिए खेती में विविधता लाने का एक अवसर प्रदान कर सकती है। योजना के तहत एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी की खेती को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

